Khari Khari: खबरें चुभीं तो नंबर ब्लॉक! साहब, फोन की घंटी बंद हो सकती है, कलम की आवाज नहीं

Khari Khari: कहते हैं, आईना चेहरा नहीं बदलता, सिर्फ तस्वीर दिखाता है। मीडिया भी लोकतंत्र का ऐसा ही आईना है, जो व्यवस्था की तस्वीर जनता के सामने रखता है। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कमी हो, किसी विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में हो या अधिकारी जवाबदेही से बचते नजर आएं तो सवाल पूछना मीडिया का अधिकार ही नहीं, उसकी जिम्मेदारी भी है, लेकिन जब सवालों का जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वाले पत्रकार का मोबाइल नंबर ही ब्लॉक कर दिया जाए, तो मामला केवल एक फोन नंबर तक सीमित नहीं रहता।

 सवाल उठता है कि परेशानी खबर से है या खबर में उठाए गए सवालों से। पिछले दिनों जिला मुख्यालय से प्रकाशित सांध्य हिंदी दैनिक सांझवीर टाईम्स ने जिले में आयोजित टीएल बैठक से जुड़े मामलों को लेकर एक खबर प्रकाशित की थीं।

खबर में एक ही प्रकरण के कई बैठकों तक लंबित रहने, अधिकारियों को निर्देश दिए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में दिखाई दे रही खामियों पर सवाल उठाए थे। खबर का असर भी दिखाई दिया। कुछ मामलों में प्रशासन ने सख्ती दिखाई, कार्रवाई हुई, नोटिस जारी हुए और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।

यानी खबर ने अपना काम किया और प्रशासन ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। फिर इसी बीच इस प्रतिनिधि का मोबाइल नंबर ब्लॉक होना चर्चा का विषय बन गया। सवाल सीधा है कि अगर खबर गलत थी तो उसका खंडन किया जाता। अगर तथ्यों में कमी थी तो तथ्य सामने रखे जाते। अगर खबर में कोई त्रुटि थी तो पत्रकार को वस्तुस्थिति बताई जाती, लेकिन संवाद की जगह नंबर ब्लॉक करना आखिर किस समस्या का समाधान है?

साहब! नंबर ब्लॉक करने से फोन की घंटी बंद हो सकती है, कलम की आवाज नहीं। सरकारी योजनाएं जनता के पैसे से चलती हैं। उन योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक तरीके से हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन जमीनी हकीकत सामने लाना मीडिया और समाज की भी जिम्मेदारी है।

जब अधिकारी बैठकों में विभागों की समीक्षा कर सकते हैं, कमियां मिलने पर नोटिस जारी कर सकते हैं और जिम्मेदारी तय कर सकते हैं, तो मीडिया भी उन्हीं व्यवस्थाओं को लेकर सवाल पूछ सकता है। सवाल पूछना किसी व्यक्ति के खिलाफ अभियान नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश है और यहां जिले के जनप्रतिनिधियों को भी गंभीरता से सोचने की जरूरत है।

यदि मीडिया सवाल पूछे और अधिकारी सवाल का जवाब देने या संवाद कायम करने के बजाय पत्रकार से संपर्क ही खत्म कर दें तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वस्थ संवाद कैसे कायम रहेगा? जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल मंच साझा करने और कार्यक्रमों में उपस्थित रहने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

उन्हें यह भी देखना होगा कि जनता, मीडिया और प्रशासन के बीच संवाद की खिड़की खुली रहे। सांझवीर टाईम्स का उद्देश्य किसी अधिकारी से व्यक्तिगत टकराव करना नहीं है। हमारा काम जनता से जुड़े सवालों को सामने लाना और व्यवस्था से जवाब मांगना है।

खबर सही होगी तो उसे पूरी मजबूती से प्रकाशित किया जाएगा और यदि कहीं तथ्यात्मक त्रुटि होगी तो उसे सुधारने में भी कोई संकोच नहीं होगा, लेकिन एक बात स्पष्ट है कि नंबर ब्लॉक कर दीजिए, फोन उठाना बंद कर दीजिए, संवाद के रास्ते बंद कर दीजिए, लेकिन खबरों को नहीं रोक पाएंगे, क्योंकि पत्रकार का काम सवाल पूछना है और मीडिया का काम जनता की आवाज बनना।

फोन की घंटी कुछ देर के लिए खामोश हो सकती है, लेकिन सच की आवाज को ब्लॉक करने का कोई बटन नहीं होता। और जब तक जनता से जुड़े सवाल बाकी हैं, कलम चलती रहेगी… खबरें लिखी जाती रहेंगी… और सवाल पूछे जाते रहेंगे।

जय हिंद…..

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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