Betul Rishvat Kand : 55 हजार के रिश्वत कांड के बाद वन मंडल में फिर उठे सवाल
आदेशों को दरकिनार कर चलाया जा रहा स्वहित का खेल! अधिकारियों की चुप्पी भी कटघरे में

Betul Rishvat Kand : बैतूल। पश्चिम वन मंडल में सोमवार को सामने आए 55 हजार रुपए के रिश्वत कांड ने विभागीय कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि स्वहित साधने के फेर में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों तक को नजरअंदाज किया जा रहा है। खास तौर पर कम्प्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका और लंबे समय से एक ही शाखा में जमे कर्मचारियों को लेकर विभाग के भीतर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
पश्चिम वन मंडल में पदस्थ कम्प्यूटर ऑपरेटर यादव बंधुओं की कथित मजबूत पकड़ को लेकर लंबे समय से चर्चाएं हैं। सूत्रों का दावा है कि विभागीय कामकाज में इनकी भूमिका इतनी प्रभावशाली है कि वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों को भी इनके सामने लाइन में लगना पड़ता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूर्व में कम्प्यूटर ऑपरेटरों की कार्यप्रणाली को लेकर वन मुख्यालय से सख्त निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन उनके पालन को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।

नवम्बर 2025 में जारी हुए थे स्पष्ट निर्देश
वन बल प्रमुख वी.एन. अम्बाड़े ने नवम्बर 2025 में अधिकारियों को कम्प्यूटर ऑपरेटरों एवं कर्मचारियों के संबंध में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा ऑनलाइन भुगतानों की विश्वसनीयता बनाए रखने के निर्देश दिए थे। इसमें वास्तविक श्रमिक या वेंडर को किए गए भुगतान और कार्य के सत्यापन के लिए सामाजिक अंकेक्षण कराने की बात कही गई थी।
लॉग-इन और ओटीपी को लेकर भी चेतावनी
निर्देशों में स्पष्ट कहा गया था कि आईएफएमआईएस में ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया में क्रिएटर, वेरिफायर और अप्रूवर की व्यवस्था व्यवस्थित रखी जाए। साथ ही कम्प्यूटर ऑपरेटरों को किसी भी स्थिति में लॉग-इन पासवर्ड अथवा ओटीपी उपलब्ध नहीं कराने के निर्देश दिए गए थे।
दो-तीन साल में रोटेशन अनिवार्य
महालेखाकार एवं आंतरिक लेखा परीक्षण की रिपोर्टों का हवाला देते हुए मुख्यालय ने यह भी माना था कि कई वन मंडलों में कम्प्यूटर ऑपरेटर वर्षों से एक ही शाखा में काम कर रहे हैं। कार्यालय प्रमुखों को कर्मचारियों और ऑपरेटरों का दो से तीन वर्ष में अनिवार्य रोटेशन करने के निर्देश दिए गए थे। इसी पश्चिम वन मंडल में करीब आठ माह पूर्व करोड़ों रुपए के कथित फर्जी बाउचर से जुड़ी जांच शुरू होने की चर्चा भी सामने आई थी। अब 55 हजार रुपए के रिश्वत कांड के बाद पुराने मामलों की निष्पक्ष जांच और मुख्यालय के निर्देशों के पालन को लेकर सवाल फिर उठने लगे हैं। विभागीय स्तर पर यदि निर्देशों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारी तय करना आवश्यक होगा।




