Betul News: पंचायतों के बिल अब दूसरे जिलों की ट्रेजरी से होंगे पास

पारदर्शिता बढ़ाने भुगतान प्रक्रिया में केंद्र सरकार का बड़ा बदलाव
Betul News: बैतूल। पंचायतों के भुगतान कार्य में पारदर्शिता लाने और वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना के अंतर्गत भुगतान प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब पंचायतों के बिल उसी जिले की ट्रेजरी से पास नहीं होंगे, बल्कि दूसरे जिलों की ट्रेजरी से स्वीकृत किए जाएंगे। यह नई प्रक्रिया बैतूल जिले में भी लागू कर दी गई है और इसका क्रियान्वयन शुरू हो चुका है।
अब तक पंचायतों द्वारा कराए गए कार्यों और सामग्री खरीदी के बिल संबंधित जिले की ट्रेजरी से ही पास किए जाते थे। इससे मिलीभगत और भ्रष्टाचार की संभावनाएं बनी रहती थीं। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने मनरेगा (बीजी रामजी योजना) के अंतर्गत भुगतान प्रणाली में यह बदलाव किया है। इसके तहत जिले की पंचायतों के बिल दूसरे जिले की ट्रेजरी से पास होंगे। जानकारी के अनुसार वर्तमान में बैतूल जिले की पंचायतों के बिल अशोकनगर जिले की ट्रेजरी से पास किए जा रहे हैं, जबकि बैतूल जिले की ट्रेजरी से आगर मालवा जिले की पंचायतों के बिलों का भुगतान किया जा रहा है। यह व्यवस्था स्थायी नहीं होगी, बल्कि प्रत्येक माह ट्रेजरी का बदलाव किया जाएगा। किसी भी जिले की ट्रेजरी लंबे समय तक एक ही जिले के बिल पास नहीं करेगी। हर माह जिले बदलने से पारदर्शिता और निगरानी और मजबूत होगी।
ट्रेजरी स्तर पर होगी सख्त जांच
नई प्रणाली के तहत मनरेगा के अंतर्गत सामग्री और कार्य भुगतान के बिलों की जांच पहले से कहीं अधिक सख्त कर दी गई है। कार्य पूर्ण होने के बाद पंचायत द्वारा बिल तैयार किया जाएगा। तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया पूर्ववत रहेगी। इसके बाद बिल को संबंधित जिले की बजाय दूसरे जिले की ट्रेजरी को भेजा जाएगा। ट्रेजरी स्तर पर बिल की गहन जांच की जाएगी। इसमें सभी आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि, डीडीओ के डिजिटल हस्ताक्षर, तकनीकी स्वीकृति, जीएसटी विवरण तथा अन्य औपचारिकताओं की जांच के बाद ही भुगतान किया जाएगा। यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो भुगतान रोका जा सकेगा।
60-40 के अनुपात में होगा खर्च
मनरेगा योजना के तहत कुल व्यय का 60 प्रतिशत मजदूरी और 40 प्रतिशत सामग्री पर खर्च किया जाएगा। यदि कोई हितग्राही स्वयं सामग्री उपलब्ध कराता है तो उसके लिए अलग से बिल तैयार किया जाएगा। इससे सामग्री खरीदी में होने वाली अनियमितताओं पर भी नियंत्रण लगेगा। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से मनरेगा के कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, फर्जी बिलों और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा तथा योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचेगा। हालांकि प्रारंभिक दौर में पंचायतों को कुछ तकनीकी और प्रक्रियागत चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय में यह व्यवस्था लाभकारी साबित होगी।
इनका कहना….
पंचायतों के बिल भुगतान प्रक्रिया में बदलाव किया है। बैतूल पंचायतों के बिल अब दूसरे जिले की ट्रेजरी से पास किए जाएगे। बैतूल ट्रेजरी से अन्य जिलों के पंचायतों के बिल पास होगे।
मीनाक्षी डाहरे, जिला कोषालय अधिकारी, बैतूल




