Betul Ki Khabar: ऑपरेटरों का वेतन 28 हजार, संपत्ति लाखों में, आलीशान मकान दे रहे गवाही
Betul Ki Khabar: Operators' salary is 28 thousand, property worth lakhs, luxurious houses are giving testimony

अधिकारियों की सांठगांठ से एडवांस में ले लिए समितियों के प्रस्ताव, अब बोलने से बच रहे अधिकारी
Betul Ki Khabar: बैतूल। वन विभाग में संदिग्ध 10 कंप्यूटर ऑपरेटरों की जीवनशैली और संपत्ति ने प्रशासन और विभागीय हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं। महज 28 हजार रुपए मासिक वेतन पाने वाले इन ऑपरेटरों के पास लाखों रुपए की संपत्ति, आलीशान मकान और महंगे वाहनों का मालिकाना हक होना अब चर्चा का विषय बन गया है। सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में इन ऑपरेटरों ने न केवल शहर में ऊंची कीमत वाले प्लॉट खरीदे, बल्कि उन पर आधुनिक सुविधाओं से लैस मकान भी खड़े कर दिए हैं। पश्चिम वन मण्डल के एक और उत्पादन वन मण्डल के 35-35 लाख रुपए के मकान इस बात के गवाह हैं कि, मण्डल में स्वहित के लिए अधिकारियों की शह पर किस कदर नियमो को तोड़ा मरोड़ा जा रहा है। बताया जा रहा है कि उत्पादन में ही पदस्थ एक महिला ऑपरेटर को तो सरकारी क्वार्टर अलाट कर उपकृत तक किया गया है।
इनमें से कई आपरेटरों के पास एक से अधिक चारपहिया वाहन और महंगी बाइकें होना भी बताया जा रहा है । यह सब उस आय से कहीं अधिक है जो उन्हें सरकारी या संविदा पद से मिलती है। हालात ऐसे हैं कि आम जनता के बीच यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि आखिर आपरेटरों की इतनी संपत्ति का स्रोत क्या है? क्या दाल में काला है या पूरी दाल ही काली है।

नियम विरुद्ध समितियों से लिए एडवांस प्रस्ताव चर्चा में
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एक वन मण्डल की करीब तीन से चार रेन्जो में कार्यरत वन सुरक्षा समितियों के जरिये चौपाल, फेंसिंग,सड़क, नाली जैसे निर्माण कार्यों के एडवांस प्रस्ताव लिए गए जो काम अभी हुए ही नहीं हैं। इन प्रस्तावों में ऑपरेटरों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। आनन-फानन में पारित इन प्रस्तावों में वित्तीय अनियमितताओं और बजट के दुरुपयोग की आशंका व्यक्त की जा रही है। यह आरोप है कि प्रस्तावों की तैयारी, फाइलों के संकलन और मंजूरी की प्रक्रिया में ऑपरेटरों ने अहम भूमिका निभाई, जिससे कुछ खास अधीकारियों को एडवांस में लाभ मिलने की जानकारी सामने आ रही है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इन प्रस्तावों को मंजूरी देने में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं ऑपरेटरों और उच्च अधिकारियों के बीच गहरी सांठगांठ तो नहीं है।
जांच हुई तो आपरेटरों के अलावा अधिकारी भी संदेह के दायरे में
स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि कंप्यूटर ऑपरेटर का पद भले ही तकनीकी सहयोग का हो, लेकिन वर्षों तक एक ही जगह पर टिके रहने से वे न केवल विभागीय गतिविधियों के जानकार हो जाते हैं, बल्कि फाइलों और प्रस्तावों में बदलाव करने की भी पूरी क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि इन पर नजर रखने के बजाए इन्हें पर्दे के पीछे के खिलाड़ी कहा जाने लगा है। जिले में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठ रही है। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि ऑपरेटरों की संपत्ति और बैंक खातों की सही तरीके से जांच हो जाए तो कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
प्रशासनिक हलकों में भी यह चर्चा है कि यदि मामले की जांच ईमानदारी से की गई तो न केवल ऑपरेटरों बल्कि उनके संरक्षक अधिकारियों की भूमिका भी उजागर होगी। फिलहाल, विभाग ने इस पर चुप्पी साध रखी है। इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक वासु कनोजिया को उनके मोबाइल 9424790300 पर काल किया, लेकिन उनसे चर्चा नहीं हो सकी।




