Beti Bachao Abhiyan: दुबई,, लंदन और अमेरिका तक बेटियों की पहचान की दस्तक

गर्ल्स कॉलेज की 50 छात्राओं को मिलेगा ‘पहचान का उपहार
Beti Bachao Abhiyan: बैतूल। बेटी बचाओ अभियान को केवल नारों और जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित न रखते हुए लाडो फाउंडेशन ने बेटियों को समाज में अलग पहचान दिलाने की अनूठी पहल जारी रखी है। फाउंडेशन के अभियान भारत से निकलकर दुबई , लंदन और अमेरिका तक पहुंच चुका है।
फाउंडेशन अब गर्ल्स कॉलेज की 50 छात्राओं के घरों पर उनके नाम की नेमप्लेट लगाकर उन्हें सम्मान और पहचान का उपहार देने जा रहा है। खास बात यह है कि इन छात्राओं में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली बेटियों को शामिल किया गया है।
लाडो फाउंडेशन के संरक्षक अनिल यादव ने बताया कि बेटियों के नाम से उनके घरों की पहचान बनाने का यह अभियान 8 नवंबर 2015 को शुरू किया गया था। अब इस पहल को करीब 11 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं और अभियान के लगभग 3960 दिन पूर्ण हो चुके हैं।
इस दौरान देश के विभिन्न प्रांतों में 4 हजार से अधिक बेटियों के नाम पर उनके घरों में नेमप्लेट लगाई जा चुकी हैं। फाउंडेशन के संरक्षक अनिल यादव ने बताया कि, उन्होंने दुबई, अमेरिका और लंदन में रहने वाले कई भारतीय मूल के परिवारों तक उनकी बेटियों के नाम की नेम प्लेट पहुंचाई है।
28 राज्यों तक पहुंचा अभियान, केवल नागालैंड बाकी
अनिल यादव के अनुसार बेटी बचाओ अभियान के तहत फाउंडेशन ने देश के 28 राज्यों में बेटियों को उनके नाम से पहचान दिलाने का प्रयास किया है। केवल नागालैंड में यह अभियान अभी शुरू होना बाकी है, जिसे जल्द ही अमलीजामा पहनाने की तैयारी है। फाउंडेशन का उद्देश्य बेटियों को परिवार और समाज में सम्मानजनक पहचान दिलाने के साथ बेटियों के प्रति लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव लाना है।
अब गर्ल्स कॉलेज की 50 छात्राओं की बारी
अभियान के अगले चरण में गर्ल्स कॉलेज की 50 छात्राओं को इस पहल से जोड़ा गया है। इन छात्राओं के घरों पर उनके स्वयं के नाम की नेमप्लेट लगाई जाएगी। नेमप्लेट तैयार करने से लेकर लगाने तक का पूरा खर्च लाडो फाउंडेशन द्वारा वहन किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को अपने घर के नाम के साथ अपनी स्वयं की पहचान मिलने का संदेश जाएगा।
जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में होगा कार्यक्रम
फाउंडेशन को गर्ल्स कॉलेज प्रबंधन से इस पहल के लिए अनुमति भी मिल चुकी है। अब जल्द ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कार्यक्रम आयोजित कर छात्राओं को उनके नाम की नेमप्लेट प्रदान की जाएगी। पहल का उद्देश्य बेटियों को यह एहसास कराना है कि घर की पहचान केवल पिता या परिवार के पुरुष सदस्यों के नाम से ही नहीं, बल्कि बेटियों के नाम से भी हो सकती है।




