Betul News: ऑपरेटर का आरोप: जपं सीईओ ने बयान बदलने के लिए बनाया दबाव

चिचाली थाना प्रभारी को स्व लिखित आवेदन देकर सीईओ की करतूत का किया भंडाभोड़
Betul News: बैतूल। चिचोली और भीमपुर जनपद में स्वच्छता मिशन को कुबेर का खजाना समझ कर किए गए करोड़ों के गबन में सबसे बड़ा सवाल सामने आ रहा है कि सीईओ द्वारा ब्लाक कोऑर्डिनेटर राजेन्द्र परिहार और कम्प्यूटर ऑपरेटरों को डिजिटल सिग्नेचर के अधिकार आखिर किस आधार पर दिए गए? जबकि सूत्र बताते हैं कि डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग करने का अधिकार सिर्फ सीईओ को ही रहता है। किसी भी सीईओ को अपने अधीनस्थ कर्मचारी को इसके लिए अधिकृत तक नहीं किया जा सकता। बावजूद इसके सीईओ अभिषेक वर्मा को क्लीन चिट दिया जाना किसी के गले नहीं उतर रहा है।
इस बीच जनपद पंचायत भीमपुर में पदस्थ कंप्यूटर आपरेटर सुमीत सोनी ने चिचोली थाना प्रभारी को एक लिखित आवेदन देकर सनसनी फैला दी है कि उनके द्वारा जांच टीम के सामने कलेक्ट्रेट में दिया गया बयान सीईओ के दबाव में दिया गया था। जांच दल के सामने भीमपुर सीईओ ने उनसे कहा था कि बचाव के लिए ही उससे बयान लिखा जा रहा है। इसलिए जो हम बोल रहे हैं, वहीं किा जाए। ऐसा न करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी गई। उन्होंने यह भी तर्क दिया है कि पूर्व में जो बयान दिया है, उसे न मानकर वर्तमान बयान को दर्ज किया जाए। अपने बयान में आपरेटर सनसनीखेज आरोप लगाते इस मामले की जांच सायबर सेल से कराने का अनुरोध भी किया। इस बात से साफ है कि कहीं न कहीं सीईओ के दबाव के कारण ही मामले की जांच प्रभावित हो रही है।
13 करोड़ का हो गया हेरफेर और सीईओ को भनक तक नहीं लेगी
स्वच्छता मिशन को पलीता लगाते हुए पिछले तीन सालों में करीब 13 करोड़ 21 लाख रुपए का हेरफेर किया, लेकिन सीईओ को इसकी भनक तक नहीं लगना गले से नीचे नहीं उतर रहा है। सूत्र बताते हैं कि सीईओ अभिषेक वर्मा 4 साल के अंतराल में तीन दफे चिचोली जनपद की सीईओ रहे हैं। सबसे पहला शक तो यही है कि आखिर अभिषेक वर्मा को चिचोली जनपद से इतना ज्यादा प्रेम कैसे हो गया? नियम के मुताबिक करोड़ोड्ड का भुगतान करने के लिए डिजिटल सिग्नेचर के अधिकार सिर्फ सीईओ को दिए गए हैं तो अन्य कर्मचारी को यह अधिकार सौंपने के लिए उन्होंने किसी उच्च अधिकारी की अनुमति ली थी?
अधीनस्थ कर्मचारी को यह अधिकार देने के लिए यदि अधिकृत किया गया था, तो इसके लिए अधिकृत पत्र लिखा था। बावजूद इसके जांच अधिकारियों ने प्रतिवेदन में यह उल्लेखित कर अपना पल्ला झाड़ लिया कि सीईओ द्वारा डिजिटल सिग्नेचर के लिए कम्प्यूटर ऑपरेटर को अधिकृत किया गया था, इसलिए इस प्रकार की घटना कारित हुई। इससे यह प्रतीत हो रहा है कि सीईओ अभिषेक वर्मा को बचाने के पूरे प्रयास किसके दबाव में किए जा रहे हैं?
आपरेटर ने सीईओ के सिर मढ़ा पूरा घोटाला
करोड़ों के इस घोटाले में ब्लाक कोऑर्डिनेटर राजेन्द्र परिहार की मुख्य भूमिका बताई जा रही है और पूरा घोटाला कम्प्यूटर ऑपरेटरों की सिर मढ़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका सबूत वह बयान है जो ऑपरेटर सुमित सोनी ने सीईओ अभिषेक वर्मा के खिलाफ दिया है। थाने में अपने लिखित बयान में सुमित ने यह तथ्य उजागर किया है कि उसे नौकरी से निकालने की धमकी देकर जांच टीम के सामने दूसरा बयान देने के लिए मजबूर किया गया। कंप्यूटर आपरेटर के मुताबिक डिजिटल सिग्नेचर उसके द्वारा ही ब्लाक कोऑर्डिनेटर को दिए गए थे। जबकि सम्पूर्ण भुगतान खुद सीईओ द्वारा ही किया जा रहा था।
बयान में आपरेटर का आरोप है कि सीईओ स्वंय ही डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से भुगतान किया करते थे। ऑपरेटर के बयान से साफ है कि इस मामले में अपने आप को बचाने के लिए सीईओ अभिषेक वर्मा ऑपरेटरों को बलि का बकरा बना रहे हैं। उसने आरोप लगाया है कि जनपद सीईओ द्वारा मौखिक रूप से धमकी दी जाती थी कि उनकी डीएससी आपके पास रहती है और राजेंद्र परिहार को तुम्हारे द्वारा दी गई है। आपरेटर का आरोप है कि कलेक्टर के निरीक्षण के दौरान भी उससे सीईओ ने खुद के अलावा उसके हस्ताक्षर करवाए।
इनका कहना…
डिजिटल हस्ताक्षर किसी भी अधीनस्थ कर्मचारियों को दिए जाने का नियम नहीं है। डिजिटल हस्ताक्षर उन्हें पोर्टल पर हमारी मौजूदगी में लगाने के लिए अधिकृत किया था। उनके द्वारा वास्तविक भुगतान के साथ सामने आए भुगतान भी कर दिए गए। बयान देने के लिए मेरे द्वारा किसी भी आपरेटर को बाध्य नहीं किया गया। बयान तो हमारे भी हुए है, दबाव डालने जैसी कोई बात नहीं है।
अभिषेक वर्मा, सीईओ, जनपद पंचायत भीमपुर




