Betul News: सत्र बीता, नो बैग डे का स्कूलों में नहीं दिखा असर, बस्ते का बोझ नहीं हुआ कम

Betul News: Session passed, no effect of No Bag Day visible in schools, burden of school bags not reduced

सप्ताह के एक दिन बिना बैग लिए बच्चों को जाना था स्कूल, बेपरवाह रहे अधिकारी

Betul News: बैतूल। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रदेश की कमान संभालते ही स्कूली बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते सभी सरकारी और निजी स्कूलों में नो बैग डे की नीति लागू की थी। हालांकि इसी तरह का आदेश वर्ष 2022 में शिवराज सरकार ने भी लागू किया था, लेकिन मोहन सरकार द्वारा इसे सख्ती से लागू किए जाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद जिले में इसका असर देखने को नहीं मिला।

जानकारी मिली है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों को पूरे शैक्षणिक सत्र में अधिकारियों ने हाशिये पर रखा और अब इसे लागू किए जाने के दावे तब किए जा रहे हैं, जब शैक्षणिक सत्र खत्म होने को आया है।

दरअसल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस निर्देश का उद्देश्य यह था कि कक्षा 1 से 10 वीं तक सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने बाल बच्चों की सेहत और उन्हें कल्चर एक्टिविटी से जोड़ने के लिए स्कूलों में सप्ताह में एक दिन नो बैग डे घोषित किया जाए। यानी कि सप्ताह के शनिवार के दिन स्कूलों में बच्चों को बिना बैग लिए स्कूल आना है। स्कूल समय पर सभी बच्चों को कल्चर गतिविधियों के साथ साथ खेलों जैसी एक्टिविटी में हिस्सा लेना अनिवार्य किया गया था, लेकिन जिन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी निभानी थी, उन्होंने पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान मुख्यमंत्री के इस आदेश को नजरअंदाज किया।

जानकारी के मुताबिक जिले के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 2 लाख 16 हजार बच्चों को इसका फायदा मिलना था, लेकिन किसी भी शनिवार इस तरह की एक्टिविटी किसी भी सरकारी या निजी स्कूल में देखने को नहीं मिली। इस बात की पुष्टि खुद स्कूली बच्चों ने की है। बच्चों को खुद ही नहीं पता कि उनके हित मे सरकार ने इस तरह के कोई निर्देश भी जारी किए हैं।

पूरा शैक्षणिक सत्र बीता, अब आदेश पर अमल किस काम का

इस पूरे मामले की सच्चाई को लेकर सबसे पहले क्लास 1 से 10 तक पढ़ने वाले बच्चों से चर्चा की गई। खास बात यह है कि इस तरह की उनके स्कूल में इस तरह की किसी एक्टिविटी और निर्देश लागू होने की उन्हें जानकारी तक नहीं थी। शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों की माने तो उनके मुताबिक मुख्यमंत्री के इस आदेश को अमल में लाये जाने का हाल ही में प्रयास शुरू किया जा रहा है।

वह भी तब जब अधिकांश स्कूलों में बोर्ड और लोकल परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं या होने वाली हैं। पूरा शैक्षणिक सत्र बीतने के बाद अधीकारियों कि आंख खुलना सीधा सीधा लापरवाही की तरफ इशारा कर रहा है। जबकि यह आदेश स्कूली बच्चों की सेहत से जुड़ा हुआ है।

क्लासवार इतना वजन किया था निर्धारित

क्लास वजन

 पहली- 1.6 -2.2

दूसरी- 1.6-2.2

 तीसरी- 1.7-2.5

 चौथी- 1.7-2.5

पांचवी- 1.7-2.5

 छठवीं – 2.0-3.0

 सातवीं- 2.0-3.0

आठवीं। 2.5-4.0

नौवीं। 2.5-4.5

दसवीं- 2.5-4.5

हालांकि इस पॉलिसी में 11 वीं और 12 वीं के विद्यार्थियों के लिए बस्तों के वजन का निर्धारण नहीं किया गया है। इस पॉलिसी में 11वीं और 12 वीं में बस्ते का वजन निर्धारित करने का जिम्मा स्कूल प्रबंधन पर ही छोड़ दिया गया है। हालांकि आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रबंधन बच्चों की सुविधा का पूरा ध्यान रखे।

इनका कहना 

अभी मैं कलेक्टर के साथ मीटिंग में हूं। बाद में जानकारी दे पाऊंगा।

जितेंद्र भन्नारिया, डीपीसी, जिला शिक्षा केन्द्र बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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