Betul Samachar: कलेक्टर के आदेश की निकली हवा

पहले ही दिन इक्का-दुक्का अधिकारी-कर्मचारी ही पहनकर आए हेलमेट
Betul Samachar: बैतूल (सांझवीर टाईम्स)। जिले में सडक़ सुरक्षा को लेकर प्रशासन द्वारा सख्ती के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत नजर आई। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देश के बावजूद पहले ही दिन अधिकतर शासकीय अधिकारी और कर्मचारी बिना हेलमेट के ही दफ्तर पहुंचते दिखाई दिए। केवल इक्का-दुक्का अधिकारी-कर्मचारी ही हेलमेट पहनकर कार्यालय पहुंचे।
दरअसल, सडक़ दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को रोकने के उद्देश्य से कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने हाल ही में एक अहम निर्देश जारी किया था। इस निर्देश के अनुसार 15 मार्च से जिले के सभी शासकीय अधिकारी और कर्मचारियों के लिए दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य किया गया था। वहीं चार पहिया वाहन चलाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सीट बेल्ट लगाना भी जरूरी किया गया था।
प्रशासन की मंशा थी कि जब सरकारी अधिकारी और कर्मचारी खुद सडक़ सुरक्षा नियमों का पालन करेंगे, तो आम नागरिकों को भी इसके लिए प्रेरणा मिलेगी। लेकिन आदेश लागू होने के पहले ही दिन यह पहल कागजों तक ही सीमित नजर आई। सोमवार को कई सरकारी दफ्तरों में यह देखा गया कि अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी बिना हेलमेट के ही बाइक चलाकर कार्यालय पहुंचे। कार्यालय परिसरों में खड़ी दोपहिया वाहनों के पास भी बहुत कम लोगों के पास हेलमेट नजर आए।
हालांकि कुछ अधिकारी और कर्मचारी ऐसे भी थे जिन्होंने कलेक्टर के निर्देशों का पालन करते हुए हेलमेट पहनकर ही कार्यालय आना बेहतर समझा। लेकिन उनकी संख्या बेहद कम रही। इससे साफ है कि आदेश के प्रति गंभीरता अभी अधिकारियों और कर्मचारियों में दिखाई नहीं दे रही है।
पीछे 9 मार्च को हुई थी बैठक
जानकारी के अनुसार 9 मार्च को कलेक्ट्रेट में आयोजित सडक़ सुरक्षा संबंधी बैठक में कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने सभी जिला अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे अपने-अपने विभागों और कार्यालयों में इस आदेश का सख्ती से पालन कराएं। उन्होंने कहा था कि सभी अधिकारी और कर्मचारी दोपहिया वाहन चलाते समय अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनें और चार पहिया वाहन चलाने वाले सीट बेल्ट लगाएं।
कलेक्टर ने यह भी कहा था कि अधिकारी-कर्मचारी केवल खुद ही नियमों का पालन न करें, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों और आम नागरिकों को भी सडक़ सुरक्षा के प्रति जागरूक करें। उन्होंने विशेष रूप से कहा था कि सडक़ दुर्घटनाओं को कम करने के लिए हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग बेहद जरूरी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
इसके बावजूद आदेश लागू होने के पहले ही दिन जिस तरह से अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी बिना हेलमेट के कार्यालय पहुंचे, उसने प्रशासन की सख्ती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों का कहना है कि जब खुद सरकारी कर्मचारी ही नियमों का पालन नहीं करेंगे, तो आम जनता से नियमों का पालन कराने की उम्मीद करना मुश्किल हो जाएगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और आगे इस आदेश के पालन को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं। यदि नियमों का सख्ती से पालन कराया गया, तो निश्चित ही सडक़ सुरक्षा को लेकर जिले में सकारात्मक संदेश जाएगा। वहीं यदि इसी तरह लापरवाही जारी रही, तो यह आदेश केवल औपचारिकता बनकर ही रह जाएगा।
इनका कहना है….
आज पहला दिन है इसलिए कार्रवाई नही की। अगर कोई अधिकारी और कर्मचारी हेलमेट नही लगाकर नही आये तो चालानी कार्रवाई करेंगे।
गजेंद्र केन
यातयात प्रभारी बैतूल




