Betul News: काशी तालाब लील गया लाखों रुपयों का फव्वारा, कभी किसी ने चलते नहीं देखा!
Betul News: Kashi pond swallowed the fountain worth lakhs of rupees, no one ever saw it running!

लोगों को आकर्षित करने की आड़ में लाखों का खेल
Betul News: बैतूल। शहर की सुंदरता बढ़ाने और पर्यटकों को आकर्षित करने के नाम पर नगर पालिका ने पिछले कई सालों में कई योजनाओं पर लाखों रुपए खर्च किए पर इसका फायदा नहीं मिला। नपा के अधिकारियों और तत्कालीन जनप्रतिनिधियों ने मिलकर जनता द्वारा दिए जाने वाले टैक्स की राशि का किस कदर दोहन किया है। इसके सिर्फ अवशेष ही शेष रह गए हैं। बर्बादी का पांचवां ताजा उदाहरण सदर स्थित काशी तालाब है, जिसके बीच कुछ वर्षों पूर्व लगाया फव्वारा है जो आज लापता है। लाखों रुपए खर्च कर फव्वार लगा तो दिया, लेकिन आज पर्यंत तक इसे किसी ने भी इसे चलते हुए नहीं देखा।
ट्रायल कर निकाला बिल और भगवान भरोसे छोड़ दी सुविधा
स्थानीय लोगों का कहना है कि फव्वारा लगने के बाद इसका एक-दो बार ट्रायल किया गया होगा, लेकिन उसके बाद से यह पूरी तरह बंद है। फव्वारे के आसपास का क्षेत्र अब जर्जर हालत में है और बारिश के पानी मे फव्वारा डूब चुका है । यह जगह केवल मच्छरों का अड्डा बन चुकी है। नगर पालिका का दावा था कि फव्वारे से तालाब की खूबसूरती बढ़ेगी और लोग यहां घूमने आएंगे, लेकिन हकीकत यह है कि जनता के टैक्स से खरीदी गई यह सुविधा कभी उपयोग में ही नहीं आई।
शहर की खूबसूरती की आड़ में सिर्फ स्वहित साधने का खेल
गौरतलब है कि यह मामला नगर पालिका द्वारा की गई बर्बादी का पांचवां नमूना है। इससे पहले भी अभिनंदन सरोवर, अंबेडकर चौक और अन्य स्थानों पर लगाए गए फव्वारे व उपकरण सालभर बंद पड़े रहते हैं। सवाल उठता है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि ऐसे प्रोजेक्ट क्यों पास करते हैं, जिनका जनता को कोई लाभ नहीं मिलता।
आम जनता का कहना है कि योजनाओं का उद्देश्य केवल कमीशनखोरी और दिखावा बनकर रह गया है। शहर की खूबसूरती की आड़ में केवल स्वहित साधने के ही खेल खेले गए हैं। इसका उदाहरण आज बर्बादी के रूप में देखने को मिल रहा है। यदि यही हाल रहा तो आने वाले समय में शहर की सुंदरता के नाम पर करोड़ों रुपए बर्बाद होते रहेंगे और सुविधाएं केवल कागजों में ही दिखाई देंगी। काशी तालाब का यह फव्वारा साफ तौर पर जनता की गाढ़ी कमाई की अनदेखी और जिम्मेदारों की लापरवाही को उजागर कर रहा है।




