Betul News: संस्मरण-2 : सरयू नदी से स्नान कर मिट्टी लाने की जिम्मदारी ने अभिभूत किया, विवादित ढांचे तक पहुंचना सबसे यादगार क्षण था

Betul News: Memoir-2: The responsibility of bringing soil after bathing in Saryu river overwhelmed me, reaching the disputed structure was the most memorable moment.

सरयु नदी से स्नान कर मिट्टी लाना अभिभूत करने वाला क्षण था…

Betul News: बात उस समय की है जब उम्र महज 24-25 बरस की थी। चूंकि शुरू से ही बजरंग दल से जुड़े हुए थे, इसलिए थोड़ा जज्बा ज्यादा था। बस इसी जज्बे के कारण नवंबर 1992 के तीसरे सप्ताह में टीम के साथ कारसेवक के रूप में अयोध्या जाने का मौका मिला। जब लगभग 62 लोग कार सेवक के रूप में अयोध्या निकले तो मन में कई तरह के सवाल थे, लेकिन भगवान राम के नाम के आगे सारे सवाल निरर्थक साबित हुए और ट्रेन से सभी लोग सबसे पहले इटारसी पहुंचे। अयोध्या जाने के पहले हमने चित्रकूट में भगवान श्रीराम के दर्शन किए, इससे मन को काफी शांति मिली। चित्रकूट से वापस ट्रेन से इटारसी से आए तो यहां आने पर मन काफी आहत था।

दरअसल 62 लोगों में से कई लोग ऐसे थे जो पारिवारिक कारणों से अयोध्या नहीं जाना चाहते थे,लेकिन हमने मन में ठानी थी। हमारी सात लोगों की टीम इटारसी से फैजाबाद के लिए निकल गई। जब फैजाबाद पहुंचे तो हमारा स्वागत हुआ और टेंट में रूकने की व्यवस्था की गई। इसे संयोग ही कहे कि करीब 6 दिनों तक हमारी टीम को सेवा करने का मौका मिला। इसके बाद हमे अयोध्या से मिट्टी लाने की जवाबदारी सौंपी गई तो मन प्रफुल्लित हो उठा। उस समय ऐसा लग रहा था जैसे सौंपी गई जवाबदारी को हर हाल में पूरा करना है। बस इसके बाद सरयु नदी में स्नान कर हम लक्ष्य की ओर बढ़ते गए। मस्जिद के सामने मिट्टी लाकर रखने के काम में जुटे रहे।

आखिर 6 दिसंबर का वह पल आ गया जब अयोध्या में विवादित ढाचे से आधा किमी पंडाल लगाए गए थे। यहां पर लाल कृष्ण आडवानी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती के भाषण शुरू हुए तो कार्यकर्ताओं में इतना जोश भरा गया कि दोपहर 12 बजे के लगभग सभी आगे बढऩे लगे। करीब डेढ़ लाख लोग यहां पर जमा हुए थे। सौंभाग्य की बात है कि मैं और मेरा मित्र सुनील देशमुख भी आगे बढ़े। विवादित स्थल की ओर जैसे ही कारसेवकों ने कूच किया तो हम भी आगे बढ़े और दी गई सबल से इसे तोडऩा शुरू किया। शाम 4.30 बजे तक विवादित स्थल को समतल कर दिया गया। यह समझ से परे था कि ईश्वरीय शक्ति ऐसी मिली की पता ही नहीं चला, 3-4 विवादित स्थल तोडऩे का काम कब खत्म हो गया।

मैं और मेरा मित्र सुनील विवादित स्थल को ढहाने के लिए सबल लेकर चढ़े थे, दो बार नीचे भी गिरे और हल्की चोट भी आई, लेकिन जज्बा कम नहीं हुआ। इसके बाद अन्य लोगों के साथ मिलकर विवादित स्थल तोड़ दिया गया। इसके बाद शाम 6.30 बजे नाली खोदकर झोपड़ीनुमा स्थल कारसेवकों ने बना दिया। विवादित स्थल समतल होने के बाद सभी को जानकारी मिली कि सेना किसी भी समय आ सकती है, इसलिए शाम ढहलते ही पैदल अपने साथियों के साथ अयोध्या से रेल पटरी के सहारे अयोध्या से फैजाबाद के लिए निकल गए। रास्ते में कई पेड़ काट दिए गए थे, इससे मन में काफी डर भी था, लेकिन भगवान श्रीराम का नाम लेकर पैदल ही फैजाबाद आए। यहां से ट्रेन पकडक़र बैतूल आए तो कार सेवक बनकर अयोध्या में की गई सेवा से जो अनुभूति मिली उसे शब्दों में बता पाना मुश्किल है। अब जब भगवान श्रीराम का विशाल मंदिर अयोध्या में बन रहा तो एक बार इस स्थान पर दोबारा जाने की इच्छा है।

(बजरंग दल भैंसदेही के प्रखंड संयोजक रहे नरेश जैन ने जैसा सांझवीर टाईम्स को बताया )

whatsapp

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

Related Articles

Back to top button