Sanjhveer Prashasnik Kona : प्रशासनिक कोना: तोंद की चिंता में जिम पहुंचे थानेदार, तभी लाइन के आदेश से कैसा बिगड़ा फिटनेस?? हिस्सों को लेकर 2 साहबों में कैसे मची गर्मागर्मी??? किस मलाईदार विभाग की मैडम ने अपनाए पुराने साहब के फंडे, विभाग में फिर चल पड़ी वही कहानी???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…..

तोंद की चिंता में जिम पहुंचे थानेदार, तभी ‘लाइन’ ने बिगाड़ा फिटनेस प्लान

अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं में रहे एक थानेदार इन दिनों थाने के बजाय जिम में ज्यादा पसीना बहाते नजर आ रहे हैं। वजह भी बड़ी दिलचस्प बताई जा रही है। महकमे में कानाफूसी है कि साहब की तोंद कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी और एक करीबी सेवक- सूदखोर की मोहतरमा ने मजाक में साहब को आईना दिखाते हुए कह दिया कि ‘तोंद बहुत बढ़ गई है।’ बस फिर क्या था, साहब ने भी फिटनेस को मिशन बनाने की ठान ली।

चर्चा तो यहां तक है कि उक्त भाभीजी साहब के खान-पान और आवभगत का पूरा ख्याल रखती थीं। लिहाजा खाने-पीने की मेहरबानी का असर पेट पर दिखा तो फिटनेस की जिम्मेदारी जिम पर डालने की तैयारी शुरू हो गई। साहब ने जिम जाना शुरू ही किया था कि ऊपर से ऐसा आदेश आया कि पूरी कसरत का प्लान ही बदल गया कि साहब को लाइन भेज दिया गया।

अब हाल यह है कि जिम में पसीना बहाने वाले साहब पुलिस लाइन में अपनी नई पोस्टिंग के साथ तालमेल बैठाने में लगे हैं। महकमे में चुटकी लेने वाले कह रहे हैं कि ‘तोंद घटाने निकले थे, लेकिन लाइन ने ही पूरी कहानी बदल दी।’ बताते चले कि यह साहब खाने-पीने के खूब शौकीन है और मुख्यालय के पास के नामचीन रेस्टोरेंट में हर दिन पार्टी उड़ाते देखे जा सकते है।

हिस्से को लेकर 2 साहबों के बीच गर्मागर्मी

जमीन से जुड़े एक विभाग में इन दिनों ‘हिस्से’ को लेकर साहबों के बीच ही गर्मागर्मी की चर्चा है। मामला इतना गरम बताया जा रहा है कि विभागीय गलियारों में फाइलों से ज्यादा अब साहबों की बातचीत के किस्से घूम रहे हैं।
चर्चा है कि बड़े साहब का रिटायरमेंट कुछ माह बाद होना है। ऐसे में जाते-जाते ऊपरी कमाई का हिस्सा थोड़ा और मजबूत करने की इच्छा जाग उठी है। इसी को लेकर बड़े साहब ने विभाग में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले साहब पर हिस्से को लेकर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन सामने वाले साहब भी टस से मस होने को तैयार नहीं बताए जा रहे।

चर्चा तो यह भी है कि हिस्से के इसी हिसाब-किताब को लेकर दोनों के बीच हॉट टॉक तक की नौबत आ चुकी है। मजेदार बात यह है कि विभाग का कथित ‘लेन-देन’ दूसरे नंबर वाले साहब के पास ही रहता है। लिहाजा बड़े साहब चाहकर भी अपनी बात मनवाने की स्थिति में नहीं बताए जा रहे। अब विभाग में चुटकी लेने वालों का कहना है कि साहब के पास रिटायरमेंट की तारीख तो तय है, लेकिन हिस्से का हिसाब अभी तय नहीं हो पा रहा। दोनों के बीच चल रही खींचतान कब खत्म होगी, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल विभाग में हर कोई अपने-अपने हिस्से का गणित लगाने में व्यस्त है।

मैडम ने अपनाए पुराने साहब के ‘फंडे’, विभाग में फिर वही कहानी

आदिवासियों से सीधे जुड़े एक महत्वपूर्ण विभाग में इन दिनों नई मैडम की कार्यशैली पुराने साहब की याद दिलाने लगी है। विभाग में चर्चा है कि जिन पुराने साहब की कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय तक सवाल उठते रहे, उनके ही कई ‘फंडों’ को नई मैडम ने भी अपना लिया है। नतीजा यह है कि सिस्टम भले ही चेहरे बदलकर चल रहा हो, लेकिन कहानी पुरानी ही नजर आ रही है।

कहा जा रहा है कि पुराने साहब के दौर में विभागीय कामकाज का जो ढर्रा बना था, वही अब नए नेतृत्व में भी धीरे-धीरे स्थापित होता दिख रहा है। इससे विभाग के अधीक्षक से लेकर प्राचार्य तक परेशान बताए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा असर उन विद्यार्थियों पर पडऩे की चर्चा है, जिन्हें व्यवस्थाओं के बेहतर होने की उम्मीद थी।
महकमे के गलियारों में अब सवाल यह उठ रहा है कि मैडम ने पुरानी फाइलें पढ़ीं या पुराने ‘फंडे’ भी पढ़ लिए? क्योंकि व्यवस्था में बदलाव की जगह यदि वही पुराने तौर-तरीके लौट आएं तो फिर चेहरे बदलने का मतलब ही क्या रह जाता है?

अधिकारी-कर्मचारी भी फिलहाल खुलकर बोलने से बच रहे हैं, लेकिन अंदरखाने चर्चाओं का बाजार गर्म है। अधीक्षक और प्राचार्य की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती दिख रही हैं और विद्यार्थियों की परेशानियां भी जस की तस बनी हुई हैं। अब देखना यह है कि नई मैडम पुराने साहब की विरासत को आगे बढ़ाती हैं या विभाग में वाकई नया अध्याय शुरू करती हैं।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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