Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: थानेदार को हटाएं जाने का गणित आखिर क्यों समझ नहीं आ रहा?? ईमानदार बनने वाले अधिकारी कुछ में ही कैसे दिखाने लगे रंग??? नगरपालिका के इस सिस्टम से आखिर सब क्यों परेशान???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

Prashasnik Kona: Administrative Corner: Why can't I understand the mathematics of removing the police station officer?? How did the officers who were supposed to be honest start showing color in only a few??

थानेदार को हटाने का गणित समझ नहीं आया

वर्दी वाले विभाग में एक थानेदार की पिछले दिनों जिस तरह से विदाई हुई, इससे वे जरा भी खुश नहीं है। उन्हें भी यह समझ नहीं आ रहा है कि नए साहब के आखिर किसने कान भर दिए, जिससे उनकी रवानगी हो गई। चर्चा है कि बड़े साहब को भनक लगी थी कि थानेदार साहब ने कम से कम दो खोके का गणित किया है। बस इस बात की भनक उनको लगी और आनन फानन में थानेदार को लूपलाइन भेज दिया गया। चर्चा यह भी है कि थानेदार के दोनों शूटर नितिन और शिव ने भी कम से कम 50 पेटी के वारे-न्यारे कर दिए। वैसे एक और चर्चा खूब जोर पकड़ रही है कि शहर के कुछ कुख्यात बदमाशों पर कृपा दृष्टि बनाने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नाराजगी भी सामने आई और थानेदार को लूपलाइन भेजना पड़ा।

रंग में आए अधिकारी

लोगों की तबीयत से जुड़े एक विभाग के मुखिया इन दिनों रंग में आ गए हैं। उनकी पदस्थापना को लगभग 3-4 माह ही हुए हैं। कहा जा रहा है कि बैतूल जिले में पहले से रंगे-भरे यह साहब कुछ समय राजधानी में भी पारी खेल चुके हैं। इसके बाद सत्तारूढ़ एक पावरफुल नेता के माध्यम से विभाग के मुखिया बनाए गए। वैसे साहब को करीब से जानने वाले शालीन और ईमानदार का तगमा लगा चुके थे, लेकिन जैसे-जैसे वे यहां रमने लगे, अब जमकर फ्रंट फुट पर बैटिंग कर रहे हैं। विभाग के कुछ कर्मचारियों के साथ कई मामलों में फीलगुड में लगने वाले यह साहब अब पूर्व अधिकारियों की तरह ही आकस्मिक निरीक्षण कर माहौल बनाने में लगे हैं। इतना ही नहीं कुछ खामियां मिलते ही नोटिस निकालने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं। बताते चले कि इन साहब की जिस विभाग में पदस्थापना हुई है, वहां पहले कई अधिकारी विवादों में रहकर निलंबित हुए हैं या उन पर कई गंभीर आरोप लगने के बाद तबादले की कार्रवाई हुई है। उनका कार्यालय सदर में शहीद स्माकर के पास बताया जाता है।

नपा के सिस्टम से हायतौबा

एक प्रमुख नगरपालिका के सिस्टम से जमकर हाय तौबा मची है। इस नपा में कौन किसकी सुनता है और कौन किसकी नहीं सुनता, पर यह हकीकत है कि वहां कोई किसी की नहीं सुन रहा है। कहने को तो इस नपा में कुछ माह पहले सीएमओ की आमद हुई है, लेकिन उनका अपने अधीनस्थों पर कोई नियंत्रण नहीं रहा। पहले मनमाने कार्यों को एजेंडों में शामिल कर विशेष सम्मेलन आहूत कर लिया गया। जब नपा की स्थिति कंगाल हुई तो सब मुंह छिपाकर घूम रहे। इसके बाद आउटसोर्स कर्मचारियों की जबरन भर्तियों में भी इस निकाय ने नपा की वित्तीय हालत खराब कर दी है। यह पूरा सिस्टम ऐसा हो चुका है कि आम नागरिक ही नहीं मीडिया और जनप्रतिनिधियों को भी निकाय के अधिकारी और कर्मचारी मुसद्दीलाल समझ रहे हैं।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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