Political Column : बैतूल प्रशासनिक कोना: तहसील के कौनसे साहब बैतूल से चंद दिनों में ऊब गए? नए अधिकारी का ठेकेदार प्रेम के क्या है मायने?? किस थाने के कर्मी बने घर के भेदी??? एक विभाग के साहब की आखिर क्यों बढ़ रही टेंशन???? पढ़िए हमारा चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना……

Political Column : Betul Administrative Corner: Which sir of Tehsil got bored of Betul in a few days? What is the meaning of love for the new officer? The personnel of which police station became the house informers??? Why is the tension of a department official increasing???? Read our popular column Administrative Corner...

तहसील के साहब का नहीं लग रहा मन

Political Column : जिला मुख्यालय की एक तहसील में पदस्थ एक बड़े साहब का इन दिनों मन नहीं लग रहा है। कुछ दिनों पहले ही वे स्थानांतरित होकर यहां पर आए हैं। कर्मचारी उनके पास फाइलों से लेकर अन्य कामों के लिए जाते हैं तो वे बात-बात पर झिझक जा रहे हैं। कुछ दिनों पहले 1-2 जनप्रतिनिधियों के कामों के लिए भी उन्होंने साफतौर पर काम करने से मना कर दिया। साहब ने एक कदम आगे जाकर यह भी कह डाला कि उनका तबादला करवा दो।

कहा जा रहा है कि साहब ने यह बात इसलिए कही की जनप्रतिनिधि उनका खुद जिले से तबादला करवा दें। दबी जुबान से साहब अपने अधीनस्थ स्टाफ से भी यहां पर काम में मन नहीं लगने की बात कह रहे हैं। यही वजह है कि तहसील में पेंडेंसी लगातार बढ़ते जा रही है। खबर तो यह भी है कि नए साहब अपने तबादले के लिए खुद भी भोपाल से प्रयास करवा चुके हैं। आपको बताते चले कि यह विभाग प्रमुख भिंड से बैतूल पदस्थ किए गए हैं।

ठेकेदारों के साथ साहब की गुफ्तगू

शहर सरकार से जुड़े एक नए नवेले अधिकारियों की ठेकेदारों से लगातार गुफ्तगू खासी चर्चा में है। वैसे अधिकारी ने बैतूल ज्वाइनिंग के बाद अपने इरादें बता दिए थे कि वे काम को अधिक महत्व देते हैं। कर्मचारी भी उनके काम के कायल है। इस बीच उनके द्वारा पहले निर्माण शाखा में ठेकेदारों की बैठक ली। फोन पर भी उन्होंने ठेकेदारों को अल्टीमेटम देते हुए डेडलाइन दे डाली। नए अधिकारी के तेवर देखकर ठेकेदार भी बगले झांकने लगे। एक अन्य कार्यालय में ठेकेदारों से साहब के साथ बैठक चर्चा में है। हालांकि बैठक को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। साहब ने कुछ दिनों पहले छतरपुर से बैतूल में ज्वाइनिंग ली है।

घर के भेदी लंका ढाह रहे

पुलिस विभाग में अधिकारियों और कुछ कर्मचारियों की नई आमद हुई है। अपना बेहतर परफार्मेंस दिखाने के लिए जिले में पहली बार पदस्थ हुए एक टीआई के क्षेत्र में बढ़ते अपराधिक मामले सुर्खियों में बची कसर उनके ही भेदियों ने लंका ढाह कर कसर पूरी कर दी है। दरअसल कहा जा रहा है कि साहब नए थे, इसलिए घर के भेदियों ने कुछ दिनों पहले शहर में गोली चलने और हवाई फायर के मामलों में मांडवली कर डाली। फिर क्या देखना गोली चलने की और वारदाते होने लगी। जब मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा तो मजबूरी में टीआई को ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना पड़ गया। दूसरे मामले में कबाड़ का ट्रक ठिकाने लगाने पर मीडिया की सुर्खियां बनी तो टीआई ने थाने को ही ढक दिया। अखबार नवीस पूछने लगे तो साहब भौंए तानने लगे, लेकिन मीडिया ने जब ईट का जवाब पत्थर से दिया तो उनकी बोलती बंद हो गई।

बजट के लिए तरसा विभाग

प्रदेश में लाड़ली….. के नाम से सरकार चुनावी साल में सभी को खुश करने का प्रयास कर रही है। इधर हालत यह है कि इस विभाग से जुड़े अधिकारी अपने आप को ठगा सा महसूस करने लगे हैं। उनकी बात में सच्चाई भी इसलिए है कि पिछले 2-3 माह से कार्यालय के लिए ही बजट नहीं मिला है। हालात यह है कि कई काम और भुगतान अटके पड़े है। पत्राचार पर भी कोई कार्रवाई नहंी होने से अधिकारी दुखड़ा रो रहे हैं। उनका विभाग इन दिनों बहनों और लाड़लियों को खुश करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन बजट के अभाव में उनकी तंगहाली की चर्चा आफिस से निकलकर बाहर तक पहुंच गई है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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