Betul News : राजनीति के संस्कारों में ढले प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमन्त, जब नेग के लिए रोक ली थी बारातियों की बस
Betul News: State BJP president Hemant, who is molded in the values of politics, when he stopped the bus of the wedding party for Neg

शरारतों से शुरू हुआ सफर आज नेतृत्व की ऊंचाई पर, पिता के सानिध्य में शुरू हुआ राजनीतिक सफर
Betul News : बैतूल (सत्येंद्र सिंह परिहार) । प्रदेश भाजपा की कमान संभालने वाले बैतूल विधायक हेमन्त खण्डेलवाल की छवि एक शालीन, सरल और सेवाभावी नेता की है। जनसेवा को समर्पित उनके व्यवहार और कार्यशैली ने उन्हें प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की पसंद बनाया है। लेकिन राजनीति के इस शिखर तक का उनका सफर केवल गंभीरता और समर्पण का ही नहीं रहा, बल्कि उनके बचपन में कई रोचक और शरारतों से भरे किस्से भी शामिल हैं।
हेमन्त खण्डेलवाल के बाल्यकाल के मित्रों के अनुसार, वे न केवल शरारती थे, बल्कि मित्रता निभाने में भी सबसे आगे रहते थे । एक बार उन्होंने अपने खास दोस्त की बारात बीच सड़क पर रोक दी थी और जब तक नेग नहीं मिला, तब तक बारात को आगे नहीं बढ़ने दिया। उनकी इन्हीं हरकतों को देखकर उनके पिता, वरिष्ठ नेता रहे स्व. विजय खण्डेलवाल भी उनके भविष्य को लेकर गंभीर चिंता में पड़ गए थे।
लेकिन परिवार के संस्कारों और जीवन के अनुभवों ने हेमन्त खण्डेलवाल के व्यक्तित्व को तराशा,आज वही चंचल बालक एक विनम्र और दृढ़ नेता के रूप में प्रदेश की राजनीति में ऊंचाई पर पहुंचा है। जरूरतमंदों की मदद करना, आम लोगों की समस्याओं को सुनना और समाधान करना उनकी आदत में शुमार है। उनकी चौखट से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता। हेमन्त खण्डेलवाल की इस सफलता पर बैतूलवासियों को गर्व है। यह केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे जिले के लिए सम्मान की बात है कि उसका प्रतिनिधि प्रदेश नेतृत्व की कमान संभाल रहा है।

गंज क्षेत्र की बॉबी होटल पर बैठती थी मित्र मंडली
प्रदेश भाजपा के चीफ बैतूल विधायक हेमन्त खण्डेलवाल के बचपन के मित्र उनकी शरारतों को आज भी याद करते हैं। ट्रांसपोर्ट व्यवसायी मनोज जोशी बताते हैं कि, हेमन्त की शरारतें आज भी सभी मित्रों के जेहन में ताजा हैं। वर्तमान में उनके स्वभाव, उनकी सहजता और कार्यशैली देखकर यकीन नहीं होता कि ये वही हेमन्त खण्डेलवाल हैं जिनकी शरारतें आज उनके कद के आगे फीकी पड़ चुकी हैं। मनोज जोशी सांझवीर से बचपन का एक किस्सा साझा करते हुए बताते हैं। कि हेमन्त और उनकी मित्रता प्रायमरी स्कूल से शुरू हुई थी।
कोठीबाजार के सुभाष प्राथमिक स्कूल में अतुल पगारिया ,नवनीत श्रीवास, मनोज जोशी, राजेन्द्र परिहार, महेंद्र मालवीय, धनराज उपासे, सुरेंद्र वर्मा, राकेश सोनी, राजकुमार अग्रवाल, के ग्रुप के मुखिया हेमन्त खण्डेलवाल हुआ करते थे। साथ मे पढ़ना , लिखना और घूमने , खेलने के साथ ही सभी ने कक्षा पहली से पांचवी तक शिक्षा ग्रहण की। बाद में में कुछ दोस्तो ने न्यू बैतूल स्कूल में प्रवेश ले लिया तो कुछ हेमन्त के साथ ही बस स्टैंड के बाजू मे गवरमेंट मल्टी पर्पस स्कूल आ गए। इसी बीच हेमन्त की शरारतों के किस्से पिता स्व.विजय खण्डेलवाल के कानों तक पहुंच चुके थे, और उन्हें हेमन्त के भविष्य की चिंता होने लगी थी। जिसके चलते उन्होंने इसके लिए अपने अभिन्न मित्र विनोद लुहाड़िया से चर्चा की, और हेमन्त को लुहाड़िया जी की गंज स्तिथ कवेलू की दुकान पर बैठने का फरमान सुना दिया गया।
पिता के फरमान को स्वीकार कर हेमन्त खाली समय मे कवेलू की दुकान पर बैठने तो लगे , लेकिन मित्रता का भाव नजरअंदाज नहीं कर सके। दुकान पर भी मित्र मंडली में शामिल विवेक भार्गव, अज्जू वर्मा, विनय भावसार आदि का आना जाना शुरू हो चुका था। उस समय गंज क्षेत्र में एक बॉबी होटल हुआ करती थी। इसी होटल से दोस्तों को चाय नाश्ता कराना हेमन्त कभी नहीं भूलते थे। जब दुकान मालिक विनोद लुहाड़िया को इस धमाचौकड़ी का अहसास हुआ तो उन्होंने मुन्नी भैया से इसकी शिकायत की। मनोज जोशी बताते हैं कि, इस बीच होटल में चाय नाश्ते के बिल देखकर भी पिता विजय खण्डेलवाल ने हेमन्त पर जमकर अपना गुस्सा उतारा था जिसके बाद निगरानी का दौर भी शुरू हो चुका था। कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमन्त खण्डेलवाल ने युवावस्था में भी अपना जीवन खुलकर जिया है।
बीच रास्ते पर रोक ली दोस्त की बारात, मांगा नेग
हेमन्त की शरारत का एक किस्सा बेहद रोचक रहा जब उन्होंने विवाह के दौरान नेग लेने के लिए बीच सड़क पर दोस्त की बारात तक रोक ली थी। मनोज जोशी बताते हैं कि, हमारे मित्र और पेट्रोल पम्प व्यवसायी राजकुमार अग्रवाल की बारात अमरावती जा रही थी। बारात में हम सभी मित्रों को भी आमंत्रित किया गया था। इसी बीच हेमन्त का कहना पड़ा कि बारात में चलेंगे तो खर्चा भी लगेगा। बारात रवाना भी हो गई लेकिन खर्चे का बंदोबस्त नहीं हुआ। रास्ते भर शरारत का कीड़ा मस्तिष्क में कुलबुलाता रहा। जैसे ही गाड़ी गुदगाँव के आगे पूर्णा नदी के पुल तक पहुंची गाड़ी रुकवाकर सड़क पर आड़ी खड़ी कर दी गयी। पीछे से राजकुमार अग्रवाल की गाड़ी आई किंतु सड़क पर गाड़ी आड़ी खड़ी होने की वजह से उन्हें भी रुकना पड़ा। और नेग लेने के लिए चर्चा शुरू हो गई। इसी बीच पीछे से यात्री बस आ गयी जिसे ट्रांसपोर्टर भानु जोशी चला रहे थे। बीच सड़क पर तमाशा होने लगा। आखिर राजकुमार अग्रवाल को मांगी गई नेग की रकम देनी पड़ी।
2008 से स्वभाव में आने लगा परिवर्तन पहुंचा ऊंचाइयों तक
वैसे तो हेमन्त की शरारतो के कई किस्से हैं। लेकिन समय के साथ वर्ष 2008 से उनके स्वभाव में जबरदस्त परिवर्तन आना शुरू हो गया। मनोज जोशी बताते हैं कि पिता हेमन्त को सफल व्यवसायी बनाना चाहते थे। उनके लिए गंज क्षेत्र में टायर की एक छोटी सी दुकान भी खोली गई थी, लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था और उनका रुझान अपने पिता और राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी स्व.विजय कुमार खण्डेलवाल की राजनीति की तरफ बढ़ने लगा। पिता के साथ रहकर राजनीति के दांव पेंच सीखे औऱ बचपन मे शरारतो का पुलिंदा लेकर घूमने वाले हेमन्त का सितारा आज राजनीति की बुलंदियों पर चम चमा रहा है।




