Betul News: आडिट में फाइलों पर ‘आपत्ति का ब्रेक, भुगतान अटका तो विकास कार्यों पर लग सकता है ग्रहण

ठेकेदार बोले—जेब से खर्च कर रहे पैसा, समय पर भुगतान नहीं मिला तो काम रोकना मजबूरी
Betul News: बैतूल।। नगर पालिका में निर्माण कार्यों से जुड़ी फाइलों पर लगातार लग रही ऑडिट आपत्तियां इन दिनों ठेकेदारों के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं।
यदि ऐसा ही रहा तो शहर में चल रहे निर्माण एवं विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित होने से कोई रोक नहीं पायेगा, वहीं जनप्रतिनिधियों को लोगो के आक्रोश के साथ फजीहत अलग झेलना पड़ेगा।
बताया जा रहा है कि हाल ही में नपा में पदस्थ हुई महिला ऑडिटर द्वारा ठेकेदारों से संबंधित फाइलों में विभिन्न बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं। इसके चलते भुगतान प्रक्रिया प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। ठेकेदारों में इसे लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब यह आपत्तियां कितनी संवेदनशील हैं, नियमानुसार लगाई जा रही हैं या नहीं यह तो ऑडिटर जाने लेकिन ठेकेदारों के सामने खड़ी हुई यह समस्या आम नागरिको के लिए बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है।
ठेकेदारों का कहना है कि निर्माण कार्यों को पूरा करने में उन्हें शुरुआत में अपनी जेब से बड़ी राशि लगानी पड़ती है। कार्य की प्रगति के अनुसार समय समय पर नगर पालिका से मिलने वाला भुगतान उनके लिए आर्थिक सहारा होता है। लेकिन फाइलों पर आपत्ति लगने के बाद भुगतान प्रक्रिया लंबी होने से उनकी पूंजी फंसने लगी है। इससे नए कार्यों के लिए पैसा जुटाना भी मुश्किल हो रहा है।यदि इसी दुविधा में फंसे रहे तो काम करना मुश्किल हो जाएगा।
पहले कम आती थीं आपत्तियां, अब बढ़ने लगी परेशानीयां
ठेकेदारों के मुताबिक पूर्व में इस तरह की स्थिति कम ही देखने को मिलती थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से अधिकांश फाइलों पर थोक में आपत्तियां सामने आने की चर्चा है। ऐसे में ठेकेदार यह समझ नहीं पा रहे हैं कि अचानक इतनी बड़ी संख्या में फाइलों पर आपत्ति लगाए जाने की आखिर वजह क्या है। हालांकि, ऑडिट प्रक्रिया में यदि नियमों की अनदेखी या दस्तावेजों में कमी पाई जाती है तो आपत्ति लगाना स्वाभाविक प्रक्रिया भी हो सकती है ।
खिचड़ीÓ पकने की चर्चा, लेकिन वजह साफ नहीं
लगातार आपत्तियों के पीछे आखिर क्या कारण है, इसे लेकर नगर पालिका के गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं भी व्याप्त हैं। कुछ ठेकेदार इसे अनावश्यक अड़ंगे के रूप में देख रहे हैं, जबकि वास्तविक स्थिति संबंधित फाइलों की जांच और आपत्तियों के निराकरण के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल यह सवाल जरूर उठ रहा है कि यदि आपत्तियां नियमों के तहत हैं तो उनका जल्द निराकरण क्यों नहीं हो रहा।
क्या जानबूझकर इस कृत्य को सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दिया जा रहा है यह शोध का विषय है। ठेकेदारों का कहना है कि यदि भुगतान में इसी तरह देरी होती रही तो आर्थिक संकट के चलते निर्माण कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर शहर में चल रहे विकास कार्यों पर पड़ेगा। वहीं काम रुकने या धीमा होने से आम नागरिकों की परेशानी भी बढ़ सकती है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों के सामने भी जनता के सवालों का जवाब देने की चुनौती खड़ी हो सकती है।
अब देखना यह होगा कि ऑडिट की आपत्तियां वास्तव में नियमों की जांच का हिस्सा हैं या फाइलों की रफ्तार पर लगा यह ब्रेक जल्द हटेगा।
इनका कहना
मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं है, जानकारी लेने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
नवनीत पांडेय, सीएमओ नपा बैतूल
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