Betul Ki Khabar: काला मोतियाबिंद के मरीजों में तेजी से इजाफा, बढ़ी चिंता

जिला अस्पताल में प्रतिदिन सामने आ रहे 4 से 5 मरीज
Betul Ki Khabar: बैतूल। आंखों की रोशनी के लिए गंभीर और स्थायी नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) जिले में तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन इस बीमारी के चार से पांच नए मरीज सामने आने लगे हैं, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को प्रभावित करती है और एक बार पूरी दृष्टि चली जाने के बाद उसे वापस लाना संभव नहीं होता।
विशेषज्ञों के अनुसार काला मोतियाबिंद को साइलेंट विजन किलर भी कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य रूप से महसूस नहीं होते। मरीज को तब तक बीमारी का पता नहीं चलता, जब तक आंखों की रोशनी काफी हद तक प्रभावित नहीं हो जाती। हालांकि समय रहते जांच और उपचार शुरू कर दिया जाए तो दृष्टि को पूरी तरह खत्म होने से बचाया जा सकता है।
काला मोतियाबिंद का यह है कारण
जिला अस्पताल बैतूल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शीतल मर्सकोले ने बताया कि प्रतिदिन आंखों की समस्याओं के उपचार के लिए लगभग 20 मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, जिनमें से तीन से चार मरीज काला मोतियाबिंद से प्रभावित पाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बीमारी का उपचार उपलब्ध है, लेकिन जिन मरीजों की आंखों की रोशनी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है, उसे दोबारा लौटाया नहीं जा सकता। प्रारंभिक अवस्था में उपचार से बीमारी की प्रगति को रोका जा सकता है।
क्या है काला मोतियाबिंद का कारण
डॉक्टरों के अनुसार काला मोतियाबिंद का मुख्य कारण आंखों के अंदर दबाव (आई प्रेशर) बढ़ना है। दबाव बढ़ने से आंखों की नसें धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिससे दृष्टि कमजोर होती जाती है। अनुवांशिक कारण भी इस बीमारी का बड़ा कारण है। यदि परिवार में किसी सदस्य को ग्लूकोमा है, तो अगली पीढ़ी में इसके होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा बढ़ती उम्र, मधुमेह, हृदय रोग, आंखों में चोट लगना तथा लंबे समय तक आंखों पर दबाव रहने जैसी स्थितियां भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ाती हैं।
समय पर जांच ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि काला मोतियाबिंद से बचाव के लिए नियमित आंखों की जांच बेहद जरूरी है। विशेष रूप से 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को समय-समय पर आंखों का परीक्षण कराना चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और आंखों को चोट से बचाना भी आवश्यक है। जिन परिवारों में यह बीमारी पहले से मौजूद है, उन्हें अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। डॉक्टरों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को कम दिखाई देना, आंखों में दबाव या दृष्टि में बदलाव महसूस हो तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर उपचार से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह दृष्टि समाप्त होने के बाद उसे वापस लाना संभव नहीं होता।
इनका कहना…
जिला अस्पताल में काला मोतियाबिंद के चार से पांच मरीज प्रतिदिन सामने आ रहे हैं। इस बीमारी से रोशनी जाने पर उसे वापस नहीं लाया जा सकता है। बीमारी को यथास्थिति में कंट्रोल किया जा सकता है।
डॉ विनोद बर्डे, नेत्र रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल बैतूल




