Betul News:वन रक्षकों की ‘गुपचुप पैदल चाल’ में सीनियर अफसर दरकिनार

24 अक्टूबर को बैतूल-आमला मार्ग पर हुआ परीक्षण, मीडिया से दूरी और व्यवस्थाओं को लेकर चर्चाएं तेज

Betul News: बैतूल। वन वृत्त के अंतर्गत 24 अक्टूबर को आयोजित वन रक्षकों की पैदल चाल का परीक्षण अब सवालों के घेरे में है। परीक्षण को लेकर गोपनीयता बरतने, समिति के गठन में वरिष्ठता की अनदेखी और व्यवस्थाओं में कथित लापरवाही को लेकर विभागीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि परीक्षण की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने के बजाय मुलताई एसडीओ चावरिया को समिति का अध्यक्ष कैसे बना दिया गया?

परीक्षण के लिए गठित समिति में मुलताई एसडीओ चावरिया को अध्यक्ष बनाया गया, जबकि भैंसदेही अनुभाग के एसडीओ देवानंद पांडेय को सदस्य के रूप में शामिल किया गया। ऐसे में समिति की जिम्मेदारी तय करने के मापदंडों और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

 सुबह 4.30 से 9.30 बजे तक तय थी 4 घण्टे की समय सीमा

जानकारी के अनुसार, वन रक्षकों को सुबह 4.30 बजे से 9.30 बजे तक बैतूल से आमला के बीच पैदल चाल पूरी कर वापस लौटना था। सूत्रों के मुताबिक, इस परीक्षण में करीब 100 वन रक्षकों ने हिस्सा लिया। उन्हें निर्धारित समय में लगभग साढ़े बारह किलोमीटर की दूरी तय करनी थी। लेकिन परीक्षण की निगरानी और निर्धारित प्रक्रिया के पालन को लेकर चर्चाएं सामने आ रही हैं।

 मीडिया को सूचना देने के आदेश के बावजूद चुप्पी

आयोजन को लेकर मीडिया को भनक तक नहीं लगने और प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं किए जाने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि जारी आदेश में आयोजन की जानकारी मीडिया को देने का उल्लेख था। ऐसे में सवाल है कि निर्देशों के बावजूद सूचना सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?

सरकारी वाहनों के उपयोग और बजट पर भी सवाल

सूत्रों के हवाले से कुछ अभ्यर्थियों को वाहनों से सुविधा दिए जाने की चर्चा है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, परीक्षण के लिए अलग बजट और सामग्री के परिवहन में सरकारी वाहनों के कथित उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इन आरोपों की जांच और वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

इस मामले को लेकर मुख्य वन संरक्षक मधु वी राजू के मोबाइल नम्बर 9424790300 पर सम्पर्क किया, लेकिन चर्चा नहीं हो सका। अब देखना होगा कि वन विभाग इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और परीक्षण की प्रक्रिया, समिति गठन तथा खर्चों की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाती है या नहीं।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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