Betul Samachar: कोठीबाजार ड्रेनेज माप-जोख में गड़बड़ी की आशंका, भुगतान प्रक्रिया जांच के घेरे में

क्या मेजर मेन्ट बुक में भी छेड़छाड़ के बाद किया लाखो का भुगतान
Betul Samachar: बैतूल। कोठीबाजार क्षेत्र में निर्मित ड्रेनेज परियोजना जमकर चर्चा में है। सूत्रों के हवाले से अब ख़बर मिली है कि निर्माण कार्य की माप-जोख (मेजरमेंट) में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि मौके पर किए गए कार्य और मेजरमेंट बुक (एमबी) में दर्ज विवरण में अंतर होने के बावजूद ठेके की शर्तों के अनुसार भुगतान किया जा रहा है। इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।
इधर बताया जा रहा है, की नपा के एक इंजीनियर ठेकेदार की पूरी तरफदारी कर उन्हें इस मामले में गाइड कर रहे हैं कि उन्हें क्या करना है क्या नहीं। लेकिन अब मामला कलेक्टर तक पहुंच गया है। आशंका है कि, कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद कहानी सच है या झूठी यह सामने आ जायेगा।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, निर्माण स्थल पर वास्तविक कार्य और रिकॉर्ड में दर्ज माप-जोख के बीच अंतर होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो सरकारी राशि के भुगतान की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। मामले की जानकारी कलेक्टर सौरभ संजय सोनवणे के संज्ञान में भी पहुंच गई है।
इस संबंध में कलेक्टर सौरभ संजय सोनवणे ने स्पष्ट कहा कि अनुबंध के अनुसार ही राशि का भुगतान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि मौके पर गड़बड़ी है और मेजरमेंट बुक में अनुबंध के अनुसार भुगतान दर्शाया गया है, तो यह गलत माना जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कई बार निर्माण कार्य के दौरान ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं, जिनमें मौके पर माप-जोख में बदलाव करना पड़ता है।
कलेक्टर ने कहा कि ऐसी स्थिति में संशोधित माप-जोख का पूरा विवरण मेजरमेंट बुक में दर्ज होना चाहिए और भुगतान भी उसी के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की जानकारी ली जाएगी और यदि कहीं अनियमितता पाई गई तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अनियमितता मिली तो नपेंगे अधिकारी और ठेकेदार
कोठीबाजार ड्रेनेज निर्माण से जुड़े इस मामले ने निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। यदि जांच में माप-जोख और भुगतान के बीच विसंगति सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल कलेक्टर के जांच के संकेत के बाद यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
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