Betul News: विवादित कालोनी में पूर्व खनिज अधिकारी के निवेश की आशंका!
Betul News: Former mineral officer's investment suspected in disputed colony!

भतीजे के नाम से की गई साझेदारी? प्रशासन की सख्ती के बाद खुलने लगे राज, चर्चा का बाजार गर्म
Betul News: बैतूल। भारत भारती क्षेत्र में बिना अनुमति और वैध दस्तावेजों के विकसित की जा रही एक कॉलोनी पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बाद अब इस कॉलोनी से जुड़ी परतें खुलने लगी हैं। सूत्रों के अनुसार, कॉलोनी के तीन साझेदारों में से एक, जिले में पूर्व में पदस्थ रहे खनिज अधिकारी का निकट संबंधी बताया जा रहा है। दावा है कि यह पूर्व अधिकारी अन्य जिले में पदस्थ होने के बावजूद बैतूल के कॉलोनाइजरों के साथ साझेदारी कर चुका है और एक कॉलोनी में भी उसके निवेश की बात सामने आ रही है।
सूत्रों का कहना है कि कॉलोनी में उक्त खनिज अधिकारी का पैसा लगाया गया है। यदि प्रशासन इस मामले की गंभीरता से जांच करता है, तो स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकती है। आरोपों की पुष्टि होने पर अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज हो सकता है।
पदस्थापना के दौरान बने थे गहरे संबंध
सूत्रों के मुताबिक जब यह अधिकारी बैतूल में पदस्थ थे, तब उनका और कॉलोनाइजरों का संबंध अत्यंत मधुर था। सूत्र बताते है कि सरकारी आवास में नियमित मुलाकातें, भोजन आदि आम बात थी। क्रेशर संचालकों के माध्यम से बने इन संबंधों की गहराई इतनी थी कि यह निवेश तक पहुंच गए। प्रशासनिक फेरबदल के बाद अधिकारी का तबादला तो हो गया, लेकिन संबंधों में कोई फर्क नहीं आया।
बताया जा रहा है कि भारत भारती क्षेत्र में कॉलोनाइजरों द्वारा खरीदी गई जमीन में कॉलोनी विकसित करने के उद्देश्य से उक्त अधिकारी ने अपने रिश्तेदार (संभावित तौर पर भतीजे) के नाम से निवेश किया है। सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि कॉलोनाइजरों को यही भरोसा था कि इस अधिकारी के प्रभाव से वे नियमों को दरकिनार कर भी प्रशासनिक कार्रवाई से बच जाएंगे। लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत रही।
प्रशासन की कार्रवाई से मची खलबली
कलेक्टर के निर्देश पर राजस्व अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए न केवल कॉलोनी को अवैध घोषित किया बल्कि कॉलोनाइजरों पर कोतवाली थाने में एफआईआर भी दर्ज करवाई। साथ ही, प्लॉटों की बिक्री पर रोक लगा दी गई है।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में कॉलोनाइजरों के करोड़ों रुपये फंस चुके हैं, जिससे उबरने के लिए उन्हें अब लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन के लिए अब यह आवश्यक हो गया है कि वह इन दावों की पूरी तरह जांच करे कि पूर्व खनिज अधिकारी का वास्तव में इस कॉलोनी से कोई संबंध है या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि इस निवेश के तार कहां तक जुड़े हैं।




