Betul Ki Khabar: आठनेर में 35 सरपंचों ने भाजपा से मांगा आदिवासी मण्डल अध्यक्ष
Betul Ki Khabar: 35 sarpanches in Aathner asked BJP for tribal board president

जिला अध्यक्ष बबला शुक्ला को भेजी चिट्ठी, तर्क-आदिवासी अध्यक्ष बनेगा तो ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी भाषा में मतदाताओं को रिझाएंगे
Betul Ki Khabar: बैतूल। भाजपा संगठन चुनाव के तीसरे चरण में मण्डल अध्यक्षों के चुनाव होने हैं। बेहतर सिस्टम से चल रहे संगठन चुनाव के दौरान आठनेर क्षेत्र से आदिवासी समुदाय का मण्डल अध्यक्ष नियुक्त करने की मांग की गई है। खास बात यह है कि विकास खण्ड के करीब तीन दर्जन सरपंचों ने आवाज बुलंद की है। सरपंचों का मानना है कि यदि भाजपा, आठनेर विकास खण्ड में आदिवासी समाज से ताल्लुक रखने वाले जमीनी स्तर के नेता को मण्डल अध्यक्ष बनाती है तो क्षेत्र में भाजपा पहले से ज्यादा मजबूत होगी। सरपंचों ने इसके लिए बाकायदा जिला भाजपा अध्यक्ष को चिट्ठी लिखकर अपनी मंशा जाहिर कर दी है।

सरपंचों ने चिट्ठी में 35 सरपंचों ने किए एक साथ हस्ताक्षर
वैसे तो आठनेर क्षेत्र में समय समय पर भाजपा ने अपनी सफलता के झंडे गाढ़़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, लेकिन क्षेत्र की करीब 35 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने पार्टी के प्रति अपना समर्पण और निष्ठा जताते हुए आदिवासी समाज का मण्डल अध्यक्ष बनाये जाने की मांग की है। पार्टी को और ज्यादा मजबूती प्रदान करने की मंशा पाले सरपंचों के तर्क में दम भी नजर आ रहा है। क्योंकि क्षेत्र में आदिवासी समाज की संख्या औऱ दखल राजनीतिक मायनो में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। सरपंचों का कहना है कि आठनेर विकास खण्ड का अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने से यहां आदिवासी मतदाताओं की जन-संख्या भी अधिक है। यदि भाजपा मण्डल अध्यक्ष का पद किसी आदिवासी को सौंपती है तो इसका ज्यादा फायदा पार्टी को मिल सकता है।
इसके पीछे वजह भी बताई गई है कि अध्यक्ष आदिवासी समाज का ही होने की वजह से समाज के बीच आदिवासीयों की बोली भाषा एवं संस्कृति को समझने और समझाने में आसानी होगी। इन ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यकर्ता एवं सदस्यों की संख्या में जहां अप्रत्याशित इजाफा होगा तो वहीं आगामी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को इसका भरपूर फायदा भी मिल सकेगा । सभी सरपंच यह मांग करते हैं कि आठनेर क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी का मण्डल अध्यक्ष का पद आदिवासी को ही दिया जाए।

वोट प्रतिशत भी कम होने का दिया हवाला
वैसे राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सरपंचों के तर्क में काफी दम देखने को मिल रहा है। देखने मे आ रहा है कि आठनेर ग्रामीण मण्डल में विधानसभा चुनाव हो, लोकसभा चुनाव हो या फिर क्षेत्रीय चुनाव ग्रामीण क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी का वोट प्रतिशत बहुत ही कम होता है। यदि मण्डल अध्यक्ष आदिवासी रहेगा तो भारतीय जनता पार्टी को इसका फायदा कुछ इस तरह से मिलेगा की आदिवासी मण्डल अध्यक्ष आदिवासी परिवारों के बीच पहुंचकर काफी अच्छे तरी$के से अपनी बात रख सकेगा और वोट प्रतिशत में भी इजाफा होगा, क्योंकि आदिवासी समाज में ऐसे परिवारों की संख्या बहुतायत है जो सिर्फ समाज की ही बोली और भाषा समझते हैं। ऐसे में इन परिवारों को पार्टी की रीति नीति, शासकीय योजनाओं की जानकारियों से अवगत कराना काफी कठिन हो जाता है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मांग की जा रही है कि आठनेर मण्डल अध्यक्ष के पद पर आदिवासी समाज का योग्य उम्मीदवार तय करके उसे ग्रामीण मण्डल अध्यक्ष नियुक्त किया जाए।
सामान्य वर्ग से बनते आ रहे अध्यक्ष
बैतूल विधानसभा के अंतर्गत आने वाले आठनेर क्षेत्र में वैसे किसी भी पार्टी का एक तरफा दबदबा नहीं रहा। गत विस चुनाव में यहां से कांग्रेस को बढ़त मिल गई थी, लेकिन वर्ष 2023 के चुनाव में भाजपा ने कसर पूरी कर हिसाब बराबर कर लिया। यही वजह है कि यहां का मंडल अध्यक्ष काफी पावरफुल होता है। यदि आदिवासी अध्यक्ष पार्टी ने बनाया तो भी मुख्यालय का न होने के कारण भाजपा की परेशानी बढ़ जाएगी। यदि इतिहास को टटोला जाए तो पिछली बार बद्रीनाथ पंडाग्रे नगर और उर्मिला उइके ग्रामीण मंडल अध्यक्ष थी। उर्मिला आदिवासी वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रही थी। इसके पहले शिवदयाल आजाद और फिर सुभाष जायसवाल अध्यक्ष थे। लिहाजा इस बार 35 सरपंचों की मांग पर यदि संगठन ने मोहर लगाता है तो वर्तमान मंडल अध्यक्ष गोवर्धन राने और सुनील टेकपुरे की दूसरी बार ताजपोशी अटक सकती है। वैसे राने आठनेर के अब तक सबसे सफल मंडल अध्यक्ष कहे जाते हैं।




