Betul News : दो लैब टेक्निशियन के भरोसे जिला अस्पताल की लैब

जब काउंसलिंग हुई तो अस्पताल प्रबंधन ने नहीं भेजी डिमांड, पैथालॉजी के भी दो पद खाली होने से चरमराई व्यवस्था

Betul News : बैतूल। ए ग्रेड के जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं लगातार बेपटरी होते जा रही है। इसके बावजूद अधिकारी अपने अनुसार ही काम कर मरीजों की परेशानी बढ़ाने का काम कर रहे हैं। इस समय जब बीमारियों का दौर चल रहा है और अस्पताल की ओपीडी हर दिन एक हजार से अधिक की पहुंच गई है, लेकिन पर्याप्त स्टाफ की कमी होने के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं। जिला अस्पताल के पैथालाजी विभाग के भी हालात किसी से छिपे नहीं है।

यहां पर लैब टेक्निशियन के सात पद स्वीकृत है, लेकिन महज दो के भरोसे पूरी व्यवस्थाएं चल रही हैं। चौकाने वाली बात यह है कि जब राज्य शासन द्वारा लैब टेक्निशियन के लिए काउंसलिंग चल रही थी, तब अस्पताल प्रबंधन ने पदों के लिए प्रस्ताव नहीं भेजे। इसी वजह रिक्त पदों पर भर्ती नहीं हो पाई और हालात बिगड़ते जा रहे हैं। दूसरी तरफ पैथालॉजिस्ट के दो पर रिक्त होने से मरीजों की परेशानी बढ़ते जा रही है।

जिला अस्पताल में हर दिन एक हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से सबसे अधिक वायरल फीवर,सर्दी, जुकाम और मौसमी बीमारियों के मरीज है। वायरल फीवर के लगभग अधिकांश मरीजों के लिए ओपीडी में डॉक्टर ब्लड टेस्ट के लिए सलाह देते हैं। डॉक्टरों की सलाह के आधार पर मरीजों के ब्लड सेंपल अस्पताल की पैथालॉजी लैब में भेजे जा रहे हैं। कई मरीजों की शिकायत है कि कई मरीजों की रिपोर्ट पैथालॉजी से समय पर नहीं मिलती है। जब इस संबंध में पड़ताल की गई तो जानकारी सामने आई है कि बड़ी संख्या में ब्लड टेस्ट के नमूने आने पर पैथालाजी में स्टाफ की कमी के कारण स्थिति नियंत्रण में नहीं है। इसी वजह मरीजों की ब्लड सैंपल की रिपोर्ट समय पर नहीं दी जा रही है। कई मरीज सैंपल की रिपोर्ट के इंतजार में और अधिक बीमार पड़ जा रहे हैं। इसकी तरफ प्रबंधन का कोई ध्यान नहीं है।

रिक्त पदों को लेकर गुमराह करने वाली जानकारी

जिला अस्पताल की लैब में नियम में वैसे कुल सात पद स्वीकृत है। इनमें से अभी भी पांच लैब टेक्निशियनों की जरूरत है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने पिछले दिनों राज्य शासन की काउंसलिंग में डिमांड पत्र आने के बावजूद भेजने में चूक कर दी। सूत्र बताते हैं कि इसी चूक का खामियाजा प्रबंधन को भुगतना पड़ रहा है। केवल दो लैब टेक्निशियन के भरोसे लैब का संचालन किया जा रहा है। पांच पद आज की तिथि में रिक्त पड़े हैं।

यही वजह है कि रिपोर्ट से लेकर अन्य कामों में देरी का सिलसिला जारी है। इस मामले में सिविल सर्जन के पास पूरी जानकारी भी नहीं है। उन्हें स्टाफ ने दस में से सात लैब टेक्निशियन होने और तीन पद रिक्त होने की जानकारी दी है। यह स्थिति लैब और ब्लड बैंक को मिलकार बताया जा रहा है, लेकिन अकेले लैब में ही पांच कर्मचारियों की कमी के कारण व्यवस्था बिगड़ रही है। यह समझ से परे हैं कि जब शासन से लैब टेक्निशियन के पदों की डिमांड मांगी जा रही थी, तब यह प्रस्ताव भेजने में किसने चूक की? इस बात को लेकर आज तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।

डॉ सीते के भरोसे पूरा जिम्मा, पैथालॉजिस्ट की कमी अब भी बरकरार

यहां पर चौकाने वाली सामने आई है कि केवल क्लास-2 डॉ अंकिता सीते के भरोसे पूरे अस्पताल की ब्लड बैंक और लैब का संचालन हो रहा है। बताया जाता है कि डॉ सीते भी बढ़ते वर्क लोड से काफी परेशान है। जिला अस्पताल में पूर्व में दो पैथालॉजिस्ट डॉ अशोक बारंगा और डॉ अशोक नागले के सेवानिवृत्त होने के बाद किसी भी पैथालॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हो पाई है। पैथालॉजिस्ट की कमी को पूरा करने के लिए कितने बार पत्राचार किए इस बात की जानकारी भी सामने नहीं आई है। बिगड़े हालातों के बीच जैसे-तैसे व्यवस्थाओं का संचालन किया जा रहा है।

इनका कहना…..

मुझे लैब और ब्लड बैंक से ओवरआल 10 में से 3 लैब टेक्निशियन की कमी की जानकारी दी गई है। काउंसलिंग में रिक्त पदों की जानकारी क्यों नहीं भेजी? इसके बारे में जानकारी लेकर ही बता पाऊंगा। अस्पताल में दो पैथालॉजिस्ट की भी कमी है।

डॉ. जगदीश घोरे, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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