Betul Samachar: डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर बुजुर्ग से 23.50 लाख की ठगी

दिल्ली पुलिस बनकर वीडियो कॉल पर धमकाया, खातों की जांच के
Betul Samachar: बैतूल। जिले में साइबर ठगों ने एक बार फिर नया तरीका अपनाकर बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। थाना गंज क्षेत्र में 80 वर्षीय बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 23 लाख 50 हजार रुपए की साइबर ठगी की गई। ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग को मानसिक रूप से इतना भयभीत कर दिया कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए गंज थाना पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन के निर्देशन में साइबर सेल तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी है।
व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर दिखाई दिल्ली पुलिस की पहचान
पीड़ित बसंत कुमार मैदमवार (80) निवासी विनायक रेसिडेंसी, ऑयल मिल के पास, बैतूल एसबीआई बैंक से हेड कैशियर पद से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 27 नवंबर 2025 को उनके मोबाइल पर एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया, जिसमें कॉलर आईडी पर दिल्ली पुलिस लिखा हुआ दिख रहा था।
कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को दिल्ली पुलिस अधिकारी बताते कहा कि उनके आधार कार्ड से दिल्ली में एक सिम कार्ड लिया गया है, जिसका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग में किया गया है। ठग ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ दिल्ली क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज है और उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया जा चुका है।
गिरफ्तारी का डर, लगातार कॉल… और खाते खाली
ठगों ने लगातार वीडियो कॉल कर बुजुर्ग को गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी दी। साथ ही कहा कि यदि खातों की जांच में सहयोग नहीं किया गया तो तत्काल कार्रवाई होगी। भयभीत होकर बुजुर्ग ने 1 दिसंबर 2025 को एसबीआई खाते से 13.50 लाख रुपए यस बैंक के खाते में 10 लाख रुपए, फिनो बैंक के खाते में क्रञ्जत्रस् के जरिए ट्रांसफर कर दिए। कुल मिलाकर 23 लाख 50 हजार रुपए ठगों के खातों में चले गए।
गोल्ड लोन लेने पहुंचे बैंक, तब खुला ठगी का राज
2 दिसंबर को जब पीड़ित गोल्ड लोन लेने बैंक पहुंचे, तब बैंक मैनेजर ने पूरे घटनाक्रम को साइबर ठगी बताया। इसके बाद बुजुर्ग को ठगे जाने का अहसास हुआ। उन्होंने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और बाद में थाना गंज में रिपोर्ट दी। थाना गंज, जिला बैतूल में अपराध क्रमांक 04/26 अंतर्गत धारा 318(4), 308 बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई है। पुलिस साइबर ठगी में इस्तेमाल हुए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रेल की तकनीकी जांच कर रही है।
एसपी की अपील डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई चीज नहीं
पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई भी वैधानिक प्रक्रिया नहीं होती। पुलिस, सीबीआई, ईडी या कोई भी जांच एजेंसी फोन या व्हाट्सएप कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती। उन्होंने कहा कि आधार, सिम कार्ड, बैंक खाता या मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर मांगी गई कोई भी जानकारी या राशि किसी को न दें।
पुलिस के अनुसार, बीते वर्ष देशभर में 20 लाख से अधिक साइबर ठगी के मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें करीब 33 हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई है। यही कारण है कि साइबर अपराधों को लेकर लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि बीते माह थाना सारणी पुलिस ने तीन दिनों से डिजिटल अरेस्ट के डर में जी रहे एक वृद्ध को समय रहते समझाइश देकर 75 लाख रुपए की साइबर ठगी से बचा लिया था।




