Betul News: पात्र कर्मचारी लूप लाइन में, विवादित भर्ती वाले संभाल रहे फील्ड की कमान!

वन विभाग में पदोन्नति के बाद भी नहीं बदली व्यवस्था, 1999 में भर्ती हुए पांच कर्मचारियों के भविष्य पर लटकी तलवार
Betul News: बैतूल। वन वृत्त के दक्षिण वन मंडल में वन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जंगलों में कटाई और अतिक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच विभाग के अधिकारियों से लेकर मैदानी कर्मचारियों तक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पात्र कर्मचारी लूप लाइन में बैठे हैं, जबकि विवादित भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों को महत्वपूर्ण मैदानी जिम्मेदारियां सौंपकर रखा गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हाल ही में कर्मचारियों को पदोन्नति मिलने के बाद भी कुछ स्थानों पर कार्यवाहक परिक्षेत्र सहायकों की तैनाती जारी है। ऐसे में विभागीय व्यवस्था और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है।
1999 की भर्ती वाले पांच कर्मचारी चर्चा में
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वर्ष 1999 में भर्ती हुए पांच कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति और भविष्य को लेकर विवाद बना हुआ है। बताया जाता है कि ये कर्मचारी वरिष्ठता के आधार पर वनरक्षक पद के पात्र हैं, लेकिन इन्हें विभिन्न सर्किलों में कार्यवाहक परिक्षेत्र सहायक के रूप में तैनात किया गया है। हाल ही में अन्य कर्मचारियों को पदोन्नति मिलने के बाद भी इनकी तैनाती जारी रहने से विभाग के भीतर असंतोष की स्थिति बताई जा रही है। सवाल यह है कि जब पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो फिर कार्यवाहक व्यवस्था किस आधार पर जारी रखी गई है?
इन सर्किलों में संभाल रहे जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, राजेंद्र मोखलगाय आमला परिक्षेत्र की लादी सर्किल में सहायक कार्यवाहक परिक्षेत्र सहायक के रूप में पदस्थ हैं। वहीं, हरि परिहार मुलताई परिक्षेत्र की पट्टन सर्किल, देवेंद्र प्रकाश मालवीय सारणी परिक्षेत्र, सुनील सोनी बेनोड़ा और ओमप्रकाश हारोडे धाबा सर्किल में परिक्षेत्र सहायक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इन तैनातियों को लेकर विभागीय पात्र कर्मचारियों के साथ कथित भेदभाव के आरोप भी सामने आ रहे हैं। हालांकि, इन नियुक्तियों के संबंध में विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
बिना परीक्षा और प्रशिक्षण भर्ती का मामला
गौरतलब है कि इन कर्मचारियों की भर्ती को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि इन्हें बिना प्रशिक्षण, लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षण के सीधे नियमितीकरण का लाभ देकर वन विभाग में भर्ती किया गया था। बताया जा रहा है कि न्यायालय के निर्देश पर इन कर्मचारियों को सेवा समाप्ति के नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।
अधिकारियों की चुप्पी से बढ़ रहे सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा को लेकर न्यायालयीन प्रक्रिया चल रही है, उन्हें महत्वपूर्ण मैदानी जिम्मेदारियां किस आधार पर दी गई हैं? क्या विभाग में तैनाती और पदोन्नति के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं? वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जांच कर तैनाती के आधार, पात्रता और नियमों की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि पात्र कर्मचारियों के हित प्रभावित न हों और जंगलों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों में पारदर्शिता बनी रहे।
इनका कहना….
मेरे संज्ञान में यह जानकारी नहीं है। इस संबंध में अधीकारियों से जानकारी लेने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है, इसे दिखवाता हंू।
मधु वी राजू , मुख्य वन संरक्षक वनवृत, बैतूल
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