Betul Samachar: बैंक और सरकारी अस्पताल में दो स्थानों पर नौकरी कर रहा डॉक्टर

दोहरा वेतन लेने का आरोप, जिला अस्पताल की सेवाएं प्रभावित, जांच की उठी मांग
Betul Samachar: बैतूल (सांझवीर टाईम्स)। जिला अस्पताल बैतूल में पहले से ही डॉक्टरों की भारी कमी के बीच एक सरकारी डॉक्टर पर बैंक और अस्पताल—दो स्थानों पर नौकरी कर दोहरा वेतन लेने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामला सामने आने के बाद न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली, बल्कि उसकी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि एक सरकारी सर्जन शासन से नियमित वेतन लेने के साथ-साथ एक सरकारी बैंक से भी अलग से मानदेय प्राप्त कर रहा है।
जिला अस्पताल में पदस्थ, बैंक में भी दे रहे सेवाएं
प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ. नितेश चौकीकर बैतूल जिला अस्पताल में मेडिकल विशेषज्ञ के पद पर पदस्थ हैं और मध्यप्रदेश शासन से नियमित वेतन प्राप्त कर रहे हैं। इसके बावजूद वे सिविल लाइंस स्थित भारतीय स्टेट बैंक में मेडिकल सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। बैंक प्रबंधन द्वारा यह स्वीकार किया गया है कि डॉक्टर को मेडिकल ऑफिसर के रूप में सेवाएं देने के बदले भुगतान किया जाता है।
मरीजों को नहीं मिल रहा समय पर इलाज
सूत्रों का कहना है कि जिला अस्पताल में पहले से ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी हुई है, जिसके कारण मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। आरोप है कि संबंधित डॉक्टर अस्पताल को पूरा समय देने के बजाय बैंक में सेवाएं दे रहे हैं, जिससे अस्पताल की व्यवस्थाएं और अधिक प्रभावित हो रही हैं। मरीजों को घंटों तक डॉक्टर का इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उनमें आक्रोश बढ़ रहा है।
बैंक प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल
इस पूरे मामले में सरकारी बैंक की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। नियमों के तहत सरकारी डॉक्टर किसी भी बैंक या निजी संस्था में सेवाएं नहीं दे सकते, फिर भी बैंक के मानव संसाधन विभाग द्वारा ऐसे डॉक्टर को मेडिकल ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया जाना संदेह पैदा करता है। जानकारों का कहना है कि यह नियुक्ति किस आधार पर की गई, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
जांच की मांग, विभाग मौन
स्थानीय नागरिकों और मरीजों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित डॉक्टर के साथ-साथ बैंक प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
नियमों के विरुद्ध सेवाएं देने का आरोप
स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार कोई भी सरकारी डॉक्टर—चाहे वह नियमित हो, संविदा पर हो या विजिटिंग—किसी भी सरकारी या निजी संस्था से अलग से भुगतान लेकर सेवाएं नहीं दे सकता, जब तक कि इसके लिए विभागीय अनुमति न ली गई हो। ऐसे में एक सरकारी डॉक्टर द्वारा बैंक में सेवाएं देना नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि संबंधित डॉक्टर ने विभाग से पूर्व अनुमति नहीं ली है, तो यह गंभीर अनुशासनहीनता का मामला बनता है।
इनका कहना…
आरबीओ द्वारा बैंक में मेडिकल ऑफिसर नियुक्त किया गया है। उन्हें मानदेय भी प्रदान किया जाता है। सप्ताह में दो दिन सभी शाखाओं के बैंक कर्मियों का स्वास्थ्य परीक्षण मेडिकल ऑफिसर द्वारा किया जाता है।
कपिल येवले
ब्रांच मैनेजर, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
शाखा सिविल लाइंस, बैतूल
शासन के नियम अनुसार कोई भी शासकीय सेवक 1 ही जगह नौकरी कर सकता है। यदि 2 जगह नौकरी कर वेतन ले रहे है तो नियम विरुद्ध है।
डॉ मनोज हुरमाड़े
सीएमएचओ बैतूल।



