Forest Fire Portal : फॉरेस्ट फायर पोर्टल से जुड़े वन क्षेत्र के गांव, अब हर मोबाइल बनेगा जंगल का पहरेदार

ऑपरेशन जंगल बचाओ, एसएमएस सिस्टम हुआ एक्टिव

Forest Fire Portal : बैतूल। गर्मी का मौसम शुरू होते ही जंगलों में आग लगने का खतरा तेजी से बढ़ गया है और इसी खतरे को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। इस बार वन विभाग ने साफ कर दिया है कि जंगलों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अब आग लगने की सूचना सीधे ग्रामीणों के मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से पहुंचेगी। फॉरेस्ट फायर पोर्टल पर ग्रामीणों के मोबाइल नंबर दर्ज कर दिए हैं, ताकि आग लगते ही तत्काल सूचना मिल सके और समय रहते आग पर काबू पाया जा सके।

   मोहदा वन परिक्षेत्र में विगत दिनों आयोजित बैठक के जरिए वन विभाग ने साफ संदेश दिया था कि जंगलों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। यह ग्रामीणों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। आगामी फायर सीजन को देखते ग्राम पिपरिया स्थित वन चौकी में अग्नि सुरक्षा जागरूकता बैठक आयोजित की गई थी जिसमें ग्रामीणों को स्पष्ट रूप से बताया गया था कि जंगल में आग लगाना, महुआ के पेड़ों के नीचे आग जलाना, खेतों में नरवाई जलाना और अतिक्रमण का प्रयास करना सीधे-सीधे दंडनीय अपराध है। विभाग ने यह भी कहा कि इस बार फायर सीजन में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

– छह गांवों के ग्रामीणों को एक साथ दी थी चेतावनी

वन विभाग ने इस बार केवल एक गांव में बैठक करने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि छह गांवों के लोगों को एक साथ बुलाकर संयुक्त बैठक आयोजित की। ग्राम पिपरिया, जीरूढाना, बटकी, गुरूवा, पडार और कासमारखंडी के ग्रामीणों को एक ही मंच पर बैठाकर उन्हें फायर सीजन की गंभीरता समझाई गई। ग्रामीणों को बताया गया कि हर साल गर्मी के मौसम में छोटी-सी लापरवाही भी बड़े जंगल को आग के हवाले कर देती है और इसका नुकसान केवल पेड़ों तक सीमित नहीं रहता, वन्यजीव, पर्यावरण और ग्रामीणों की आजीविका भी प्रभावित होती है। बैठक में ग्रामीणों को यह भी समझाया गया था कि यदि समय रहते सूचना मिल जाए तो बड़ी आग को भी शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है।

– मोबाइल पर आएगा आग का अलर्ट, फॉरेस्ट फायर पोर्टल हुआ एक्टिव

इस बैठक की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि वन विभाग ने ग्रामीणों के मोबाइल नंबर फॉरेस्ट फायर पोर्टल पर दर्ज किए। अब जैसे ही जंगल के किसी हिस्से में आग लगने की सूचना मिलेगी या सैटेलाइट के माध्यम से आग का अलर्ट मिलेगा, वैसे ही संबंधित गांव के लोगों के मोबाइल पर तुरंत एसएमएस पहुंच जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि ग्रामीण खुद भी तुरंत सक्रिय हो जाएं और वन विभाग को सूचना देकर आग बुझाने में सहयोग करें।

विभाग का कहना है कि कई बार आग छोटी होती है, लेकिन सूचना देर से मिलने के कारण वह बड़ी आग में बदल जाती है। इसलिए इस बार सूचना व्यवस्था को सबसे मजबूत बनाया जा रहा है। यह पूरी मुहिम प्रधान मुख्य वन संरक्षक के मार्गदर्शन में चलाई जा रही है। उनके निर्देश पर पूरे वनमंडल में फायर सीजन से पहले जागरूकता अभियान शुरू किया गया और हर परिक्षेत्र में ग्रामीणों को सीधे जोड़ा जा रहा है। जंगलों की सुरक्षा के बिना पर्यावरण की रक्षा संभव नहीं है और यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो ही आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य मिल सकेगा।

– यह है जंगल में आग लगने के सबसे बड़े कारण

 जंगल में आग लगने के सबसे बड़े कारण महुआ के पेड़ों के नीचे आग जलाना और खेतों में नरवाई जलाना होते हैं। कई बार लोग जानबूझकर या लापरवाही से आग लगा देते हैं, जिसका नुकसान पूरे जंगल को उठाना पड़ता है। अधिकारियों ने कहा कि इस बार हर गांव में निगरानी बढ़ाई जाएगी और यदि किसी ने जानबूझकर आग लगाई तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

– वन सुरक्षा समितियों को भी दी गई जिम्मेदारी

वन विभाग ने केवल ग्रामीणों को चेतावनी देने तक ही बात सीमित नहीं रखी, वन सुरक्षा समितियों को भी जिम्मेदारी सौंपी है। बैठक में वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और सदस्य को बताया गया कि अब जंगल की सुरक्षा में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। यदि किसी क्षेत्र में आग लगती है तो सबसे पहले सूचना वन सुरक्षा समिति के माध्यम से ही वन विभाग तक पहुंचेगी। विभाग का कहना है कि जब तक गांव स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक जंगलों को पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया जा सकता।

जंगल रहेगा तो ही जीवन सुरक्षित रहेगा, विभाग की दो टूक चेतावनी

वन विभाग ने दो टूक शब्दों में कहा कि जंगल की सुरक्षा अब सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इस बार किसी भी तरह की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों को यह भी समझाया गया कि जंगल से ही बारिश, पानी, पर्यावरण और जीव-जंतु सुरक्षित रहते हैं। यदि जंगल -जल गया तो उसका नुकसान आने वाली कई पीढ़ियों को उठाना पड़ेगा। इसलिए इस बार फायर सीजन को देखते हुए वन विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है और अब ग्रामीणों से भी पूरी जिम्मेदारी निभाने की अपील की जा रही है।

गर्मी का मौसम जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ने की संभावना भी बढ़ेगी। इसी को देखते वन विभाग ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है और हर गांव पर नजर रखी जा रही है। इस बार वन विभाग किसी भी तरह की लापरवाही के मूड में नहीं है। अब यह देखना होगा कि जंगल बचाने की इस मुहिम में ग्रामीण कितनी जिम्मेदारी निभाते हैं और इस फायर सीजन में जंगलों को कितना सुरक्षित रखा जा सकता है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

Related Articles

Back to top button