Prashasnik Kona : प्रशासनिक कोना: ईमानदार थानेदार ने जुआ खेल रहे जिला बदर को क्यों दिया अभयदान?? मैडम के सिस्टम से विभाग में क्यों मची खलबली??? घोटाले में विपक्षी पार्टी के दबाव के बाद अधिकारियों पर किसने उठाई उंगली???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……..
Prashasnik Kona: Administrative corner: Why did the honest police officer grant protection to the person who was banned from the district for gambling?

ईमानदार थानेदार की पांचों उंगलियां घी में
एक बड़े और मलाईदार थाने से छोटे थाने पदस्थ किए गए एक थानेदार को कई दिनों से फीलगुड महसूस नहीं हो रहा है। छोटे मामले में ही वे अपना काम चला रहे हैं, लेकिन देर आए दुरुस्त आए की तर्ज पर हाल ही में उनके थाना क्षेत्र में एक बड़ा जुआ हाथ आ गया। इसमें उन्होंने नाममात्र की कुछ जब्ती बनाकर कई रसूखदारों के पुत्रों को बिना प्रकरण बनाए छोड़ दिया।
हालांकि लाखों की रकम जब्ती बनाने के बजाए खुद ने फीलगुड महसूस करवा लिया। यह बात आग की तरह फैली तो उनकी ईमानदारी पर सवाल उठने लगे। सबसे बड़ी बात यह है कि उनके थानाक्षेत्र के जिस पाश क्षेत्र में जुआ चल रहा था, वहां एक जिला बदर नंदी भी बकायदा हाथ अजमा रहा था, लेकिन साहब ने उसे भी बचने का मौका देकर अलग से मोटी रकम हासिल कर ली।
यह बात बड़े साहब को भी नहीं पता है कि एक जिला बदर को थानेदार साहब ने ईमानदार बताकर छोड़ दिया है। साहब की ईमानदारी के अलावा जिला बदर को कार्रवाई न करने पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। खबर है कि कुछ सीसीटीवी कैमरे की हकीकत निकालकर वस्तुस्थिति से सारणी में सीएम के कार्यक्रम में आ रहे शीर्ष अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी उनकी ईमानदारी से अवगत कराया जा रहा है।
मैडम में अपने हिसाब से चला रही सिस्टम
निर्माण कार्य से जुड़ी एक प्रमुख अधिकारी इन दिनों अपने हिसाब से पूरा सिस्टम चला रही है। इस सिस्टम से उनके मातहमों में भी नाराजगी बढ़ रही है। बिना जनप्रतिनिधियों को भरोसे में लेकर उन्होंने एक ऐसे सब इंजीनियर को जिला मुख्यालय का एसडीओ चार्ज दे दिया है, जो अक्सर भ्रष्टाचार के कारण सुर्खियों में रहते हैं। शाहपुर के साथ अतिरिक्त चार्ज संभालने वाले इस सब इंजीनियर पर सातलदेही पर ढाई करोड़ के एक मामले में मापदंड को अलग रखकर सुर्खियां बटोरने के आरोप लग चुके हैं। मैडम के इस निर्णय से अधीनस्थ भी खासे परेशान है, क्योंकि विवादित अधिकारी शाहपुर के बाद अब जिला मुख्यालय में रौब झाड़ने से बाज नहीं आ रहे हैं।
कटघरे में प्रशासनिक अधिकारी
जिले में 13 करोड़ के एक घोटाले में जिस तरह से विपक्षी पार्टी बड़े अधिकारियों को आरोपी बनाने के लिए जोर शोर से मामला उछाल रही है, इससे प्रशासनिक और पुलिस के ईमानदार कहे जाने वाले अधिकारी कटघरे में आ खड़े हुए हैं। विपक्षी पार्टी ने राजधानी में जिस तरह मामले में मोर्चा खोला, इससे उनकी ईमानदारी पर सवाल उठने लग गए हैं। विपक्षी पार्टी ने जिस तरह वर्तमान और पूर्व के अधिकारियों के अलावा पुलिस के जांच अधिकारियों पर सवाल उठाएं, इससे साफ जाहिर है कि सत्तारूढ़ पार्टी के जनप्रतिनिधियों की शिकायत को भी इन्होंने कचरे की टोकरी में डाल दिया है। यदि सीएम के आगमन पर विपक्षी पार्टी ने कोई हथकंडा अपना लिया तो इन्हीं ईमानदार अधिकारियों का नपना तय माना जा रहा है।




