Betul Samachar: 5 बार 15 घंटे का परमिट, फिर भी अब तक 16 पोल ही हुए खड़े

कारगिल चौक-गाढ़ाघाट सडक़ निर्माण में अव्यवस्था, पोल-ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग और अतिक्रमण हटाने का काम अधूरा
Betul Samachar: बैतूल (सांझवीर टाईम्स)। शहर के कारगिल चौक से गाढ़ाघाट तक लगभग 7 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे सडक़ निर्माण कार्य को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निर्माण कार्य बिना समुचित योजना और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए आगे बढ़ाया जा रहा है।
कहीं सडक़ का निर्माण पूरा कर दिया गया है तो कहीं खुदाई कर क्षेत्र को अधूरा छोड़ दिया गया है। स्थिति यह है कि सडक़ निर्माण के साथ-साथ बिजली पोल, ट्रांसफार्मर और अतिक्रमण जैसी मूलभूत बाधाएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं।
पोल, ट्रांसफार्मर, शिफ्टिंग की रफ्तार बेहद धीमी
प्राप्त जानकारी के अनुसार सडक़ चौड़ीकरण और निर्माण कार्य के लिए बिजली पोल तथा ट्रांसफार्मरों की शिफ्टिंग का लगभग 90 लाख रुपए का ठेका भैसदेही की किसी निजी एजेंसी को दिया गया है। बिजली विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अब तक ठेकेदार को पांच बार कार्य के लिए परमिट जारी किए जा चुके हैं।
प्रत्येक परमिट के दौरान करीब तीन घंटे तक बिजली आपूर्ति बंद रखी गई, यानी कुल 15 घंटे का समय ठेकेदार को उपलब्ध कराया गया। इसके बावजूद अब तक केवल 16 नए पोल ही स्थापित किए जा सके हैं।भीषण गर्मी में कटौती का दंश आम नागरिकों को भुगतना पड़ा।
हालात ये हैं कि,मेघनाथ चौक से लेकर कारगिल चौक तक बड़ी संख्या में पुराने पोल और ट्रांसफार्मर अभी भी अपनी जगह पर खड़े हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि शेष कार्य कब और कैसे पूरा होगा। इस संबंध में न तो जिम्मेदार अधिकारियों के पास कोई स्पष्ट जवाब है और न ही ठेकेदार कार्य की समय-सीमा बता पा रहा है।
बह रही उल्टी गंगा,अतिक्रमण, पोल हटाए बिना शुरू कर दिया सडक़ का निर्माण
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि सडक़ निर्माण कार्य शुरू करने से पहले अतिक्रमण हटाना और बिजली ढांचे को स्थानांतरित करना आवश्यक था। लेकिन इन प्रक्रियाओं को पूरा किए बिना ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। कई स्थानों पर सडक़ की चौड़ाई भी एक समान नहीं दिखाई दे रही है, जिससे डीपीआर और निर्माण मानकों के पालन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
गुणवत्ता और निगरानी पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता संबंधी मानकों की अनदेखी की जा रही है। सडक़ निर्माण की प्रगति और गुणवत्ता की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नजर नहीं आ रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से बन रही इस महत्वपूर्ण सडक़ में यदि समय रहते पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की गई तो भविष्य में इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है। फिलहाल निर्माण कार्य की धीमी गति और अव्यवस्था को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
इनका कहना
इस सम्बंध में टाउन ऑफिस के अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी, कितने बार परमिट जारी हुआ है कितना काम किया गया है। यदि काम की रफ्तार धीमी है तो ठेकेदार को निर्देशित किया जाएगा।
एच एस बाथम, डीजीएम एसटीसी बैतूल
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