Betul News: फायर वाचर से डिप्टी रेंजर तक का सफर सवालों के घेरे में!

1999 की सीधी भर्ती में फर्जी दस्तावेजों से नौकरी हथियाने का आरोप, जांच हुई तो खुल सकती है परतें

अवैध कटाई, अतिक्रमण और कथित रिश्वतखोरी के आरोपों के बीच डिप्टी रेंजर की नियुक्ति पर उठे सवाल

Betul News: बैतूल।। दक्षिण वन मंडल के ताप्ती रेंज की झल्लार सर्किल में पदस्थ डिप्टी रेंजर शिवनाथ वाघमारे की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अवैध कटाई, जंगलों में अतिक्रमण और वन सेवकों से कथित रिश्वत मांगने जैसे आरोपों के बीच अब उनकी नियुक्ति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि वर्ष 1999 में हुई सीधी भर्ती के दौरान कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे नियमित नौकरी हासिल की गई। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो नियुक्ति से लेकर पदोन्नति तक के मामले में कई अहम खुलासे हो सकते हैं।

1988 से पहले की सेवा का दावा, नियुक्ति पर सवाल

जानकारी के अनुसार, वर्ष 1999 में वन वृत्त के लगभग 68 कर्मचारियों को सीधी भर्ती प्रक्रिया के तहत नियमित किया गया था। आरोप है कि इस भर्ती में पात्रता के लिए वर्ष 1988 से पहले नियमित कर्मचारी के रूप में फील्ड या कार्यालयों में सेवाएं देने की शर्त निर्धारित थी। इसी आधार पर शिवनाथ वाघमारे की पात्रता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

दावा किया जा रहा है कि वे वर्ष 1988 से पहले वन विभाग में पदस्थ नहीं थे, बल्कि वर्ष 1990 से अस्थायी कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहे थे। ऐसे में सवाल है कि यदि निर्धारित पात्रता की शर्त लागू थी, तो उन्हें नियमित किस आधार पर किया गया? क्या भर्ती के समय प्रस्तुत दस्तावेजों का नियमानुसार सत्यापन हुआ था?

फायर वाचर से नियमित कर्मचारी बनने की कहानी की जांच जरूरी

आरोप है कि फायर वाचर के रूप में कार्य करने वाले कर्मचारी ने कथित दस्तावेजों के आधार पर स्वयं को पात्र दर्शाकर नियमित नौकरी हासिल की और बाद में वनरक्षक से डिप्टी रेंजर तक पहुंच गया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों और विभागीय जांच से होना बाकी है।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि गंभीर आरोप सामने आने के बावजूद अब तक जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं है? वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को नियुक्ति आदेश, सेवा पुस्तिका, भर्ती के समय प्रस्तुत दस्तावेजों और पदोन्नति संबंधी अभिलेखों की जांच करनी चाहिए। यदि दस्तावेजों में गड़बड़ी प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। अब देखना यह है कि विभाग इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाता है या मामला फाइलों में ही दबा रहता है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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