Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: इन साहब की दूसरे जिले में बोलती थी तूती, यहां क्यों है चुप?? पुराना थाना, पुराना किस्सा और किस थानेदार की याद हो गई ताजा??? एक साहब गए, अब किसकी है अगली बारी???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

साहब की फुर्ती पर सवाल, आखिर माजरा क्या है?

वर्दी वाले महकमे में नंबर दो की हैसियत रखने वाले साहब इन दिनों लो-प्रोफाइल मोड में नजर आ रहे हैं। कभी पूर्व पदस्थापना वाले जिलों में जिनकी सक्रियता के चर्चे आम हुआ करते थे, उन्हीं साहब की मौजूदा जिले में खामोशी अब चर्चा का विषय बनने लगी है। जिले में पदस्थ हुए करीब पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन साहब का वह चर्चित अंदाज अब तक सामने नहीं आया, जिसके दम पर दूसरे जिलों में उनकी अलग पहचान बनी थी।

सवाल यह भी है कि आखिर यहां उनकी कार्यशैली की रफ्तार धीमी क्यों है? या फिर साहब अभी माहौल को समझने और अपनी चाल चलने के लिए सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं? फिलहाल तो उनकी मौजूदगी प्रेस नोट में जारी मार्गदर्शन तक ही ज्यादा दिखाई देती है। अब देखना यह है कि साहब की सक्रियता कब जमीन पर नजर आएगी और महकमे में उनकी कार्यशैली की असली तस्वीर कब सामने आएगी।

पुराना थाना, पुराना किस्सा और लौट आई यादें!

लाइन से सीधे थाने की कमान संभालने पहुंचे एक टीआई का इस थाने से पुराना नाता रहा है। चर्चा है कि करीब चार साल पहले जब साहब एसआई हुआ करते थे, तब इसी थाने की एक चौकी की जिम्मेदारी उनके पास थी। उस दौर में शराब ठेकेदार के इशारे पर पुलिस के एक गांव पहुंचने का किस्सा आज भी महकमे के कुछ लोगों की जुबां पर है।

बताते हैं कि गांव में पुलिस के साथ जो कुछ हुआ, उसकी चर्चा उस समय खूब रही, लेकिन तत्कालीन महिला एसपी के कार्यकाल में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इस घटनाक्रम में घायल होकर हाथ-पैर तुड़वाने वाले एक आरक्षक को आज भी वह वाक्या याद आता है तो वह सहम जाता है। इसके बाद साहब की रवानगी पड़ोसी जिले में हो गई थी। अब सालों बाद उसी थाने में वापसी से पुरानी फाइलों और पुराने किस्सों की चर्चा फिर गर्माने लगी है।

एक साहब गए, अब किसकी बारी?

लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े एक महकमे में एक बड़े साहब की रवानगी क्या हुई, विभाग के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। गंभीर आरोपों से घिरे रहे साहब आखिरी वक्त तक खुद को पाक-साफ बताते रहे, लेकिन कुर्सी आखिर हाथ से निकल ही गई। अब उनके जाने के बाद निगाहें दूसरे साहब पर टिक गई हैं। चर्चा है कि हटाए गए साहब के पड़ोसी और विभाग में उनसे नजदीकी मेलजोल रखने वाले एक अन्य अधिकारी की कुर्सी भी डगमगा रही है।

चर्चाओं के मुताबिक स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नाराजगी ने इनके लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऊपर से पुराने कार्यकाल की फाइलों में भी कुछ ऐसे पन्ने होने की चर्चा है, जिनकी जांच-पड़ताल हुई तो कई सवाल खड़े हो सकते हैं। गलियारों में कानाफूसी है कि इन साहब के कार्यकाल में भी वैसा ही खेला हुआ, जिसकी चर्चा पहले वाले साहब के समय होती रही थी।

अब सवाल यही है कि अगला नंबर किसका? साहब फिलहाल कुर्सी पर हैं, मगर चर्चाओं ने उनके बोरिया-बिस्तर की अटकलें तेज कर दी हैं। इन साहब के साथ उनके विवादित और बाएं कहे जाने वाले कर्मचारी की भी रवानगी तय मानी जा रही है।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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