Betul Samachar: फार्मर आईडी नहीं बनने से अटका ई-टोकन सिस्टम

आगामी माह से ई-टोकन के माध्यम से मिलेगा किसानों को खाद
Betul Samachar: बैतूल। जिले में रबी फसल के बीच रासायनिक खाद वितरण के लिए लागू की जा रही ई-टोकन व्यवस्था किसानों के लिए राहत बनने के बजाय परेशानी का कारण बनती नजर आ रही है। खाद प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन ई-टोकन को अनिवार्य किए जाने से किसान निजी कार्य छोड़कर कियोस्क सेंटरों और दुकानों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। हालांकि वर्तमान में राहत की बात यह है कि किसानों को फिलहाल ई-टोकन और बिना ई-टोकन-दोनों व्यवस्थाओं के तहत खाद उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन आगामी दिनों में बिना ई-टोकन खाद वितरण पूरी तरह बंद किया जा सकता है।
जिले में बड़ी संख्या में किसानों की फार्मर आईडी अभी तक नहीं बन पाई है। बिना फार्मर आईडी के किसान ई-टोकन सिस्टम का लाभ नहीं ले सकेंगे। ऐसे में सबसे पहले किसानों को अपनी फार्मर आईडी बनवाना अनिवार्य होगा। जानकारी के अनुसार जिले में कुल 2 लाख 92 हजार किसानों की फार्मर आईडी बनाई जानी है, जिनमें से अभी बड़ी संख्या शेष है। विशेष रूप से दूरस्थ और दुर्गम अंचलों में रहने वाले आदिवासी किसानों को फार्मर आईडी बनवाने में अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इन क्षेत्रों में कई किसानों के पास मोबाइल फोन नहीं हैं, जिससे ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया उनके लिए चुनौती बन गई है। तकनीकी जानकारी के अभाव और संसाधनों की कमी के कारण किसान समय पर पंजीयन नहीं करा पा रहे हैं। परिणामस्वरूप ई-टोकन व्यवस्था लागू होने पर उन्हें खाद के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रचार-प्रसार की कमी बनी बड़ी समस्या
फार्मर आईडी निर्माण को लेकर संबंधित विभागों द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं किया जा रहा है। आज भी बड़ी संख्या में ग्रामीण किसान फार्मर आईडी और ई-टोकन व्यवस्था से अनजान हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि खाद लेने पहुंच रहे अधिकांश किसान बिना ई-टोकन के ही आ रहे हैं। यदि समय रहते किसानों को जागरूक नहीं किया गया, तो ई-टोकन अनिवार्य होने के बाद हालात और गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में किसानों को दर-दर भटकना पड़ सकता है।
तीन तरीकों से बन रही फार्मर आईडी
जानकारी के अनुसार जिले में फार्मर आईडी तीन माध्यमों से बनाई जा रही है। पहला तरीका पटवारी के माध्यम से है, दूसरा सर्वे प्रक्रिया के तहत और तीसरा सीएसी (कॉमन सर्विस सेंटर) के माध्यम से। बावजूद इसके, आईडी निर्माण की रफ्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। जब तक फार्मर आईडी नहीं बनेगी, तब तक किसान ई-टोकन नहीं ले सकेगा और भविष्य में खाद वितरण से वंचित हो सकता है। इसके अलावा यह भी जानकारी सामने आई है कि जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनेगी, वे पीएम किसान सम्मान निधि जैसी महत्वपूर्ण योजना के लाभ से भी वंचित रह सकते हैं। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
इनका कहना…
जिन किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि मिल रही है उन किसानों की 102 प्रतिशत फार्मर आईडी बन गई है और भू-धारी किसानों की 31 प्रतिशत ही आईडी बन पाई है। फार्मर आइ्रडी बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है।
निता पटेल
डिप्टी कलेक्टर, बैतूल




