Guftagoo: गुफ्तगू: रेप के आरोपियों को अभयदान की चर्चा तहसील से निकलकर जिला मुख्यालय पहुंची, आखिर बचाने में किसका किरदार??

रेप के आरोपों में सचिवों को ‘अभयदान’
Guftagoo: गुफ्तगू के गलियारों में इन दिनों एक सनसनीखेज़ मामला गर्म है। पंचायती राज व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे दो गांवों के सचिव इन दिनों ऐसी मुश्किल में हैं, जो तहसील की चौखट लांघकर सीधे जिला मुख्यालय तक पहुंच चुकी है। मामला है पड़ोसी जिले की एक आदिवासी युवती से कथित दुष्कर्म का। चर्चाओं पर भरोसा करें तो दोनों सचिवों ने पड़ोसी जिले की युवती को प्रलोभन में फंसाकर बारी-बारी से उसकी अस्मत लूटी। युवती एक प्राइवेट नौकरी में कार्यरत बताई जा रही है। बाद में ‘मुंह बंद रखने’ के लिए तरह-तरह के लालच भी दिए गए, लेकिन बात हाथ से निकल गई।
गुफ्तगू में मुताबिक युवती ने आखिरकार पास के थाने का दरवाज़ा खटखटा दिया। पुलिस ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए बिना देर किए एफआईआर दर्ज कर ली। हालांकि अब तक दोनों सचिव सलाखों के पीछे नहीं पहुंच पाए हैं, लेकिन इसकी वजह कानून की ढिलाई नहीं, बल्कि राजनीतिक रसूख बताया जा रहा है।
चर्चा है कि जिले के एक पूर्व दिग्गज पंचायत प्रतिनिधि, जिनके संरक्षण में ये दोनों सचिव आते हैं ने मामले को दबाने के लिए पड़ोसी जिले तक हाई-वोल्टेज एप्रोच का इस्तेमाल कर रहे हैं। वजह भी साफ है अगर गिरफ्तारी हुई तो नौकरी जाएगी और इज्ज़त भी।
उधर, आदिवासी युवती किसी भी दबाव या प्रलोभन में आने को तैयार नहीं है। उसने साफ कहा है कि उसे सिर्फ और सिर्फ न्याय चाहिए और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो अब सवाल यह है कि क्या रसूख कानून पर भारी पड़ेगा, या फिर कानून अपना रास्ता खुद बनाएगा? गुफ्तगू के सूत्रों का कहना है कि पड़ोसी जिले की पुलिस कभी भी दोनों सचिवों को दबोच सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो सचिवों की कुर्सी के साथ-साथ उनके संरक्षक की साख पर भी सवाल उठना तय है। फिलहाल जिले की सियासी और प्रशासनिक गलियों में यही चर्चा सबसे ज्यादा सुनी जा रही हैं।




