Politics: राजनीतिक हलचल: शक्ति प्रदर्शन में नाश्ते पर भी किसने खाया 5 रुपए कमीशन?? प्रशिक्षण शिविर के बहाने कैसे लूटी वाहवाही??? निगम मण्डल में किसके हाथ लगेगी कमान???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…..
Politics: Political stir: Who ate Rs 5 commission on breakfast in the show of power??

शक्ति प्रदर्शन के नाश्ते में भी कमीशन
पिछले दिनों विपक्षी पार्टी के पर्यवेक्षक नब्ज टटोलने जिले के प्रवास पर आए थे। शहर में जिस स्थान पर शक्ति प्रदर्शन हुआ, वहां भीड़ बुलाने के लिए एक नेता ने पोहा-जलेबी की व्यवस्था की थी, ताकि पर्यवेक्षक के सामने कार्यकर्ताओं से ऊंची आवाज में नारे लगाए जा सके। इसमें वे कितने कामयाब हो सके, इतना तो पता नहीं चल सका, लेकिन जिस प_े को पोहा-जलेबी की व्यवस्था करने का जिम्मा दिया था, उसने 5 रुपए प्लेट के हिसाब से कमीशन खा डाला। यह बात कोई और नहीं, बल्कि उनके साथ के ही लोग चर्चा करते देखे गए। अब नाश्ते पर भी विपक्षी पार्टी के नेता 5 रुपए का कमीशन खा रहे हैं , फिर इनकी राजनीति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रशिक्षण शिविर के बहाने वाहवाही
विपक्षी पार्टी का प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण शिविर पिछले दिनों मालवा क्षेत्र में आयोजित किया गया। दो दिन के इस शिविर में पूरे प्रदेश के माननीयों को आमंत्रित किया गया था। खबर है कि शिविर में विपक्षी पार्टी के माननीयों को विधानसभा सत्र के पहले प्रशिक्षण देकर सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाने के टिप्स राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक नेताओं ने दिए। इस शिविर में वैसे तो माननीयों को ही बुलाया था, लेकिन जिले के एक पूर्व माननीय भी शिविर में गए थे। यह बात उनके समर्थक सोशल मीडिया पर जाहिर कर रहे हैं। तर्क दिया जा रहा है कि यदि एक पूर्व माननीय को आमंत्रित किया गया था तो दूसरे शिविर में क्यों नहीं पहुंचे या फिर झूठी वाहवाही लूटने के लिए प्रचार किया जा रहा है। अंदर की खबर सामने आई है कि शिविर प्रमुख विपक्षी पार्टी का था। इसमें बाहरी स्थल पर कोई भी जा सकता था। अंदर प्रशिक्षण में केवल माननीयों को ही आमंत्रित किया गया था, इसलिए कुछ नेता सैर-सपाटे के उद्देश्य से भी शिविर के बाहर दिखाई दिए।
निगम मंडल से जागी आस
सत्तारूढ़ पार्टी में वैसे तो अभी जिले के लिए फीलगुड और राहत दिखाई दे रही है। केंद्र से लेकर प्रदेश में जिले की राजनीति का दबदबा है, लेकिन ऐसे समय जब सत्ता और संगठन में तालमेल स्थापित करने के लिए 40 से अधिक निगम मंडलों में नियुक्ति की कवायद अचानक तेज हुई है। हालांकि इस बात में कितनी सत्यता है। यह कोई नहीं बता रहा है, लेकिन मीडिया में आ रही खबर से जिले की राजनीति में भी फीलगुड देखा जा रहा है। कुछ नाम जिले से भी निगम मंडल में शामिल करने की चर्चा है। इस बात में कितनी सच्चाई है यह आने वाले दिनों में स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी में पद की चाह रखने वालों की दौड़ धूप तेज हो गई है।




