CMHO: सीएमएचओ की तबादले की पहले ही लिखी जा चुकी थी पटकथा
CMHO: The script for the transfer of CMHO had already been written

जनप्रतिनिधि मनमाफिक काम से नाखुश थे, कलेक्टर ने डीईओ लिखा तो एक पखवाड़े में आदेश हुआ जारी
CMHO: बैतूल। अपने अल्प काल में सुर्खियों मेें रहे डॉ रविकांत उइके को अपनी मनमर्जी चलाना महंगा पड़ गया। अपने आप को विपक्षी पार्टी का सोशल मीडिया पर रिश्तेदार बताने के अलावा उन पर जनप्रतिनिधियों ने लापरवाही के आरोप लगाए थे। अधीनस्थों पर नियंत्रण न होना भी उनके तबादले की वजह बन गई। बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल, आमला विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे और घोड़ाडोंगरी विधायक गंगा उइके उनकी कार्यप्रणाली से नाखुश थे। घोड़ाडोंगरी विधायक ने तो पिछले दिनों शिकायत विभाग के प्रमुख सचिव और कलेक्टर को की थी। इसके बाद कलेक्टर ने डीईओ लिखा था। इसी के बाद उनका तबादला आदेश जारी हो गया।
करीब डेढ़ वर्ष पूर्व डॉ रविकांत उइके को बैतूल का सीएमएचओ उस समय बनाया गया था, जब यहां पर अव्यवस्था और विवाद की स्थिति थी। शुरु में तो उन्होंने अपने परिपक्व और अनुभव को स्वास्थ्य विभाग में अच्छा अनुसरण कराया, लेकिन इसके बाद वे खुद विवादों में घिरते चले गए। सूत्र बताते हैं कि कई विवादित निर्णय उन्होंने अपने अधीनस्थों के कारण लिए। अटैचमेंट को लेकर स्वास्थ्य विभाग में सबसे अधिक शिकायत विधायकों की आई। चौकाने वाली बात यह थी कि जिस अटैचमेंट को समाप्त करने के लिए विधायकों की नाराजगी के बाद उन्होंने आदेश जारी किया।
उसे कई बार दोबारा आदेश जारी कर चर्चा में आए। इसी वजह से जनप्रतिनिधियों के निशाने पर भी रहे। सूत्र बताते हैं कि जनप्रतिनिधियों के निर्देशों का न सुनना ही उनकी तबादले की मुख्य वजह बन गया। कहा जा रहा है कि ढाई माह बाद उनका जून में रिटायरमेंट भी होने वाला था, लेकिन बैतूल से सेवा मुक्त होने के उनके प्रयास विफल हो गए।
मनमर्जी से कर रहे थे काम
जानकार सूत्र बताते हैं कि सीएमएचओ डॉ उइके अपनी विवादित कार्यप्रणाली के कारण अक्सर टीएल की बैठक में कलेक्टर के निशाने पर भी रहे। बैठक में अधूरी जानकारी लेकर पहुंचने पर उन्हें कई बार फटकार भी लगी, लेकिन उन्होंने होमवर्क कर जाना बेहतर नहीं समझा। यही कारण है कि कर्मचारियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर वे रिपोर्ट देते आए। यही वजह उनकी कार्यप्रणाली के कारण सुर्खियां बटोरते रही। सूत्र बताते हैं कि घोड़ाडोंगरी विधायक ने पिछले दिनों कलेक्टर और विभाग के प्रमुख सचिव को डॉ उइके की लचर प्रणाली की शिकायत की थी, उसके बाद 19 फरवरी को कलेक्टर ने आयुक्त स्वास्थ्य सेवाओं को पत्र लिखकर सीएमएचओ को बैतूल से कार्यमुक्त करने का आग्रह किया था। सूत्र बताते हैं कि इसके बाद बैतूल विधायक खंडेलवाल और डॉ पंडाग्रे ने भी सीएमएचओ की लचर कार्यप्रणाली की शिकायत की थी। तब ही तय हो गया था कि उनको बैतूल से तबादला तय हो गया है।
कई अनियमित्ताओं की शिकायत
जानकार सूत्र बताते हैं कि सीएमएचओ ने अपने कार्यकाल के दौरान सबसे अधिक कर्मचारियों का बेवजह अटैचमेंट कर रखा है। इस मामले में विधायकों की शिकायत के बाद अटैचमेंट खत्म किया गया, लेकिन मौखिक रूप से चहेते कर्मचारियों को फिर अटैच कर डाला। अभी भी उनके कार्यालय में चहेते कर्मचारी पदस्थ है। पिछले दिनों कुष्ठ शाखा में शेखर हारोड़ को अधिक जिम्मेदार देने से संबंधित सांझवीर टाईम्स में प्रकाशित समाचार का भी असर देखने को मिला है। उनके तबादले की एक वजह यह भी बताई जा रही है। इसके अलावा कई अन्य अनियमित्ताओं की भी शिकायतें सामने आई है। सांझवीर टाईम्स इसे जनहित में सिलसिलेवार प्रकाशित करेगा।




