Betul News: सरकार कर रही करोड़ों खर्च, बैतूल में जर्जर शव वाहनों पर जिम्मेदार खामोश

निगरानी से अफसरों को परहेज, कंडम शव वाहनों पर अधिकारियों की चुप्पी

Betul News: बैतूल। प्रदेश सरकार आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन बैतूल जिले में संजीवनी 108 के तहत संचालित शव वाहनों की स्थिति स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

आरोप है कि जिले में संचालित कई शव वाहन जर्जर हालत में हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारियों ने न तो उनकी नियमित निगरानी और जांच कर रहे न ही सेवा प्रदाता कंपनी से इस संबंध में कोई पत्राचार किया जा सका है। कुल मिलाकर कम्पनी को खुली छूट देकर शवों की बेकद्री सामने रहकर कराई जा रही है।

जानकारों का दावा है कि किसी भी अनुबंधित स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता, वाहनों की स्थिति, कर्मचारियों के व्यवहार तथा आम लोगों को मिल रही सुविधाओं की निगरानी पद पर बैठे संबंधित अधिकारियों की होती है।समय समय पर उन्हें देखना होता है कि जिस उद्देध्य को लेकर कम्पनी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कम्पनी उसका सही तरीके और अनुबंध के हिसाब से निर्वहन कर रही है या नहीं। बावजूद सिविल सर्जन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी स्तर पर इस व्यवस्था की प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं किए जाने के आरोप लग रहे हैं। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि कम्पनी मनमाने तरीके से कंडम वाहनों का उपयोग कर रही है इसकी जानकारी अफसरों को क्यों नहीं है। नए वाहन आएऔर वापस चले गए। अफसरों ने इसको लेकर कम्पनी से पत्राचार क्यों नहीं किया। यह तमाम ऐसे सवाल है जो अफसरों की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं।

सेवा की निगरानी और जवाबदेही आखिर किस अधिकारी की?

बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल परिसर से भी जर्जर शव वाहनों के माध्यम से शवों का परिवहन किया जा रहा है। इसके बावजूद अधिकारियों ने वाहनों की स्थिति पर संज्ञान लेना उचित नहीं समझा।

आरोप है कि कंपनी अपने स्तर पर मनमाने ढंग से संचालन कर रही है और अफसरों को इसकी भनक तक नहीं है, जबकि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अनुबंध की सभी शर्तों का पालन हो और लोगों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक सेवा मिले। इस मामले में सिविल सर्जन का कहना है कि अधिक जानकारी कंपनी के अधिकारी और सीएमएचओ ही दे सकते हैं।

वाहन शाखा का संचालन वहीं से होता है। उनके इस जवाब के बाद यह सवाल उठ रहा है कि सेवा की निगरानी और जवाबदेही आखिर किसकी है। इस गम्भीर मामले को लेकर सीएमएचओ डॉ. मनोज हुरमाडे से उनके मोबाइल नंबर 9425381818 पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने भी फोन रिसीव नहीं किया।

इनका कहना…..

वाहन शाखा का संचालन सीएमएचओ कार्यालय से होता है। वहां से जानकारी मिल सकती है।

डॉ.जगदीश घोरे,सिविल सर्जन जिला अस्पताल बैतूल

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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