Father’s Day Special: फादर्स डे विशेष: चार बेटियों के पिता थे, लेकिन भतीजे को बेटे से बढ़कर दिया स्नेह

बापू की सीख और संस्कारों ने बनाया ‘बापू की कचौरी’ को जिले का ब्रांड

Father’s Day Special: बैतूल। रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और संस्कारों से भी बनते हैं। फादर्स डे पर ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी स्वर्गीय सुरेशचंद्र झाम ‘बापू’ की है, जिन्होंने अपने भतीजे कुशकुंज अरोरा को कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वह उनके बेटे नहीं हैं। चार बेटियों के पिता होने के बावजूद बापू ने कुशकुंज को पुत्रवत स्नेह, मार्गदर्शन और संस्कार दिए। यही कारण है कि आज उनके दिखाए रास्ते पर चलते हुए ‘बापू की कचौरी’ बैतूल ही नहीं, पूरे जिले की पहचान बन चुकी है।

करीब 50 वर्ष पूर्व गंज क्षेत्र में सुरेशचंद्र झाम ने एक छोटी-सी होटल के रूप में पूजा स्वीट्स की शुरुआत की थी। इस सफर में उनके छोटे भाई नरेंद्र झाम ने भी कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। मेहनत, ईमानदारी और गुणवत्ता के दम पर पूजा स्वीट्स ने धीरे-धीरे शहर में अपनी अलग पहचान बना ली। लोगों के बीच यह नाम भरोसे और स्वाद का पर्याय बन गया।

उंगली पकड़कर सिखाया कारोबार का हर गुर

कुशकुंज अरोरा बताते हैं कि बड़े पापा सुरेशचंद्र झाम ने उन्हें हमेशा बेटे जैसा प्यार दिया। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने पिता नरेंद्र झाम और बड़े पापा के साथ व्यवसाय की बारीकियां सीखना शुरू किया। व्यापार में अनुशासन, ग्राहकों के प्रति सम्मान और गुणवत्ता से कभी समझौता न करने का पाठ उन्हें बापू ने ही सिखाया।

कुशकुंज कहते हैं कि बड़े पापा ने कभी यह अहसास नहीं होने दिया कि वे उनके भतीजे हैं। हर निर्णय में उनका मार्गदर्शन और स्नेह पिता की तरह मिला। यही कारण है कि आज भी उनकी सीख हर कदम पर प्रेरणा देती है।

प्रेरणा से जन्मा ‘बापू की कचौरी’ ब्रांड

बापू की प्रेरणा और आशीर्वाद से शुरू हुई ‘बापू की कचौरी’ आज जिलेभर में एक प्रतिष्ठित नाम बन चुकी है। स्वाद, शुद्धता और गुणवत्ता के कारण यह प्रतिष्ठान हर वर्ग की पसंद बन गया है। शासकीय कार्यक्रमों से लेकर निजी आयोजनों तक, बापू की कचौरी का स्वाद लोगों की पहली पसंद माना जाता है।

कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने यहां पहुंचकर नाश्ते की गुणवत्ता और स्वाद की सराहना की है। यही वजह है कि यह नाम आज बैतूल की पहचान का हिस्सा बन चुका है।

यादों में आज भी जीवित हैं बापू

वर्ष 2023 में लंबी बीमारी के बाद सुरेशचंद्र झाम का निधन हो गया, लेकिन उनके द्वारा स्थापित मूल्य, संस्कार और व्यवसायिक सिद्धांत आज भी इस प्रतिष्ठान की नींव बने हुए हैं। फादर्स डे पर कुशकुंज अरोरा अपने बड़े पापा को याद करते हुए कहते हैं कि उन्होंने केवल कारोबार ही नहीं सिखाया, बल्कि जीवन जीने का तरीका भी सिखाया।

उनके लिए बापू सिर्फ बड़े पापा नहीं, बल्कि पिता, मार्गदर्शक और प्रेरणा के सबसे मजबूत स्तंभ थे। यही कारण है कि बापू भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी पहचान, उनके संस्कार और उनका नाम हर दिन ‘बापू की कचौरी’ के साथ जीवंत है।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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