Betul News: कचरा शुल्क में भारी वृद्धि, कांग्रेस का मौन धारण भी समझ से परे

छोटे-छोटे मामलों पर राजनीति करने वाली कांग्रेस जनता के जेब पर बोझ डल गया और हो गई चुप
Betul News: बैतूल। नगर पालिका परिषद बैतूल द्वारा हाल ही में शहर में कचरा संग्रहण शुल्क में की गई भारी वृद्धि ने आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। यह निर्णय सीधे तौर पर जनता की जेब पर असर डालने वाला है, बावजूद इसके इस गंभीर और जनहित से जुड़े मुद्दे पर कांग्रेस की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। विपक्ष की भूमिका निभाने का दावा करने वाली कांग्रेस न तो सड़क पर उतरी, न धरना-प्रदर्शन किया और न ही औपचारिक रूप से कोई ज्ञापन सौंपा।
भाजपा के गढ़ माने जाने वाले बैतूल जिले की पांचों विधानसभाओं में भाजपा के विधायक हैं। कांग्रेस संगठन में हालिया नियुक्तियों के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि पार्टी स्थानीय स्तर पर अधिक सक्रिय और आक्रामक नजर आएगी। बीते कुछ समय में कांग्रेस ने मेडिकल कॉलेज जैसे मुद्दों और व्यक्तिगत हमलों के जरिए जरूर सुर्खियां बटोरीं, लेकिन जब बात सीधे आम जनता से जुड़े कचरा शुल्क की आई, तो पार्टी का रवैया पूरी तरह उदासीन दिखा नगर पालिका द्वारा लागू किए गए नए शुल्क को लेकर शहर में असंतोष का माहौल है। मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के नागरिकों का कहना है कि पहले से महंगाई की मार झेल रहे लोगों पर यह अतिरिक्त शुल्क अन्यायपूर्ण है। ऐसे संवेदनशील मामले में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की चुप्पी ने आम नागरिकों को निराश किया है।
सोशल मीडिया पर भी नदारद नेता
सोशल मीडिया पर जरूर कुछ इक्का-दुक्का कांग्रेसी नेताओं की पोस्ट देखने को मिलीं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस विरोध सामने नहीं आया। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि कांग्रेस का विरोध अब केवल औपचारिकता और व्यक्तिगत हमलों तक सीमित रह गया है। छोटे-मोटे मुद्दों पर सड़कों पर उतरने वाली कांग्रेस इस बार नदारद रही, जिससे यह संदेश गया कि पार्टी की राजनीति अवसरवादी बनती जा रही है। आम लोगों का मानना है कि चुनाव के समय जनता से समर्थन की अपेक्षा रखने वाली कांग्रेस को ऐसे जनसरोकार के मुद्दों पर सबसे पहले खड़ा होना चाहिए था।
विशेषज्ञों का कहना है कि विपक्ष की मजबूती केवल बड़े राष्ट्रीय या प्रदेश स्तरीय मुद्दों पर प्रदर्शन से नहीं, बल्कि स्थानीय जनसमस्याओं पर सक्रिय हस्तक्षेप से तय होती है। कचरा संग्रहण शुल्क जैसे मुद्दे पर कांग्रेस की निष्क्रियता ने पार्टी की स्थानीय राजनीति और भविष्य की रणनीति पर सवालिया निशान लगा दिया है। जनता अब यह पूछने लगी है कि क्या कांग्रेस वास्तव में उनके मुद्दों की आवाज बनेगी या फिर विरोध केवल दिखावे तक ही सीमित रहेगा।
लोगों के सवाल, पूछ रहे- कहा है हमारा विपक्ष
छोटे-छोटे मामलों पर कांग्रेस के नेता सोशल मीडिया पर हल्ला बोलने से नहीं चुकते हैं। अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए केवल मुद्दें की तलाश में रहते हैं, लेकिन शहर की लगभग सवा लाख आबादी पर नगर सरकार ने सीधे बोझ डाल दिया। कचरा शुल्क 20 से बढ़ाकर सीधे 100 रुपए प्रतिमाह कर गरीब लोगों पर दुबले पर दो अषाढ़ वाली कहावत को चरितार्थ कर दी।
व्यवसायिक शुल्क 150 से बढ़ाकर 1 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया हैं। इसके अलावा सेफ्टिक टैंक सफाई 2 हजार के स्थान पर 3 हजार रुपए कर दिया है। इस महत्वपूर्ण मामले में कांग्रेस ने कोई विरोध प्रदर्शन किया और न कोई विज्ञप्ति जारी की। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जनहित के मुद्दें पर कांग्रेस की राजनीति केवल दिखावे वाली रह गई है।




