Betul Ki Khabar: लो साहब ! हमारा बैतूल स्वच्छता रैकिंग में पिछड़ गया है

Betul Ki Khabar: Look Sir! Our Betul has fallen behind in cleanliness ranking

घटिया प्लानिंग और स्वच्छता निरीक्षकों के मैनेजमेंट ने लुटियां डुबोई, देश में 67वें और प्रदेश में 80वें स्थान पर रहा बैतूल

Betul Ki Khabar: बैतूल। आखिर जिस की संभावना थी, वही हुआ। गुरूवार को स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 के घोषित नतीजे में बैतूल नगर पालिका की रैकिंग बीते वर्षों की अपेक्षा काफी पिछड़ गई। पिछले वर्ष की रैकिंग को भी बैतूल नपा छू नहीं पाई। 50 हजार से 3 लाख जनसंख्या वाले निकायों की रैकिंग में हमारी बैतूल नपा 67वें और प्रदेश में 80वें स्थान पर रहा है। यह रैकिंग बैतूल नपा के दोनों स्वच्छता निरीक्षकों के मुंह पर करारा तमाचा कहा जा सकता है। घटिया मैनेजमेंट और अधीनस्थों पर नियंत्रण नहीं होने से इस रैकिंग में पिछड़ने की संभावना पहले से ही दिखाई दे रही थी।

बैतूल नगर पालिका में पिछले लंबे समय से दो स्वच्छता निरीक्षक संतोष धनेलिया और राजेश सोनी पदस्थ है। दो निरीक्षकों के होने के बावजूद नपा की स्वच्छता शाखा के हालात ऑउट ऑफ कंट्रोल जैसे है। इसकी शिकायत पूर्व में सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्षी पार्षद भी कर चुके है, लेकिन नतीजा सिफर निकला। शहर की सफाई व्यवस्था किसी से छुपी नहीं है, जबकि सर्वेक्षण की टीम के बैतूल आने के समय जिस तरह बैतूल की छवि नेगेटिव हो गई, इससे भी वर्तमान रैकिंग को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। इसके लिए कहीं ना कहीं दोनों स्वच्छता निरीक्षक राजेश सोनी और संतोष धनेलिया की बड़ी लापरवाही और चूक को जिम्मेदार माना जा रहा है।

पिछले वर्ष से भी पिछड़ा बैतूल

गुरूवार को घोषित स्वच्छता रैकिंग में बैतूल नगर पालिका पिछले दो वर्षों की रैकिंग से भी पिछड़ कर रह गई। दरअसल वर्ष 2023 की रैकिंग में बैतूल नगर पालिका राष्ट्रीय स्तर पर 55 वें और प्रदेश स्तर पर 17वें स्थान पर रही थी। वर्ष 2022 की रैकिंग में यह रैकिंग राष्ट्रीय स्तर पर 41वें और प्रदेश स्तर पर 14वें उच्चतम पायदान पर पहुंच गई थी, लेकिन वर्ष 2024 के गुरूवार को आए परिणामों में यह रैकिंग फिसलकर 67 वें और 80वें स्थान पर पहुंच गई है।

50 हजार से 1 लाख की आबादी वाले शहर में कई छोटी नगर पालिका बैतूल से आगे निकल गई है। इससे जिला मुख्यालय की नगर पालिका शर्मशार होते दिखाई दे रही है। जिले की अन्य नगर पालिकाओं की भी रैकिंग बैतूल से अच्छी आने के कारण यहां की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठना लाजिमी है। बैतूल नगर पालिका को 12 हजार 500 में से कुल 9 हजार 615 स्कोर मिल पाया है, जबकि जीएफसी 1300 में से महज 500 और ओडीएफ में 1200 में 1000 अंक ही मिल पाए है।

रैकिंग पिछड़ी तो यह दे रहे तर्क

बैतूल नगर पालिका की रैकिंग इस बार पिछड़ा तय था यह बात अधिकांश मीडिया और पार्षद भी कह रहे थे। परिणाम आने के बाद यह बात अक्षरश: सहीं साबित हो गई। परिणाम आने के बाद नपा के स्वच्छता शाखा के जिम्मेदार तर्क दे रहे है कि विगत 3 वर्षों से स्वच्छ सर्वेक्षण के मापदंडों के अनुसार शहर में केवल सफाई नहीं देखी जा रही बल्कि समस्त मापदंड जैसे अच्छी सड़के, कवर्ड नाली, अच्छे फूटपाथ, चौराहों के फव्वारे, स्वच्छ नाले, हरियाली, सर्वसुविधायुक्त सार्वजनिक शौचालय, सार्वजनिक स्थलों की सफाई, कचरा संग्रहण आदि देखे जा रहे है। इन्हीं मापदंडों के अनुसार शहर को रैकिंग दी जा रही है। हालाकि जो तर्क स्वच्छता शाखा के जिम्मेदार दे रहे है कुछ को छोड़ अधिकांश जिम्मेदारी उनके ही विभाग की थी, इसीलिए दूसरों पर ठीकरा फोड़ जिम्मेदारी से बचा जा रहा है।

इनका कहना…

इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रतिस्पर्धा ज्यादा थी। साफ सफाई के अलावा सड़के, फूटपाथ समेत अन्य व्यवस्थाओं पर भी अंक निधारित किए गए थे। हमने हमारी ओर से बेहतर प्रयास किए है, लेकिन पिछड़ गई है।

संतोष धनेलिया

स्वच्छता निरीक्षक, नपा बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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