Betul Mandi News: Video: मंडी में किसान का खुला आरोप: कम दाम पर खरीदी उपज

दाम बढ़ाने की व्यापारी से की मांग तो उपज खरीदने से इंकार
Betul Mandi News: बैतूल। कृषि उपज मंडी में व्यापारियों की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है और किसान बेबस होकर इस अन्याय को सहने को मजबूर हैं। आए दिन किसानों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और कम दाम में उपज खरीदी की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद मंडी प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। मंगलवार को मंडी में पहुंचे एक किसान ने खुलकर व्यापारियों पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे एक बार फिर मंडी की बदहाल व्यवस्था उजागर हो गई है।
बडोरा निवासी किसान सुरेश गीदकर मंगलवार को करीब 40 क्विंटल मक्का लेकर कृषि उपज मंडी पहुंचे थे। किसान के अनुसार जब मक्का की बोली शुरू हुई तो व्यापारियों ने जानबूझकर बेहद कम दाम लगाए। जब किसान ने इसका विरोध किया और उचित दाम की मांग की तो व्यापारियों ने उपज खरीदने से ही इनकार कर दिया। इससे किसान को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
किसान सुरेश गीदकर ने आरोप लगाया कि मंडी में किसानों के साथ दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। बड़े और छोटे व्यापारियों के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। यदि कोई छोटा व्यापारी उपज लेकर मंडी पहुंचता है तो उसे अच्छे दाम मिल जाते हैं, लेकिन वही उपज जब किसान सीधे लेकर आता है तो उसे कम दाम बताकर खरीदी से बचा जाता है। यह सीधा-सीधा किसानों के साथ अन्याय और शोषण है।
किसान का आरोप: औने-पौने दाम में खरीद रहे उपज
किसान का यह भी कहना है कि व्यापारियों ने उनकी मक्का की उपज में नमी होने का बहाना बनाया। जब किसान ने नमी की जांच करने की मांग की तो व्यापारी चुप्पी साधकर आगे बढ़ गए। किसान का आरोप है कि व्यापारी केवल अंदाज से ही उपज में नमी होने की बात कह देते हैं और इसी बहाने किसानों से औने-पौने दामों में उपज खरीदते हैं। मंडी में नमी जांचने के लिए कोई ठोस और पारदर्शी व्यवस्था नहीं है। व्यापारियों के पास न तो नमी मापने की कोई मशीन है और न ही कोई प्रमाणिक तरीका, फिर भी वे मनमर्जी से किसानों की उपज को नमी वाली बताकर दाम गिरा देते हैं।
इसके पहले भी सामने आए मामले
यह कोई पहला मामला नहीं है। मंडी में लंबे समय से इस तरह की शिकायतें आती रही हैं। किसानों ने कई बार मंडी प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन हर बार शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया। हालात यह हैं कि प्रभारी मंत्री से लेकर कलेक्टर तक मंडी का निरीक्षण कर चुके हैं, बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है। न तो व्यापारियों पर कोई सख्त कार्रवाई हुई और न ही किसानों को राहत मिली।
मंडी प्रशासन की लापरवाही और उदासीनता के चलते व्यापारी बेखौफ होकर किसानों का शोषण कर रहे हैं। यदि यही हाल रहा तो किसानों का मंडी व्यवस्था से भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा। जरूरत है कि प्रशासन तुरंत सख्त कदम उठाए, नमी जांच की पारदर्शी व्यवस्था लागू करे, व्यापारियों की मनमानी पर लगाम लगाए और किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम दिलाए। वरना यह साफ है कि मंडी किसानों के लिए नहीं, बल्कि व्यापारियों की मनमानी का अड्डा बनकर रह जाएगी।




