Betul Ki Khabar: लाखों की लागत से खरीदी मिनी ट्रेन, 20 साल में 20 बार भी नहीं चली

Betul Ki Khabar: Mini train bought at the cost of lakhs, did not run even 20 times in 20 years

नेहरू पार्क में आम जनता की कमाई ठिकाने लगाने का चौथा नायाब नमूना

Betul Ki Khabar: बैतूल। शहर के बीचों-बीच बने नेहरू पार्क को सजाने-संवारने और आकर्षण का केंद्र बनाने के नाम पर लगभग 20 वर्ष पहले नगर पालिका ने लाखों रुपए खर्च कर मिनी ट्रेन खरीदी थी। उस समय बड़े बड़े दावे किए गए थे कि पार्क में आने वाले बच्चों और उनके परिवारों को नया अनुभव मिलेगा। ट्रेन चलने से पार्क की रौनक बढ़ेगी और लोगों को नया मनोरंजन स्थल मिलेगा, लेकिन हकीकत यह है कि इस उलखर्ची को करीब 20 साल होते आये हैं और यह ट्रेन खरीदने के बाद अब तक मुश्किल से 20 बार भी नहीं चली। नतीजा यह है कि लाखों रुपए की लागत से खरीदी गई यह ट्रेन अब कबाड़ होकर जंग खाती हुई खड़ी है, और नगर पालिका के रखरखाव की हकीकत बयां कर रही है। हालात यह हैं कि अब इसे सुधारने में जितना खर्च आ रहा है, उतने में नई मिनी ट्रेन आ जाएगी।

बच्चों की खुशियों को आधार बनाकर किया गया आर्थिक नुकसान

मौजूदा जनप्रतिनिधियों ने खुद की खुशी के लिए बच्चों की भावनाओ के साथ किस कदर खिलवाड़ किया यह मामला इसका जीता जागता उदाहरण है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्क में ट्रेन शुरू होने के शुरुआती दिनों में कुछ बार बच्चों ने इसका आनंद लिया, लेकिन उसके बाद तकनीकी खराबी, ऑपरेटर की कमी और नियमित देखभाल न होने की वजह से इसे बंद कर दिया गया। हालात इस तरह के हो गए कि जिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की पहल पर यह उलखर्ची कि गई थी। उन्होंने भी अपने हाथ खींच लिए। यह ट्रेन आज केवल शोपीस बनकर रह गई है। बच्चों को लुभाने का जो सपना दिखाया गया था, वह अधूरा रह गया और जनता की मेहनत की कमाई बर्बाद हो गई।

लाखों खर्च करने के बाद भी उजाड़ हो चुका पार्क

इसके साथ ही नेहरू पार्क का रखरखाव भी सवालों के घेरे में है। पार्क की झूलों की हालत खराब है। पेड़ों के नीचे जगह-जगह गंदगी पड़ी रहती है और लाइटिंग सिस्टम भी अक्सर बंद रहता है। पार्क की हालत ये है कि पार्क में लंबी लंबी घांस उगने के बाद अब पार्क बच्चों के खेलने लायक भी नहीं रहा। क्योंकि यहां जहरीले कीड़े मकोड़ों का खतरा भी बना रहता है। इसके बावजूद रखरखाव के नाम पर प्रति वर्ष लाखों रुपए खर्च दिखाए जाते हैं। नगर पालिका की लापरवाही और जिम्मेदारी तय न होने की वजह से मिनी ट्रेन जैसी योजनाएं दम तोड़ देती हैं जिस पर समय रहते लगाम नहीं कसी गई तो स्वहित साधने के चक्कर मे लोगों की कमाई, इसी तरह कतिथ हाथों की कठपुतली बनती रहेगी।

अंधेर नगरी चौपट राजा की तर्ज पर सालों से हो रहा खर्च

जनता का कहना है कि पिछले कुछ सालों से जिस तरह से नपा द्वारा लाखों करोड़ों रुपयों की बर्बादी की जा रही है, उससे साफ पता चल रहा है कि, अंधेर नगरी चौपट राजा की तर्ज पर नगर पालिका का संचालन अब आम बात हो चुकी है। लोगो का कहना है कि,जब नगर पालिका योजनाओं की घोषणा करती है तो बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में उनका संचालन और देखभाल ही नहीं हो पाता। सवाल यह है कि जब ट्रेन को नियमित चलाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी तो लाखों रुपए खर्च कर इसे खरीदा ही क्यों गया?

क्या यह सिर्फ कमीशनखोरी और दिखावे का प्रोजेक्ट था? यह पूरा मामला नगर पालिका की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। यदि समय रहते इसकी जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो आगे भी जनता की गाढ़ी कमाई इसी तरह व्यर्थ जाती रहेगी। जरूरत है कि इस तरह की योजनाओं के संचालन के लिए ठोस प्रयास किए जाएं और रखरखाव के लिए जिम्मेदार अधिकारी तय किए जाएं, ताकि भविष्य में जनता के पैसे की ऐसी बर्बादी न हो।

इनका कहना….

पार्क में खड़ी मिनी ट्रेन अब किसी काम की नहीं है। हालांकि पार्क की व्यवस्था सुधारने पर विचार विमर्श किया जा रहा है।

सतीश मटसेनिया सीएमओ नपा बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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