Betul Ki Khabar: Video: एकजुटता के संदेश के बीच सामने आया मतभेद!

2 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में पोस्टर, फ्लेक्स विवाद पर तक़रार, फिर झूठी शिकायत पर भी गरमाई राजनीति
Betul Ki Khabar: बैतूल। दादावाड़ी में आयोजित कांग्रेस के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन तो संगठन को मजबूत करने के संदेश के साथ हुआ, लेकिन शिविर के दौरान सामने आए घटनाक्रमों ने एक बार फिर जिले की कांग्रेस में गुटबाजी की चर्चाओं को हवा दे दी। सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस संगठन उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे की तस्वीर को लेकर रही, जो कार्यक्रम स्थल पर लगे प्रमुख फ्लेक्स और बैनरों से नदारद दिखाई दी।
शिविर में राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं के फोटो लगाए गए थे, लेकिन पांसे की तस्वीर नहीं होने पर कार्यकर्ताओं के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। हालांकि जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे पार्टी की अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि पांसे समर्थकों ने भी प्रशिक्षण शिविर के बाहर बाद में अपने नेता के पोस्टर और कट आउट लगाकर नाराजगी दूर करने का प्रयास किया।
स्वागत कार्यक्रम भी बना चर्चा का विषय
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बैतूल आगमन पर सोनाघाटी के पास पांसे समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया था। इसके बाद कांग्रेस के ही चिचोली और आमला के 2 नेताओं ने पूर्व मंत्री और उनके समर्थकों की शिकायत कर दी थी।बताया जा रहा है कि इस आयोजन को लेकर कांग्रेस के कुछ नेताओं ने प्रदेश प्रभारी के सामने आपत्ति भी दर्ज कराई। हालांकि प्रदेश प्रभारी ने इस मामले को अधिक तवज्जो नहीं दी।
प्रभारी के जाने के बाद गर्माया माहौल
सूत्र बताते हैं कि प्रशिक्षण शिविर से प्रदेश प्रभारी के रवाना होने के बाद शिकायत करने वाले आमला के एक युवा नेता और पांसे समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कुछ देर तक दोनों पक्षों में बहस चलती रही, जिसके बाद मामला शांत हो गया। हालांकि इस घटनाक्रम ने यह संकेत जरूर दिया कि संगठनात्मक एकजुटता के दावों के बीच मतभेद अभी भी खत्म नहीं हुए हैं।
संगठन मजबूत करने का संदेश, लेकिन सवाल बरकरार
दो दिन तक चले प्रशिक्षण शिविर में नेताओं ने कार्यकर्ताओं को संगठन विस्तार, बूथ प्रबंधन और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने का पाठ पढ़ाया। लेकिन शिविर समाप्त होते-होते पोस्टर विवाद और नेताओं के बीच कथित तकरार चर्चा का केंद्र बन गई।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावी तैयारियों के बीच यदि कांग्रेस को जिले में मजबूत स्थिति बनानी है तो उसे पहले अपने अंदरूनी मतभेदों पर नियंत्रण करना होगा। फिलहाल प्रशिक्षण शिविर से ज्यादा चर्चा पोस्टर से गायब हुई एक तस्वीर और उससे जुड़े राजनीतिक संदेश की हो रही है।




