Politics : राजनीतिक हलचल: लोकल मुद्दों पर कौनसे पार्टी प्रमुख अपनों से ही घिर रहे?? किस नेता को सार्वजनिक कार्यक्रम में मुंह की कहना पड़ा??? पार्टी मै आने के लिए कौन सा नेता हाथ-पैर मारने में लगा???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……

लोकल मुद्दोंं से कन्नी काटने से घिर रहे पार्टी प्रमुख
एक विपक्षी पार्टी के जिला प्रमुख अपनी कार्यप्रणाली को लेकर फिर सुर्खियों में है। उनका राजनैतिक पैटर्न समर्थक ही नहीं समझ पा रहे हैं। स्थानीय मुद्दों पर वे जिस तरह से कन्नी काट रहे हैं, उनके रणनीतिकार भी नाखुश है। चर्चा है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों और टोलर के मुद्दों पर वे कैंपन चलाकर वे समझ रहे हैं कि पब्लिक अपने आप विरोध में आ जाएगी और उन्हें सड़क पर उतरकर विरोध करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्हें सत्ता के खिलाफ संघर्ष करने की अपनी ही पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ मोर्चोबंदी में ज्यादा राजनीति करने में आनंद की अनुभूति होती है। दूसरी तरफ उनके घर के पास ही बैठा बिठाया मुद्दा हाथ से छिटक गया और पार्टी के दूसरे नेताओं से जमकर विरोध किया तो सरकारी नुमाइंदों को बैकफुट पर आना पड़ा।
मुंह की खानी पड़ी नेताजी को
कुछ दिनों पहले शहर से लगभग 12 किमी दूर पर्यटन केंद्र का शुभारंभ सुर्खियां बटोर रहा है। इस कार्यक्रम में सत्ता पक्ष के दिग्गज नेता मौजूद रहे। इस दौरान एक दलालनुमा नेता भी पहुुंचे। वे सहयोगवश उस टेबल पर बैठ गए, जहां पर माननीय बैठे थे। चर्चा है कि एक माननीय ने यह नजारा देख तपाक से कह दिया कि आप थोड़ा दूसरों को भी मौका दीजिए, आप तो कभी भी आ ही जाते तो।
यह बात सुनकर नेताजी दूसरी टेबल पर चले गए। बात यही पर खत्म नहीं हुई। कार्यक्रम से जाते समय फिर अपना प्रभाव दिखाने के लिए एक माननीय को किसी मामले में मंत्री जी को बोल देने और अपने पीए को बताने के लिए कहा गया। यह सुनकर माननीय तो कुछ बोल नहीं, लेकिन उनके चेहरे पर उनकी नाराजगी आसानी से देखी जा सकती थी।
पार्टी में वापसी के लिए बुन रहे ताने
एक सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र के भारी भरकम और डीलडॉल कहे जाने वाले नेताजी पार्टी से निकालने जाने के बाद वापसी के लिए जमकर ताने-बाने बुन रहे हैं। इसके लिए वे क्षेत्रीय माननीय को मनाने के लिए खूब दौड़ धूप कर रहे हैं, लेकिन उनकी दाल नहीं गल रही है। चूंकि पार्टी में वापसी का मामला सीधे प्रादेशिक स्तर पर होगा, इसलिए माननीय ने भी उन्हें दो टूक शब्द में इंकार कर दिया है।
प्रदेश नेतृत्व शायद ही इस नेता को पार्टी में वापस ले, क्योंकि जिस मामले में नेताजी को आरोपी बनकर जेल जाने की नौबत आ गई थी। हालांकि वे अपनी जमानत कराने में कामयाब रहे, लेकिन जिस समाज के नेता को प्रताड़ित करने के आरोप लगे थे, वे बहुसंख्यक है, इसलिए पार्टी आने वाले निकाय और दो वर्ष बाद आने वाले विस चुनाव के पूर्व जोखिम नहीं लेना चाहती है, इसलिए भारी भरकम नेता की पार्टी में वापसी की आस फिलहाल अधूरी दिखाईदे रही है।




