Rahveer Yojana: राहवीर योजना फाइलों में दबकर रह गई, 9 माह में सिर्फ 5 प्रकरण

सिर्फ दो नाम स्वीकृत, राशि का कोई पता नहीं
Rahveer Yojana: बैतूल। सड़क हादसों में घायलों की जान बचाने वाले नागरिकों को सम्मानित करने उद्देश्य से शुरू की गई राहवीर योजना खुद ही लापरवाही और उदासीनता की शिकार हो गई है। सरकार ने इस योजना की शुरुआत 1 अप्रैल 2025 को बड़े दावों के साथ की थी। उम्मीद थी कि इससे लोगों को सड़क दुर्घटना में घायल पीड़ितों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की प्रेरणा मिलेगी, लेकिन 9 महीने बीत जाने के बाद भी यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी नजर आ रही है।
जिले में अब तक सिर्फ 5 प्रकरण ही राहवीर योजना के तहत सामने आए हैं। इनमें से भी महज दो लोगों के नाम पुरस्कार के लिए स्वीकृत किए गए, जबकि तीन प्रकरण लंबित हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन दो लोगों के नाम स्वीकृत भी हुए हैं, उन्हें भी अब तक राशि का कोई अता-पता नहीं है। यह स्थिति उन दावों के विपरीत है, जिनमें कहा गया था कि योजना पीड़ितों को तुरंत चिकित्सा उपलब्ध कराने वाले नागरिकों को प्रोत्साहन देगी।
योजना की जमीनी हकीकत
राहवीर योजना का उद्देश्य सड़क हादसे के बाद गोल्डन ऑवर में पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने के लिए आम नागरिकों को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत गंभीर रूप से घायल किसी भी व्यक्ति को नजदीकी अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने वाले राहगीर को 25 हजार रुपए का इनाम दिए जाने की प्रावधान है। यह राशि के लिए जिला परिवहन विभाग के माध्यम से पुरुस्कार के लिए भेजी जाती है, लेकिन विभागीय प्रक्रिया इतनी धीमी और उलझी हुई है कि लोग योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं। जिले में आए पांच प्रकरणों में से दो नाम तो चयनित कर लिए गए, लेकिन राशि जारी करने में विभागीय उदासीनता साफ दिखती है। संबंधित परिवार और राह वीर लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल प्रस्ताव भेज दिया गया है जैसा जवाब ही मिलता है।
क्यों अटकी पड़ी है राहवीर योजना?
योजना के तहत नाम भेजने, जांच कराने गंभीरता की पुष्टि करने और स्वीकृति की प्रक्रिया कई स्तरों से होकर गुजरती है। जिला अस्पताल में नाम दर्ज होने के बाद यह फाइल जांच कमेटी के पास जाती है, जहां दुर्घटना की गंभीरता और पीड़ित की स्थिति का आकलन किया जाता है। इसके बाद रिपोर्ट परिवहन विभाग से होते हुए शासन को भेजी जाती है। इन चरणों में फाइलें हफ्तों नहीं, महीनों तक रुकी रहती हैं। परिणामस्वरूप राहवीरों तक प्रोत्साहन राशि पहुंचने में अनिश्चितता बनी हुई है।
योजना की जानकारी का अभाव
स्थानीय स्तर पर लोगों में योजना को लेकर जागरूकता भी बेहद कम है। अधिकांश लोग नहीं जानते कि दुर्घटना में घायल को अस्पताल पहुंचाने पर उन्हें सरकार की ओर से इनाम दिया जा सकता है। पुलिस, अस्पताल और परिवहन विभाग की ओर से भी कोई विशेष प्रचार या सार्वजनिक अभियान नहीं चलाया गया है। यही वजह है कि 9 माह में जिले में केवल पांच ही प्रकरण दर्ज हुए, जबकि वास्तविकता में सड़कों पर हादसों की संख्या इससे कहीं अधिक है।
सरकार की ओर से कहा गया था कि योजना से लोग पीड़ितों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने में रुचि लेंगे। गोल्डन ऑवर यानी दुर्घटना के पहले घंटे में इलाज मिलने से जीवन बचाने की संभावना सबसे ज्यादा होती है, लेकिन जब योजना में देरी और अनिश्चितता बढ़ती है तो लोग निर्भय होकर मदद करने से भी हिचक सकते हैं। जब दो स्वीकृत लाभार्थियों को भी राशि नहीं मिल पा रही है तो यह योजना की साख पर सवाल खड़े करता है। विभागीय लापरवाही यह साफ बताती है कि कागजों पर घोषित योजनाओं को जमीन पर लाने में गंभीरता का अभाव है।
बेहतर क्रियान्वयन की जरूरत
यदि राहवीर योजना को सफल बनाना है, तो जिला प्रशासन और विभागों को तेज, पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया अपनानी होगी। राहवीर योजना का उद्देश्य सराहनीय है, लेकिन अगर समय पर राशि नहीं पहुंची, तो इससे लोगों की संवेदनशीलता प्रभावित हो सकती है। यह योजना तभी सार्थक होगी जब वास्तविक राहवीरों तक सम्मान और प्रोत्साहन राशि समय पर पहुंच सके।
इनका कहना है…..
राहवीर योजना में दो नाम पुरस्कार के लिए स्वीकृत हुए हैं। इन नाम को ग्वालियर परिवहन विभाग को भेज दिए हैं। केंद्र सरकार की तरफ से सहायता राशि दी जाती है।
अनुराग शुक्ला जिला परिवहन अधिकारी बैतूल
हमारे यातायात विभाग की तरफ से कुल पांच लोगों के नाम योजना के तहत भेजे हैं। नाम की स्वीकृति स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग द्वारा दी जाती है।
गजेंद्र केन, यातायात प्रभारी बैतूल




