Betul Hospital News: जिला अस्पताल में भी आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा!

2024 के टेंडर पर कर्मचारियों की नियुक्ति, जांच हुई तो सामने आ सकता है बड़ा मामला
Betul Hospital News: बैतूल। राज्य शासन ने जिला स्तर पर विभाग प्रमुखों को आउटसोर्स कर्मचारियों को रखने की छूट क्या दी, इसकी आड़ में बड़ा गड़बड़झाला हो रहा है। बीते दिनों स्वास्थ्य विभाग ने यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य संचलनालय से अधिकारी से जवाब मांगा गया। यह मामला सुर्खियां ही बटोर रहा था कि अब जिला अस्पताल में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। अपुष्ट, लेकिन जानकार सूत्र बताते हैं कि जिला अस्पताल में करीब 140 आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के नाम पर कई फर्जीवाड़े हुए हैं।
बताया जाता है कि बिना टेंडर के इन आउटसोर्स कर्मचारियों को मनमर्जी से रखा गया है। मामले में मीडिया की पूछताछ के बाद कहा जा रहा है कि ढाई वर्ष पहले निकले टेंडर के आधार पर ही आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति बढ़ा दी गई, लेकिन वास्तविकता यह है कि इसके लिए वरिष्ठ कार्यालय को अवगत कराना आवश्यक है। यदि स्वास्थ्य विभाग की तरह जिला अस्पताल में भी जांच कराई जाए तो बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
सूत्रों ने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के बहाने जिला अस्पताल में बड़ा गड़बड़झाला हुआ है। करीब 140 चहेते कर्मचारियों की नियुक्ति एक कंपनी के माध्यम से कर दी गई। पहले यह संख्या करीब सौ के करीब थी, लेकिन इसे बढ़ाकर 140 कर दिया है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि कर्मचारी की कमी के कारण संख्या बढ़ाई गई है। हालांकि कितने कर्मचारी, किस जगह काम कर रहे हैं। इसकी जानकारी किसी को नहीं है। 10 से 12 हजार मोटा वेतन संबंधित कर्मचारी के नाम कंपनी को दिया जा रहा है। यह कहीं न कहीं शासन को चूना लगाना जैसे हालात निर्मित कर रहे हैं।
पुराने टेंडर पर कर्मचारियों को रखासूत्र बताते हैं कि हर वर्ष या दो वर्ष
के अंतराल में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए टेंडर निकालना अनिवार्य है, लेकिन जिला अस्पताल में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। नए वर्ष के लिए बिना टेंडर निकाले वर्ष 2024 के आनलाइन टेंडर का आधार पर बनाकर सभी आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति की बात कही जा रही है। यह कहीं न कहीं बड़ी लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है। जानकार सूत्र बताते हैं कि आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए वरिष्ठ कार्यालय को भी अवगत कराना था, लेकिन यहां पूरे नियम कायदों को ताक पर रखा गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि कितने आउटसोर्स कर्मचारियों को रखने के लिए शासन से अनुमति मिली थी और कितने रखे गए? यह जानकारी तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
एक ही कंपनी को दो जगह की जिम्मेदारी
चौकाने वाली बात यह सामने आई है कि जिला अस्पताल और सीएमएचओ कार्यालय में एक ही कंपनी को आउटसोर्स कर्मचारी रखने के अधिकार दे दिए गए। नियम के अनुसार दोनों ही जगह अलग-अलग टेंडर आमंत्रित किए जाने थे, लेकिन नियमों को दरकिनार करते हुए एक ही आउटसोर्स कंपनी को दोनों जगह के टेंडर देकर नियमों की धज्जियां उड़ाई गई है। यह बात कलेक्टर और विभाग के अन्य अधिकारियों से छिपाई गई। जिला अस्पताल के अधिकारी वास्तविकता से उन्हें अवगत कराते तो यहां पर भी बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ सकता था।
जानकार सूत्र बताते हैं सीएमएचओ कार्यालय जिला अस्पताल में नियमों से अलग-अलग फर्मों को टेंडर दिया जाना था। इस बात से साफ जाहिर है कि बड़ी लापरवाही बरत कर टेंडर में चूक की गई। इस बारे में कलेक्टर डॉ सौरभ संजय सोनवणे को उनके मोबाइल 7701071112 पर काल किया गया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया, जबकि सिविल सर्जन डॉ जगदीश घोरे ट्रेनिंग में हैदराबाद जाने के कारण चर्चा के लिए उपलब्ध नहीं हो सके ।
इनका कहना….
आउटसोर्स कर्मचारी 2024 की आनलाइन टेंडर के आधार पर रखे हैं। 3 वर्ष तक इन्हें रखने के निर्देश है। जिला अस्पताल में 140 आउटसोर्स कर्मचारी अलग-अलग सेवाएं दे रहे हैं। अधिकारी जानकारी सिविल सर्जन के ट्रेनिंग से आने के बाद दी जा सकती है।
कमलेश सातनकर, प्रभारी स्टूवर्ड, जिला अस्पताल बैतूल
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