Ek Paati Indra: बैतूल पर भी बरसा दीजिए अपनी कृपादृष्टि!

वरना आने वाले दिनों में बूंद-बूंद पानी और महंगे अन्न के लिए तरसना पड़ सकता है

सादर प्रणाम। 

सुना है, इन दिनों आप देश के कई हिस्सों पर इतने प्रसन्न हैं कि कहीं नदियां उफान पर हैं तो कहीं जलभराव ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर रखा है। आपकी कृपा का यह विराट रूप देखकर हमें प्रसन्नता भी है और आश्चर्य भी। प्रसन्नता इसलिए कि देश की धरती तृप्त हो रही है और आश्चर्य इसलिए कि हमारी ओर आपकी दृष्टि अब तक कुछ कम ही पड़ी है।

हे इंद्रदेव! बैतूल से यह पाती इसलिए लिखनी पड़ रही है, क्योंकि इस बार आपकी कृपा का इंतजार कुछ लंबा हो गया है। सामान्य वर्षा का आंकड़ा जहां 1083.9 मिलीमीटर है, वहीं अब तक जिले में लगभग 605.8 मिलीमीटर वर्षा ही दर्ज हुई है। अर्थात आधे से कुछ अधिक पानी ही धरती को नसीब हुआ है।

आषाढ़ बीत गया, सावन भी रिमझिम में निकल गया और भादों का पहला सप्ताह भी इसी प्रतीक्षा में गुजर गया कि शायद अब आप मेघों का मुंह हमारी ओर कर दें। मौसम विभाग जब-जब भारी वर्षा का संकेत देता है, हमारी आंखें आसमान की ओर टिक जाती हैं।

बादल आते हैं, उम्मीद जगाते हैं और फिर बिना बरसे ऐसे निकल जाते हैं, जैसे बैतूल का पता ही गलत बता दिया गया हो! इंद्रदेव, आपसे शिकायत नहीं है। आखिर आपकी अपनी व्यवस्था होगी। लेकिन इतना अवश्य पूछना है कि बैतूल ने ऐसा कौन-सा अपराध कर दिया है कि भारी वर्षा के पूर्वानुमान भी यहां आकर हल्की बूंदों में बदल जाते हैं?

मामला केवल खेतों तक सीमित नहीं है। जिले के बांध और जलाशय अभी उस स्थिति में नहीं पहुंचे हैं, जहां गर्मी के दिनों की चिंता दूर हो सके। यदि शेष समय में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट गहरा सकता है। और यदि जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं आया तो उसका सीधा असर खेती पर पड़ेगा।

हमारे किसान आपकी ओर ही देखते हैं। खेत में बीज डालने से लेकर फसल पकने तक उनकी उम्मीदें बादलों से जुड़ी रहती हैं। पानी कम पड़ा तो उत्पादन प्रभावित होगा और उत्पादन घटा तो बाजार में अन्न की कीमत बढ़ने का संकट भी सामने आ सकता है। तब बात केवल खेत की नहीं रहेगी रसोई तक पहुंचेगी।

इसलिए हे मेघपति! देश के दूसरे हिस्सों में यदि आपकी कृपा कुछ अधिक हो गई है तो उसका थोड़ा-सा हिस्सा बैतूल के खाते में भी भेज दीजिए। हमें बाढ़ नहीं चाहिए, बस इतनी वर्षा अवश्य चाहिए कि जलाशय भर जाएं, खेतों की प्यास बुझ जाए और आने वाली गर्मी के लिए पानी सुरक्षित हो जाए। आखिर बैतूल भी आपका ही है।

यहां के किसान भी आपके ही भक्त हैं। और यहां के बांध भी कब से आपकी राह देख रहे हैं। अबकी बार बादल भेजिए तो उन्हें रास्ता मत भटकने दीजिएगा। बैतूल की धरती पर भी दो-चार दौर ऐसी वर्षा करवा दीजिए कि लोग छाता लेकर निकलें तो शिकायत न करें, बल्कि आपको धन्यवाद दें।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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