Politics: राजनीतिक हलचल: अखिर पर्ची से क्यों तय करना पड़ा अल्पसंख्यक नेता का नाम?? गाइडेड मिसाइल से कैसे हिली विपक्ष की बैठक ??? वार्ड की राजनीति या वार्ड से बाहर की बैठकी के क्या है मायने???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…..

पर्ची से तय हुआ अल्पसंख्यक नेता का नाम!
इन दिनों शहर की सियासत में एक दिलचस्प चर्चा गर्म है। चर्चा है कि एक विपक्षी पार्टी में अल्पसंख्यक नेता को पदाधिकारी बनाने को लेकर खूब माथापच्ची हुई। पहले तो एक दिग्गज नेता असलम भाई को आगे बढ़ाना चाहते थे, लेकिन अंदरखाने हफीज समर्थकों ने ऐसा दबाव बनाया कि मामला उलझ गया। फिर क्या था… नेताओं ने लोकतांत्रिक तरीका निकाल लिया। चर्चा है कि नब्बू, असलम और हफीज के नाम की पर्ची डाल दी गई।
किस्मत का खेल देखिए, पर्ची में नब्बू का नाम निकल आया और उनकी दावेदारी मजबूत हो गई। अब पार्टी के गलियारों में लोग मजे लेकर कह रहे हैं कि यहां राजनीति कम और लकी ड्रा ज्यादा चल रहा है। कुछ कार्यकर्ता इसे संगठन की मजबूरी बता रहे हैं, तो कुछ इसे अंदरूनी गुटबाजी का नया अध्याय मान रहे हैं। फिलहाल पर्ची वाली राजनीति शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
गाइडेड मिसाइल ने हिला दी विपक्ष की बैठक
विपक्षी दल की पिछले दिनों हुई बैठक अब राजनीतिक गलियारों में धमाकेदार मीटिंग के नाम से चर्चित हो गई है। वजह बने चिचोली के गांव वाले राजा नेता जी, जिन्होंने बैठक में ऐसे विस्फोट किए कि उनकी गूंज अब तक सुनाई दे रही है। अब पार्टी के भीतर खोजबीन शुरू हो गई है कि आखिर इस गाइडेड मिसाइल में बारूद भरा किसने? अंदरखाने से जो कहानी छनकर बाहर आ रही है, उसमें सबसे ज्यादा चर्चा बड़बोले नेता जी की हो रही है।
बताया जा रहा है कि बैठक के करीब तीन दिन पहले शहर के एक शोरूम में दोनों नेताओं की लंबी गुप्त बैठक हुई थी। वहीं पर राजनीतिक बारूद भरकर मिसाइल को लॉन्चिंग के लिए तैयार किया गया। राजनीतिक जानकार तो यहां तक कह रहे हैं कि बड़बोले नेता जी को पहले से ही विस्फोट की पूरी स्क्रिप्ट पता थी, तभी तो धमाके से ठीक पहले वे मीटिंग छोड़कर निकल गए। अब लोग मजे लेते हुए कह रहे हैं कि रिमोट कंट्रोल कहीं और था और लॉन्चिंग कहीं और से हुई। वैसे यह पहली बार नहीं है जब चिचोली वाले नेता जी ने अलग सुर छेड़े हों।
सृजन कार्यक्रम में भी उनकी दावेदारी के पीछे बड़बोले नेता जी का ही हाथ बताया जाता है। इससे पहले सारणी में सीएम घेराव के दौरान भी दोनों की जुगलबंदी अलग ही राग अलाप चुकी है। आखिर यह गाइडेड मिसाइल दागने की जरूरत क्यों पड़ी?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जिला प्रमुख और पूर्व मंत्री के बीच बढ़ती अंडरस्टैंडिंग ने कई नेताओं का राजनीतिक संतुलन बिगाड़ दिया है। कहा जा रहा है कि जैसे-जैसे दोनों खेमों की दूरियां घट रही हैं, वैसे-वैसे कुछ नेताओं की बेचैनी बढ़ती जा रही है। फिलहाल, विपक्ष की बैठक खत्म हो चुकी है, लेकिन बारूद मिसाइल और रिमोट कंट्रोल वाली चर्चाएं अभी भी चाय की टपरियों से लेकर पार्टी दफ्तरों तक खूब चटखारे लेकर सुनाई जा रही हैं।
वार्ड की राजनीति या वार्ड से बाहर की बैठकी
बैतूल शहर की सियासत में इन दिनों सत्तारूढ़ पार्टी के कुछ पार्षदों के कथित गठजोड़ की चर्चा जोर पकड़ रही है। राजनीतिक गलियारों में फुसफुसाहट है कि इस पूरे खेल में कुछ पार्षद पति भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, और मिलकर ऐसा तानाबाना बुना जा रहा है, जिसमें सही-गलत की परिभाषाएं भी सुविधानुसार तय की जा रही हैं।
कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि जिन वार्डों के लिए जनता ने इन्हें चुना, वहां की समस्याएं अब फाइलों में भी नजर नहीं आतीं, जबकि असली कामकाज एक ही ठिकाने पर बैठकर चल रहा है। लोगों की शिकायतें, नालियों की दिक्कतें और सड़क की दुर्दशा सब पृष्ठभूमि में चले गए हैं और चर्चा का केंद्र कुछ और ही बन गया है। शहर में यह भी कानाफूसी तेज है कि इन पार्षदों और उनके सहयोगी पार्षद पतियों की गतिविधियों का एक बड़ा खुलासा जल्द ही पार्टी के ही पावरफुल नेता के सामने हो सकता है।
अगर ऐसा हुआ तो राजनीतिक माहौल में बड़ा झटका लगना तय माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी के अंदरूनी सूत्र अब इस पूरे मामले पर नजर रखे हैं। वहीं आम कार्यकर्ता भी दबे स्वर में कह रहे हैं कि अगर सच सामने आया तो कुछ चेहरों के लिए जनता के बीच स्थिति संभालना मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल शहर में यह चर्चा गर्म है कि राजनीति वार्डों की सेवा के लिए है या फिर बैठकों और गठजोड़ों के नए समीकरण बनाने के लिए इसका जवाब आने वाले दिनों में खुद कहानी दे देगी।




