Betul Samachar: ट्रेचिंग ग्राउंड कचरा निष्पादन जांच में तीन तकनीकी अधिकारी शामिल

जांच के परिणाम सामने आने पर हो सकती बड़ी कार्यवाही, कचरा निष्पादन में गड़बड़ी, भुगतान करोड़ों का, काम नाममात्र!

बैतूल। शहर के गोठाना स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड में कचरा निष्पादन के नाम पर हुआ कथित घोटाला अब गंभीर रूप ले चुका है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल के सख्त निर्देशों के बाद शुरू हुई जांच में लगातार नए तथ्य सामने आने लगे हैं। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं की बू आते ही अब तीन और अधिकारियों को टीम में शामिल कर दायरा बढ़ा दिया गया है, ताकि एक-एक परत खुल सके और जवाबदेही तय हो सके।

नगर पालिका द्वारा पूरे शहर के 33 वार्डों से प्रतिदिन निकलने वाले कचरे को गोठाना किदवई वार्ड के ट्रेचिंग ग्राउंड पर इक_ा किया जाता है। सालों से जमा कचरे का पहाड़ अब इतनी ऊंचाई पर पहुंच चुका है कि वार्डवासियों का जीवन दूभर हो गया है। दुर्गंध और प्रदूषण को लेकर मोहल्लेवासी कई बार प्रदर्शन, चक्काजाम और विरोध कर चुके हैं। शिकायतें बढ़ीं तो नगर पालिका ने कचरा हटाने के लिए नोएडा की इको स्टेंड कंपनी को 6 करोड़ रुपए का टेंडर दिया।

लेकिन हकीकत यह निकली कि कंपनी ने थोड़ा-बहुत दिखावटी काम करके जून से काम बंद कर दिया। इसके बावजूद कंपनी को 2 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया। सवाल यह है जब कचरा उठा ही नहीं तो भुगतान किस बात का? इसी गड़बड़ी ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की सख्ती से खुली फाइलें

स्थानीय लोगों की शिकायतें सीधे प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचीं। स्थिति को गंभीर मानते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष खंडेलवाल ने तत्काल कलेक्टर को जांच कमेटी गठित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर नरेन्द्र सूर्यवंशी ने पहले तीन सदस्यों की जांच टीम बनाई जिसमें अपर कलेक्टर, एसडीएम, पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री जांच शुरू हुई तो पता चला कि टीम में कोई तकनीकी विशेषज्ञ शामिल नहीं किया गया, जबकि कचरा निष्पादन और भुगतान के ये मामले पूरी तरह तकनीकी अनुमानों पर आधारित होते हैं। यानी बिना तकनीकी समझ के जांच अधूरी मानी जा रही थी।

तकनीकी टीम की एंट्री से जांच में तेजी

अब इस टीम में आरईएस, माइनिंग विभाग और एक अन्य तकनीकी विभाग के अधिकारी शामिल कर दिए गए हैं। अब 6 अधिकारी मिलकर जांच करेंगे और हर बिंदु का बारीकी से परीक्षण करेंगे जिसमें कचरा उठाव की वास्तविक स्थिति क्या है? कितने खर्च का भुगतान किया गया? कंपनी और विभागीय अधिकारियों ने किन नियमों की अनदेखी की? काम बंद क्यों हुआ और भुगतान कैसे पास हुआ?

वार्डवासियों की उम्मीद-कार्रवाई जरूर हो!

कचरे के ढेरों से जूझ रहे वार्डवासी लंबे समय से इस समस्या के समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं। वे साफ शब्दों में कहते हैं कि कागज़ों में सफाई और धरातल पर कचरे के पहाड़ अब और बर्दाश्त नहीं। जांच ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि कचरे का उठाव बेहद कम पाया गया तो यह सीधा मामला धोखाधड़ी और लापरवाही का बन सकता है। ऐसे में जिन अधिकारियों ने भुगतान फाइल क्लियर की हैं, उन पर भी कड़ी कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है। कलेक्टर कार्यालय में इस प्रकरण को लेकर विशेष बैठक भी हुई, जिसमें प्रदेशाध्यक्ष खंडेलवाल स्वयं मौजूद रहे। उनका साफ संदेश जनता की गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा जवाबदेही से खर्च हो। अगर भ्रष्टाचार हुआ तो किसी को छोड़ा नहीं जाएगा।

बैतूल नगर पालिका की यह लापरवाही और कंपनी का यह रवैया अब किसी से छिपा नहीं है। जांच का दायरा बढ़ चुका है और अब कचरे के ढेरों के बीच दबा सच बाहर आने में देर नहीं लगेगी।

इनका कहना…..

ट्रेचिंग ग्राउंड मामले की दोबारा जांच नहीं हो रही है। इस जांच टीम ने और तीन अधिकारियों को शामिल किया है। जल्द ही जांच पूरी की जाएंगी।

अभिजीत सिंह

एसडीएम, बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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