Politics: राजनीतिक हलचल: राष्ट्रीय मुद्दा हाथ से छिटकने के बाद दिलासा देने कौन पहुंचे?? सत्तारूढ़ पार्टी के पदाधिकारी को आखिर किस बात का सता रहा डर???-किस नगरपरिषद अध्यक्ष का रवैया आखिर पार्टी के लिए बन रहा सिरदर्द???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……

हाथ से छिटका राष्ट्रीय मुद्दा, फिर आई याद
जिले के एक क्षेत्र में स्कूल भवन गिराने का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया। इसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी, लेकिन विपक्ष के एक नेता ने इसे हाथोंहाथ लिया और अपने राजनैतिक सोर्स से राष्ट्रीय नेताओं को अवगत कराया तो एक के बाद एक विरोध की बाढ़ आ गई। जिला प्रशासन को भी राष्ट्रीय स्तर पर मामला पहुंचने के बाद बैकफुट पर आना पड़ा और अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए अधिकारियों की टीम को दूसरी बार मौके पर भेजना पड़ा। इस बीच पार्टी प्रमुख को भी इस मुद्दे की याद आई तो वे संबंधित क्षेत्र में पहुंचे और पीड़ित को सांत्वाना के फोटो वायरल किए। हालांकि यह मुद्दा पार्टी के ही एक पूर्व प्रमुख ने राष्ट्रीय स्तर का मना दिया। इसको लेकर राजनीतिक गलियारे में जमकर चटकारे लगाए जा रहे हैं।
परेशान सत्तारूढ़ पार्टी के पदाधिकारी
सत्तारूढ़ पार्टी में अध्यक्ष के बाद पावरफुल माने जाने वाले एक पदाधिकारी की परेशानी बढ़ गई है। मामला राजनीति से नहीं जुड़ा है, लेकिन वे एक अस्पताल का संचालन करते आए हैं। हुआ यूं की पिछले दिनों एक युवक अपनी पुत्री के इलाज के लिए उनके अस्पताल में गया था। इलाज के बाद पेशे से डॉक्टर इस पदाधिकारी ने दवाई का लंबा चौड़ा पर्चा लिख दिया। मेडिकल से दवाई लेकर जब युवक घर पहुंचा तो कम दिखाई दी।
लौटकर उसने मेडिकल संचालक से दवाई कम होने की बात की तो दुकानदार की बातें सुनकर भौचक रह गया। दरअसल इसी मेडिकल से उसे गलत दवाई देने की जानकारी मिली। इस पर युवक नाराज हुआ और आकर सीधे अधिकारियों को शिकायत कर डाली। इस मामले में विभाग ने जांच टीम बना दी और अब पार्टी पदाधिकारी का अस्पताल सील होने का खतरा मंडरा रहा है। युवक बिना किसी दबाव के मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई के लिए अड़ा हुआ है। पदाधिकारी के सारे राजनैतिक दाव मामले में फेल होने से वह बुरी तरह परेशान है।
ढूंढे नहीं मिल रहे अध्यक्ष
एक छोटी नगर परिषद के अध्यक्ष ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। चुनाव के पहले मैदान में उतरे इस अध्यक्ष ने आम लोगों को तरह-तरह के सब्जबाग दिखाए। पार्षद चुनाव जीतकर निर्दलियों के सहारे अध्यक्ष बनने की नैया पार लगा दी। इसके बाद सत्तारूढ़ पार्टी में भी शामिल हो गए, लेकिन मोबाइल रीसिव नहीं करने और लोगों से दूरियां बनाने की आदत ने इन्हें जनता की नजरों में विलेन घोषित कर दिया।
चर्चा है कि अध्यक्ष केवल चुनिंदा लोगों के ही वाट्सएप काल उठा रहे हैं। पार्टी के लोग भी इन्हें ढूंढने के लिए या तो घर या फिर खास सिपाहसलारो का सहारा ले रहे हैं। इससे पार्टी की खासी किरकिरी हो रही है। बताते चले कि यह नेताजी एक आरक्षित क्षेत्र के पूर्व विधायक के चहेते भी माने जाते हैं।




