Betul Me Aviadh Colony: नोटिस पर नोटिस, फिर भी नहीं थम रहा अवैध कॉलोनियों का खेल
कागजों में कार्रवाई और वसूली, जमीन पर बेखौफ कॉलोनाइजर, विकास अटका तो रहवासियों की बढ़ी परेशानी

Betul Me Aviadh Colony: बैतूल। शहर में अनधिकृत कॉलोनियों के मामले में नगर पालिका की कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कॉलोनाइजरों को नोटिस देने, विकास शुल्क जमा कराने और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के दावों के बावजूद जमीन पर हालात पूरी तरह बदलते नजर नहीं आ रहे हैं। यही वजह है कि मीडिया में भी अनधिकृत कॉलोनियों को लेकर लगातार मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन कॉलोनाइजरों में कार्रवाई का अपेक्षित डर दिखाई नहीं दे रहा है।
नगर पालिका द्वारा 17 जुलाई को कलेक्टर को भेजे गए पत्र में एक समाचार में प्रकाशित अनधिकृत कॉलोनियों से संबंधित शिकायत का हवाला दिया गया है। पत्र में बताया गया है कि 1 अप्रैल से वर्तमान तक अनधिकृत कॉलोनियों पर कार्रवाई करते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनाधिकृत कॉलोनियों से संबंधित विकास शुल्क के रूप में 20 लाख 44 हजार 351 रुपए निकाय कोष में जमा कराए गए हैं। पत्र में यह भी उल्लेख है कि अनधिकृत कॉलोनियों के संबंध में कार्रवाई जारी है।
93 कॉलोनियों के मामले में चल रही प्रक्रिया
नगर पालिका के पत्र में 93 अनधिकृत कॉलोनियों का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि संबंधित कॉलोनाइजरों के रिक्त भूखंड/शेष भूमि की जानकारी लेकर विकास शुल्क जमा कराने की कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए जिला उपपंजीयक बैतूल से अनधिकृत कॉलोनियों में बंधक भूखंड स्वामियों की जानकारी मांगी गई है। साथ ही तहसीलदार एवं नगर बैतूल को भी कार्रवाई के लिए पत्र भेजे गए हैं। इससे पहले 8 जून को भी नगर पालिका ने एक भूखंड स्वामी को अनधिकृत कॉलोनी में उसके स्वामित्व वाले भूखंड का विकास शुल्क जमा कराने संबंधी सूचना भी जारी की थी।
पत्र में मध्यप्रदेश नगर पालिका (कॉलोनी विकास) नियम, 2021 का हवाला देते हुए विकास शुल्क जमा कराने को कहा गया है। यानी नगर पालिका की फाइलों में कार्रवाई और शुल्क वसूली की प्रक्रिया लगातार चल रही है। फिर सवाल कॉलोनाइजरों में डर क्यों नहीं? इसके अलावा 4 माह में 2 दर्जन से अधिक अवैध कालोनियों को नगरपालिका से नोटिस जारी किया जा चुका है, लेकिन कॉलोनाइजरों को को कोई भय नहीं है।
मध्यप्रदेश नगर पालिका (कॉलोनी विकास) नियम, 2021 में अनधिकृत कॉलोनी के विकास को रोकने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया है। नियमों के अनुसार अनधिकृत कॉलोनी की जानकारी मिलने पर विकासकर्ता और भूमि स्वामी को नोटिस जारी किया जा सकता है तथा संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अंतिम नोटिस और आगे कार्रवाई का प्रावधान है।
इसके बावजूद शहर में समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। विधानसभा में दिए गए सरकारी जवाब के मुताबिक बैतूल जिले के नगरीय क्षेत्रों में पिछले 10 वर्षों में 374 आवासीय कॉलोनियों में भूखंड/आवास बेचे गए, जिनमें 365 कॉलोनियां अनधिकृत रूप से विकसित पाई गई थीं। यही आंकड़ा बताता है कि मामला महज कुछ कॉलोनियों तक सीमित नहीं है। दिसंबर 2025 में भी बैतूल जिले में अनधिकृत कॉलोनियों में सड़क, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की समस्या तथा विकास शुल्क वसूली में देरी को लेकर सवाल उठ चुके हैं।
विस्तार रुका तो सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों को
अनधिकृत कॉलोनियों के विस्तार और अधूरे विकास का खामियाजा आखिरकार वहां प्लॉट खरीदकर मकान बनाने वाले लोगों को भुगतना पड़ता है। सड़क, नाली, पानी, बिजली और अन्य नागरिक सुविधाओं का विकास व्यवस्थित तरीके से नहीं होने के कारण रहवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दूसरी ओर, जब तक कॉलोनी का नियमानुसार विकास और वैधीकरण नहीं होता, तब तक भूखंड मालिक भी असमंजस में रहते हैं।
ऐसे में अब जरूरत केवल नोटिस जारी करने की नहीं, बल्कि नोटिस के बाद क्या कार्रवाई हुई, किस कॉलोनाइजर से कितना विकास शुल्क वसूला गया और कितनी कॉलोनियों में वास्तविक विकास कार्य शुरू हुए कि इसका सार्वजनिक हिसाब सामने रखने की है। वरना कागजों पर चल रही कार्रवाई और जमीन पर बेखौफ जारी गतिविधियों के बीच अंतर बना रहेगा। सबसे बड़ा सवाल यही है जब नगर पालिका बार-बार नोटिस दे रही है और लाखों रुपए विकास शुल्क भी जमा हो रहे हैं, तो फिर अनधिकृत कॉलोनियों के विस्तार पर प्रभावी रोक कब लगेगी?
इनका कहना…..
कालोनाइजरों को कालोनियों में सुविधा देने के लिए लगातार नोटिस दिए जा रहे हैं। नोटिस का जवाब न देने पर सख्ती बरतने की तैयारियां की जा रही है।
नवनीत पांडेय, सीएमओ नपा बैतूल




