Betul News: कोसमी रेलवे अंडर ब्रिज की छत में बड़ा सुराख, बड़े हादसे को दावत

Betul News: Big hole in the roof of Kosmi railway under bridge, inviting a big accident

रोजाना गुजरती हैं सैकड़ों ट्रेन, निरीक्षण के लिए पहुंची टीम

Betul News: बैतूल (सत्येंद्र सिंह परिहार)। सरकारी निर्माण कार्यों में लापरवाही आमतौर पर हमेशा देखने को मिलती हैं। चाहे वह सरकारी भवन हों, सड़क हो, नालियां हो, लेकिन केंद्र सरकार के उपक्रमों में यदि लापरवाही देखने मे आती है तो आश्चर्य होना लाजिमी है। मौजूदा मामला अति गंभीर और संवेदनशील है। ट्रेनों के आवागमन के लिए बने कोसमी अंडर ब्रिज के स्लैब में बड़ा सुराख आने वाले हादसे की तरफ साफ संकेत दे रहा है। यह सुराख उस जगह बीचों बीच हुआ है जिसके ऊपर से रोजाना सैकड़ों ंभारी भरकम ट्रेनें गुजर रही हैं। खतरे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्लैब का सीमेंट कांक्रीट झड़ने से अन्दर लगे हुए लोहे की संरचना तक साफ दिखाई दे रही है।

यदि समय रहते यहां सुधार कार्य नहीं किया जाता तो भविष्य में सुराख का साइज बढ़ सकता था। आश्चर्य इस बात का है कि, इस संवेदनशील खतरे की जानकारी रेलवे अधिकारीयों को भी नहीं थी। जैसे ही सांझवीर टाईम्स ने इसकी जानकारी सम्बन्धित अधिकारी को दी तो हड़कंप मच गया। रेलवे के एडीईएन ने तत्काल मौके पर टीम भेजी है। अच्छी बात यह हैं कि समय रहते इस खतरे का पता चल गया नहीं तो आने वाला खतरा कल्पना से परे हो सकता था।

लगातार बढ़ता जा रहा था सुराख का साईज

दरअसल इस गम्भीर मामले की जानकारी सांझवीर टाइम्स संवाददाता को मिलते ही तत्काल मौके का निरीक्षण किया गया। यहां देखा गया कि ब्रिज के ठीक सेंटर में करीब एक फिट के हिस्से का सीमेंट कांक्रीट झड़ कर गिर चुका है,अंदर लगा हुआ लोहा तक साफ नजर आ रहा है। यह सुराख दोनो रेलवे लाइनों के बीच सेंटर में बना हुआ है।

यहां से रोजाना गुजरने वाले लोगों ने बताया कि यह स्तिथि पिछले 15 से 20 दिनों से देखी जा रही है। पहले यह सुराख काफी छोटा लेकिन लगातार सीमेंट कांक्रीट झड़ने से इसका साइज अब करीब एक फिट का हो चुका है और धीरे धीरे बढ़ता जा रहा है। कुल मिलाकर यह काम ठेकेदार द्वारा किये गए घटिया काम की श्रेणी में देखा जा सकता है जो सीधे सीधे हजारों जिंदगियों से जुड़ा हुआ है।

रोजाना करीब 100 ट्रेनों का होता है आना जाना

ब्रिज का यह स्लैब कितने दिनों तक टिकता और इसके बाद कि स्तिथि क्या होती इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। क्योंकि अप और डाउन रुट से रोजाना 100 यात्री और गुड्स ट्रेनों का यहां से गुजरना होता है। रेलवे से जुड़े जानकारों के मुताबिक अंदाज है कि,रोजाना 100 ट्रेनों के हिसाब से 24 घंटे के भीतर इस ट्रैक से करीब 150 से 175 ट्रेनें गुजरती होंगी। क्योंकि यह व्यस्तम रेल मार्ग सीधे दिल्ली को चेन्नई से जोड़ता है।

एक यात्री ट्रेन का वजन करीब 2400 टन का हो सकता है। वहीं गुड्स ट्रेनों की बात की जाए तो एक ट्रेन का वजन 3500 टन से 4000 टन होता है। मामला सम्वेदन शील तब हो जाता है जब यह पता चलता है कि ब्रिज में क्रैक जैसी स्तिथि देखने को मिल रही है। जिस हिसाब से ट्रेनों का वजन इस ब्रिज पर लगातार पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में इसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह भविष्य में होने वाली बड़ी घटना की तरफ साफ इशारा कर रहा है।

हालांकि जैसे ही इसकी जानकारी एडीईएन को दी गई उन्होंने पहले तो सूचना देने के लिए सांझवीर का आभार व्यक्त किया, और मामले की गम्भीरता को देखते हुए तत्काल इस पर संज्ञान भी लिया मौके पर तकनीकी टीम भेज दी गई। अब रेलवे की टेक्निकल टीम इसका अध्ययन और मूल्यांकन कर रही है की ब्रिज में हुए सुराख का मामला आखिर कितना गंभीर हो सकता है और इसका किस तरह सुधार कार्य करवाया जा सकता है।

इनका कहना….

ब्रिज के सेंटर में सुराख होने की जानकारी मिलने के बाद मौके पर टेक्निकल टीम भेज दी गई है। तकनीकी टीम निरीक्षण कर रही है। निरीक्षण के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।

एसएल बेसेकर , एडीईएन रेलवे बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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