Betul News: आजीविका प्लाजा की नीलामी फ्लॉप, जिला पंचायत की नीति से निवेशक निराश

कीमत अधिक होने से नीलामी में बड़ी बाधा, दोबारा तय करना पड़ेगा नई तारीख

Betul News: बैतूल। कोठीबाजार बस स्टैंड के समीप स्थित जिले के सबसे व्यस्ततम व्यावसायिक क्षेत्र में जिला पंचायत द्वारा निर्मित आजीविका प्लाजा की 21 दुकानों की नीलामी फिलहाल अधर में लटक गई है। 30 जनवरी को प्रस्तावित नीलामी अपेक्षित बोली प्रस्ताव नहीं मिलने के कारण निरस्त कर दी गई। व्यापारियों और निवेशकों के मुताबिक इस असफल नीलामी ने जिला पंचायत की नीति, बेस प्राइज निर्धारण और आरक्षण व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दुकानों की नीलामी ही 20, 25, 32 और 39 लाख रूपयों से शुरू होना है। ऐसे में इतनी ज्यादा बेस प्राइज पर बोली लगना असम्भव प्रतीत हो रहा है। इधर जिला पंचायत ने भी नीलामी को लेकर सोच विचार शुरू कर दिया है। स्थिति को समझकर प्रक्रिया तय करने के बाद नीलामी की तारीख तय की जाएगी।

21 दुकानों की नीलामी रद्द, निवेशकों ने बनाई दूरी

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला पंचायत द्वारा आजीविका प्लाजा में निर्मित 21 दुकानों की नीलामी प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी की गई थी, लेकिन बोली के अनुरूप प्रस्ताव सामने नहीं आए। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने पुष्टि की है कि अपेक्षित बोली नहीं मिलने के कारण नीलामी को रद्द किया गया है और आने वाले समय में पुन: नीलामी की जाएगी।

बेस प्राइज बनी सबसे बड़ी अड़चन

नीलामी को लेकर आम नागरिकों और व्यापारियों में चर्चा है कि दुकानों की बेस प्राइज अत्यधिक रखी गई है। व्यापारियों का कहना है कि दुकानों की बोली 20 लाख रुपये से शुरू होनी थी, जबकि कुछ दुकानों की बेस प्राइज ही 25 लाख से 33 और 39 लाख रुपये तक तय की गई है। इतनी ऊँची शुरुआती कीमत पर बोली लगाना छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए कहीं से कहीं तक संभव नहीं है। नीलामी के साथ-साथ जिला पंचायत द्वारा दुकानों पर मासिक किराया वसूलने का भी प्रावधान रखा गया है। व्यापारियों के अनुसार यह किराया भी मामूली नहीं बल्कि हजारों रुपये प्रतिमाह तय किया गया है। ऐसे में दुकान खरीदने के बाद व्यापार से होने वाला लाभ संदेह के घेरे में आ जाता है। कई व्यापारियों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि दुकान में लगाने की बजाय बैंक में जमा करने पर ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी रिटर्न मिल सकता है।

आरक्षण व्यवस्था भी बनी बाधा

व्यापारियों का मानना है कि 21 दुकानों में से 11 दुकानें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित की गई हैं। इसके अलावा सामान्य वर्ग के लिए 2, ओबीसी के लिए 3, अनुसूचित जाति के लिए 2, शिक्षित बेरोजगार के लिए 1 और विधवा/परित्यक्ता के लिए 2 दुकानें आरक्षित हैं। खास बात यह है कि विधवा और परित्यक्ता वर्ग के लिए आरक्षित दुकानों की बेस प्राइज क्रमश: 32 लाख और 39 लाख रुपये तय की गई है, जबकि शिक्षित बेरोजगार वर्ग के लिए भी 32 लाख रुपये की बेस प्राइज रखी गई है। इतने महंगे मूल्य पर इन वर्गों द्वारा दुकान खरीद पाना लगभग नामुमकिन नजर आ रहा है।

नागरिकों का कहना है कि यदि जिला पंचायत वास्तव में 100 प्रतिशत नीलामी की मंशा रखती है तो बेस प्राइज में कटौती करना जरूरी होगा। साथ ही आरक्षित वर्गों की आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए विशेष रियायत या अलग मॉडल तैयार किया जाना चाहिए। व्यापारियों ने सुझाव दिया है कि जिला पंचायत को इस विषय में उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर नीति में संशोधन करना चाहिए, ताकि खरीदारों को राहत मिले और नीलामी सफल हो सके।

यदि वर्तमान शर्तों और बेस प्राइज के साथ दोबारा नीलामी की गई तो भी अपेक्षित सफलता मिलने की संभावना कम ही नजर आ रही है। ऐसी स्थिति में करोड़ों की लागत से बनी ये दुकानें वर्षों तक खाली पड़ी रह सकती हैं, जिससे न तो जिला पंचायत को राजस्व मिलेगा और न ही आजीविका सृजन का उद्देश्य पूरा हो पाएगा।

इनका कहना….

अपेक्षाकृत प्रस्ताव नहीं मिलने से नीलामी स्थगित की गई है, प्रचार प्रसार के बाद पुन: नीलामी कराई जाएगी।

अक्षत जैन सीईओ, जिला पंचायत बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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